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Thursday, 6 August 2015

मधुमेह रोगियों के लिए सर्वश्रेष्ठ आहार योजना

मधुमेह रोगियों के लिए आहार योजना
( http://www.onlymyhealth.com/health-slideshow/best-diabetes-diet-plan-for-diabetics-in-hindi-1397726311.html )

सुबह जल्दी : 6-7 बादाम / 1-2 अखरोट।
नाश्ते में आइटम : 1 कटोरी ओट्स/ दूध/ 2 अंडे के स्लाइस/मल्‍टीग्रेन ब्रेड/सब्जियां/दही/टोस्ट।
सुबह का नाश्ता : आप पपीता, नारियल और छाछ आदि सहित मौसमी फल जोड़ सकते हैं।
दोपहर के भोजन के मेनू: सलाद, सब्जियां, दाल, चपाती, दही, चावल, पनीर चिकन आदि।
शाम का नाश्ता : फल और स्‍नैक्‍स जैसे ढोकला, इडली, भुना हुआ नमकीन और मुरमुरा आदि।
रात के खाने से पहले : मिक्स्ट सब्जियों का सूप।
रात का भोजन: चपाती, सब्जी, दाल/चिकन, हरा सलाद।

मिथक : कार्बोहाइड्रेट में कटौती करें।
तथ्य: संतुलित आहार खाना सेहत की कुंजी होती है। सर्विंग का साइज और कार्बोहाइड्रेट का प्रकार विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता हैं। इसलिए होलग्रेन कार्बोहाइड्रेट पर ध्‍यान दें क्‍योंकि यह फाइबर का अच्छा स्रोत होता हैं। आसानी से पच जाता है और रक्त में शुगर के स्तर को सही रखता है।

मिथक : हाई प्रोटीन आहार सबसे अच्छा होता है
तथ्य: अध्ययन से पता चला है कि बहुत ज्यादा प्रोटीन, विशेष रूप से पशु प्रोटीन, खाना इंसुलिन प्रतिरोध का कारण बन सकता है। जो वास्‍तव में मधुमेह का एक महत्वपूर्ण कारक है। संतुलित आहार एक कुंजी है। एक स्‍वस्‍थ आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा शामिल होता है। हमारे शरीर को ठीक ढ़ंग से काम करने के लिए तीनों की जरूरत होती है।

मिथक : मधुमेह होने पर चीनी बिल्‍कुल नहीं लेनी है
तथ्य: मधुमेह होने पर चीनी को बिल्‍कुल नहीं लेना यह हम सभी के दिमाग में बैठा हुआ है। लेकिन अच्‍छी खबर यह है कि स्‍वस्‍थ आहार योजना को ठीक से लागू करने पर आप अपने पसंदीदा खाद्य पदार्थों का आनंद ले सकते हैं। मिठाई को सीमा से दूर रखने की जरूरत नहीं है जब तक यह एक स्वस्थ भोजन योजना का हिस्सा है या व्‍यायाम के साथ जुड़ा हुआ है।

दूध का सेवन
 दूध कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन का सही संयोजन होता है और यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।  दैनिक आहार में दूध के दो गिलास पीना एक अच्‍छा विकल्‍प है।

उच्‍च फाइबर सब्जियां
अपने आहार में उच्‍च फाइबर सब्जियां जैसे मटर, सेम, ब्रोकोली, पालक और हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करें। इसके अलावा दालें भी एक स्वस्थ विकल्प हैं और इसे आपके आहार का हिस्सा होना चाहिए।

उच्‍च फाइबर फल
फाइबर से भरपूर फल जैसे पपीता, सेब, संतरा, नाशपाती और अमरूद का सेवन भी करना चाहिए। आम, केले और अंगूर में शुगर की उच्‍च मात्रा होने के कारण इन फलों को सेवन कम करना चाहिए।

कृत्रिम स्‍वीटनर का कम इस्‍तेमाल
कृत्रिम स्‍वीटनर मूल रूप से शुगर से मिलने वाली कैलोरी को कम करता है। इन गोलियों का सेवन एक दिन में 6 गोलियों से कम होना चाहिए क्‍योंकि ज्‍यादा लेने से इसके साइड इफेक्‍ट होने लगते है। हालांकि, संयम एक बेहतर तरीका से जीवित रहने के लिए महत्वपूर्ण होता है। मधुमेह नियंत्रित किया जा सकता है अगर डॉक्टर और रोगी संयोजन के साथ काम करें।

अतिरिक्त वजन कम करें
यदि आप मोटे हैं, तो मधुमेह की रोकथाम वजन घटाने पर निर्भर हो सकती है। वजन का हर एक किलो कम करना आपके स्वास्थ्य में सुधार कर सकता हैं और आपके लिए आश्चर्यजनक हो सकता है। कम कार्बोहाइड्रेंट आहार और आहार योजना आपको वजन कम करने में मदद कर सकती हैं।

महत्‍वपूर्ण है विटामिन डी
हम में से ज्‍यादातर लोग विटामिन डी को महत्‍वपूर्ण नहीं समझते हैं। लेकिन यह मधुमेह से लड़ने के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसलिए विटामिन डी के स्तर की जांच की जानी चाहिए। कम विटामिन डी मधुमेह का कारण भी हो सकता है। विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत धूप पड़ना है।

खाना पकाने की युक्तियां
मधुमेह रोगियों के लिए बिना तेल के खाना बनाना सीखना होगा। परिष्कृत उत्पाद ( चीनी, सफेद आटा, सफेद चावल, फलों का रस आदि) खाना बंद करना होगा। साथ ही प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ खाने बंद करने होगें। इसके अलावा डेयरी उत्पाद खाने और पीने बंद करने होगें।

Saturday, 16 November 2013

हर छह सेकेंड में मरता है एक मधुमेह रोगी, तेजी से फैल रही है यह महामारी


 पूरी दुनिया मधुमेह की महामारी की चपेट में आ गई है। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के प्रकाशित एटलस में में छपे आंकड़े रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। यह एटलस मधुमेह पर ताजा अध्ययनों को हर दो साल में प्रकाशित करता है। एटलस का तो यहां तक कहना है कि उन्हें अध्ययन में यह कहीं नहीं दिखा कि इस महामारी को कोई रोक लग पाई है। इसके मुताबिक पूरी दुनिया में 382 मिलियन लोग मधुमेह की चपेट में आ चुके हैं। आलम यह है कि हर छह सेकेंड में एक व्यक्ति मधुमेह  का शिकार हो जा रहा है। पिठले दो सालों में मधुमेह के मरीजों की तादाद 4.4 प्रतिशत बढ़ी है जो पूरी दुनयिा की आबादी का पांच प्रतिशत है। अगर इस पर कारगर रोक नहीं लग पाई तो 2035 तक मधुमेह के मरीजों की तादाद का आंकड़ा 55 प्रतिशत हो जाएगा जो 592 मिलियन का आंकड़ा पार कर लेगा। जबकि 2009 में मधुमेह के सिर्फ 285 मिलियन मरीज थे। इतनी तेजी से मरीज इसलिए बढ़ी है क्यों कि लोगों ने अपनी जीवनशैली, खानपान पर ध्यान नहीं दिया और मोटापा बढ़ाया।
  अध्ययन में मौतों के बढ़ने की एक और वजह सामने आई है। वह यह कि इन्सुलिन का खर्च गरीब मरीज उठा नहीं पाते और समस्या उनके लिए विकराल होती जा रहा है। अगर सरकारें इस आर्थिक बोझ को उठाएं तो खर्चा काफी बढ़ जाएगा। इस साल ऐसा करनें में 548 बिलियन डालर का खर्च उठाना भी पड़ा है। चुपके से मरीज को मौत की ओर ले जाने वाली यह बीमारी तभी रुकेगी जब इस पर काफी बात की जाएगी और लोगों में जागरूकता लानी होगी। लोगों को कितनी मदद की जरूरत है इसका अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि सालाना 5.1 मिलियन लोग इस बीमारी से मर रहे हैं। और आडीएफ के एक अनुमान के मुताबिक हर साल 10 मिलियन लोग मधुमेह के गिरफ्त में आ रहे हैं। सबसे ज्यादा इस बीमारी के शिकार 40 से 59 आयु वर्ग के लोग हो रहे हैं। हर साल करीब 5 लाख लोगों की किडनी हर साल फेल हो जाती है और 1.5 मिलियन लोग अंधत्व के शिकार हो रहे हैं। अमेरिकी जनसंख्या ब्यूरो के मुताबिक मधुमेह के मरीजों की संख्या दुनिया की आबादी बढ़ने के अनुपात से ज्यादा है। अब तो कम उम्र को लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। विकासशील देशों में तो हर चार में से एक व्यक्ति मधुमेह की चपेट में है। चीन में तो मधुमेह की समस्या ज्यादा भयावह हो गई है। तीन में से एक चीनी नागरिक मधुमेह से पीड़ित है। एशियाई देशों में 12 प्रतिशत प्रौढ़ इस बीमारी से पीड़ित हैं। गरीब देशों में समस्या ज्यादा है। चीन  का आंकड़ा इस एटलस में शामिल नहीं है।
  हम सभी जानते हैं कि मधुमेह से होरही मौतों पर काबू पाया जा सकता है। यह खानपान व दवा से काबू में रखी जा सकती है मगर गरीबी व खराब जीवनशैली इसे महामारी बना चुकी है। विशेषज्ञों की राय है कि शारीरिक श्रम व अच्छे खानपान से टाईप 2 डायबिटीज पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। जो मधुमेह के मरीज हैं उन्हें हर छह महीने में एक बार चेकअप कराना चाहिए। साल में एक बार आंख चेक करानी चाहिए। जब भी रक्त परीक्षण कराएं तो लिपिड प्रोफाइल, किडनी फंक्शन और लीवर फंक्शन की जांच साल में एक बार जरूर करा लें। ( साभार- इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन -आईडीएफ व गूगल समाचार )।

Friday, 6 January 2012

मधुमेह से बचें, स्वस्थ रहें

    जब शरीर की पाचन क्रिया ध्वस्त हो जाती है और खाने से शरीर में जाने वाले ग्लूकोज का उपयोग बंद हो जाता है। ऐसा मधुमेह रोग के कारण होता है। जब ग्लूकोज का मात्रा रक्त में बढ़ जाती है तो वह व्यक्ति अधिक बार पेशाब करने लगता है। रक्तचाप बढ़ जाता है। बार-बार प्यास लगती है। दरअसल ग्लूकोज हमें भोजन से मिलता है जो यकृत और मासपेशियों में भी बनता है। शरीर की हर कोशिकाओं में संचित रहता है। यही ग्लूकोज हमारी ऊर्जा के स्रोत हैं। शरीर आग्नाशय बनने वाले एक रसायन इनसुलिन से इन कोशिकाओं में संचित ग्लूकोज से ऊर्जा बनती है। जब पाचनतंत्र खराब हो जाता है तो यह इनसुलिन बनना या तो कम हो जाता है या फिर बनता ही नहीं। परिणाम स्वरूप यह ग्लूकोज रक्त में बढ़ने लगता है क्यों कि इसको उर्जा में बदलना बंद हो जाता है। रक्त में ग्लूकोज की बढ़ती मात्रा कई रोगों को जन्म देता है और इनसुलिन का नहीं बनना मधुमेह कहलाता है।

मधुमेह का कारण

१- बहुत अधिक खाना। जो पच ही नहीं पाता। तले-भुने खाने क्रीम इत्यादि ( तैलीय खाद्य ) भी पाचन क्रिया को प्रभावित करता है।
२- शारीरिक श्रम का अभाव। 
३- मानसिक तनाव।
४- बहुत ज्यादा सोना।
५- बहुत अधिक खाना और उसके कारण मोटापा।
६- अधिक चीनी खाना। खाने में कारबोहाइड्रेट की अधिक मात्रा।
७- अधिक मात्रा में प्रोटीन और वसा ( तैलीय, चिकनाई वाले खाद्य ) लेना।
८- आनुवांशिक कारण। यानी माता-पिता, नाना-नानी वगैरह अगर मधुमेह के मरीज रहे हों तो भी मधुमेह का खतरा होता है।
मधुमेह के लक्षण
  दिन और रात बहुत बार पेशाब लगना। या तो वजन बढ़ जाता है या फिर काफी घट जाता है। बहुत प्यास का लगना। नजर धुंधली होना। घाव का देर से भरना। मधुमेह का इलाज न हो तो इससे अंधत्व, पैर खराब हो जाना, दिल की बीमारी और किडनी खराब हो जाती है। शरीर के लगभग सभी अंग मधुमेह से प्रभावित हो जाते हैं।आयुर्वेद  में इसे महारोग कहा जाता है क्यों कि समय रहते अगर इसका ईलाज नहीं किया गया तो इससे आंखें खराब हो जाती हैं। हड्डियोँ के जोड़ों में दर्द, नपुंसकता, किडनी फेल हो जाती है, सेक्स व पेशाब संबंधित कई रोग हो जाते हैं। शरीर की अनगिनत जटिलताएं शुरू हो जाती हैं।
  आयुर्वेद में इसका इलाज की शुरुआत जीवनशैली में पूरी तरह से परिवर्तन से शुरू होती है। ऐसे रोगी को दवा और संयमित भोजन के साथ
सक्रिय रहने की सलाह दी जाती है। आरामतलब जीवन वर्ज्य है।

क्या करना चाहिए ? भोजन व जीवनशैली संबंधित सुझाव-
१-खाने में दानेदार खाद्य जैसे कि गेहूं की रोटी, पास्ता, भूरा चावल उपयोग करें।

२- बिना चिकनाई वाले दूध व दही लें।
३-प्याज, लहसुन, करैला, पालक, कच्चा केला,जामुन का सेवन करें।
४- एक भाग जौ का आंटा, एक भाग  black chickpeas, चार भाग गेहूं का आंटा मिलाकर रोटी बनाकर खाएं।
५- माठा, खट्टा और नमकीन खाना, आलू, मीठा आलू, ताजी दालें, वसायुक्त दही, तैलीय मसालेदार खाने से बचना चाहिए।
६- अंगूर, आम, व अन्नास जैसे मीठे फल खाने से बचना चाहिए।
७- शारीरिक श्रम सुरू कर देना चाहिए। सुबह व शाम को कम से कम ३०-४० मिनट तेज चलना चाहिए।
८- दिन में सोना नहीं चाहिए। यह बेहद नुकसानदेह है मधुमेह मरीज के लिए।

घरेलू  ईलाज
१- दिन में एक बार कड़वे करैले का जूस दो चम्मच लेना चाहिए। इसकी सब्जी भी पकाकर खानी चाहिए।

२- एक चम्मच fenugreek seeds का पाउडर दिन में दो बार पानी के साथ लेना चाहिए।
३- आंवले का जूस एक चम्मच और एक चम्मच करैले का जूस मिलाकर पीना चाहिए।


Thursday, 20 November 2008

नपुंशक बना देता है मधुमेह

मधुमेह या डायबिटीज का एक प्रभाव ऐसा भी है जिस पर अमूमन खुलकर चर्चा कम ही होती है। मधुमेह पर होने वाली कई गोष्ठियों में भी विशेषग्य अक्सर इस विषय ( सेक्स प्रभाव ) को छोड़ देते हैं। सच यह है कि असुविधाजनक चर्चा मानकर छोड़ दिए जाने से इस गंभीर नुक्सान के प्रति जागरूकता लाने का एक महत्वपूर्ण पहलू छूट जाता है। विशेषग्यों का मानना है कि मधुमेहग्रस्त स्त्रियों और पुरुषों में सेक्स संबंधी ऐसी शिथिलता आ जाती है जिसके कारण इच्छा होते हुए भी ऐसे मरीज सेक्स के प्रति अक्षम हो जाते हैं। अंग शिथिल पड़ जाते हैं । महिलाओं में योनि की तंत्रिकाओं व उसकी कोशिकाओं को इतना नुकसान पहुंचता है जिससे संसर्ग के वक्त होने वाला द्रव्य प्रवाह रुक जाता है। योनि मार्ग सूख जाता है जिससे संसर्ग काफी तकलीफदेह हो जाता है। नतीजे में मधुमेह के मरीजों में कामेच्छा ही मर जाती है। एक अध्ययन के मुताबिक लगभग ४० प्रतिशत मधुमेह पीड़ित महिलाओं में या कामेच्छा ही मर जाती है या सेक्स के प्रति उनकी रुचि ही खत्म हो जाती है। कोई कामोत्तेजना न होने या सेक्स की अक्षमता के कारण यौनांगों में कोई कामोत्मुक प्रतिक्रिया नहीं होती। कहने का अर्थ यह है कि ऐसा महिला मरीजों का पूरा सेक्स जीवन ही नष्ट हो जाता है।
इसी तरह पुरुषों में भी मधुमेह के कारण तंत्रिकाएं और रक्तवाहिनियां प्रभावित होती हैं। इस कारण वह नपुंशकता का शिकार हो जाता है। मधुमेह पुरुषों के शिश्न समेत पूरे शरीर के तंत्रिका तंत्र को नष्ट कर देता है। एक बार जब तंत्रिकाएं नष्ट हो जाती हैं तो वह बिल्कुल क्रियाशील नहीं रह जाती हैं। संपर्क या संसर्ग के वक्त इसी कारण पुरुषों को कोई उत्तेजना नहीं होती। सामान्य अर्थों में इसे यह कहा जा सकता है कि मन में उठी कामोत्तेजना शिश्न ( लिंग ) तक नहीं पहुंच पाती। मन उत्तेजित हो जाता है मगर यौनांग बेजान पड़े रहते हैं क्यों कि उनतक कामोत्तेजना को पहुंचाने वाली तंत्रिकाओं की क्रियाशीलता मधुमेह के कारण नष्ट हो चुकी रहती है। नपुंशकता की इस अवस्था में लगभग असहाय हो जाता है मधुमेह का मरीज। क्यों कि लिंग में वह तनाव या कड़ापन नही आ पाता जो सेक्स क्रिया को पूरा करने के लिए जरूरी होता है। यानी दो मुख्य घटनाएं होती हैं। पहला यह कि संवेदनाओं या कामेच्छा की सूचना यौनांगों तक नहीं पहुंच पाती और दूसरा यह कि रक्त कोशिकाओं में दोष के कारण लिंग में तनाव नहीं आता। स्त्रियों और पुरुषों में सेक्स की यह अधोगति तब आती है जब वे मधुमेह को नियंत्रित नहीं रख पाते। अगर मधुमेह पर कारगर नियंत्रण हो तो सेक्स संबंधी इन विकारों से बचा जा सकता है।
अब आइए समझने की कोशिश करते हैं कि कैसे या किन रसायनों के कारण मधुमेह के मरीज नपुंशकता के शिकार हो जाते हैं। दरअसल जब मधुमेह को मरीज नियत्रित नहीं रख पाता है तो शरीर में सेक्स व अन्य क्रियाओं को संपन्न कराने वाले महत्वपूर्ण रसायन नाइट्रिक आक्साइड की कमी हो जाती है। इसके अभाव में शिश्न या लिंग में रक्त का दबाव नहीं बन पाता है। इस कारण सेक्स का कार्य करने के लायक बनाने वाला लिंग में भरने वाला खून बाहर निकल जाता है। जबकि उसे लिंग में रुकना चाहिए। इब रक्त का दबाव नहीं बनने से लिंग शिथिल पड़ा रह जाता है। यानी मधुमेह के मरीज में नाइट्रिक आक्साइड की कमी से रक्तवाहिनियां काफी संकरी और कड़ी हो जाती हैं। उनमें लचीलीपन कम हो जाता है। इसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है। हृदयजनित बीमारियां भी इसी के कारण पैदा होती हैं। जब एथेरोस्क्लेरोसिस से वह धमनियां प्रभावित होती हैं जो लिंग में रक्त प्रवाहित करती हैं तो जाहिर तौरपर लिंग में बहुत कम रक्त जा पाता है नतीजे में शिश्न शिथिल ही पड़ा रह जाता है। जो सेक्स क्रिया के अयोग्य होता है। अगर मधुमेह को काबू में रखा जाए तो यह सब कुछ रोका या कम किया जा सकता है।

सेक्स क्षमता बनाए रखने के कुछ सुझाव

मधुमेह पीड़ित स्त्री व पुरुष इन विकारों को रोक सकते हैं। बस आप निम्न कुछ बातों को ध्यान में रखिए।

१- बेहिचक अपने चिकित्क से इस संबंझ में बात करिए। जब आप अपने डाक्टर से बात करेंगे तो कोई शर्म मत महसूस करिए क्यों कि आप जो बात डाक्टर को बता रहे हैं वह उसे पता है। वह जानता है कि मधुमेह के मरीज को यह परेशानी भी होती है। आप जैसे ही बात शुरू करेंगे उसकी भी आपके प्रति झिझक खत्म हो जाएगी। आपका डाक्टर बातचीत से ही तय कर पाएगा कि आपको यह समस्या क्यों है? यह मधुमेह से है या किसी अन्य कारण से ?

२- ब्लड सुगर को नियंत्रित रखिए। अगर लगातार ऐसा रखेंगे तो तंत्रिकाओं व रक्तवाहिनियों में वह गड़बड़ी नहीं आएगी जो सेक्स क्षमता को प्रभावित करती है।
३- मधुमेह के मरीज तंबाकू सेवन और धूम्रपान से बचें। धूम्रपान तो रक्त में नाइट्रिक आक्साइड के स्तर को घटा देता है। जो रक्तवाहिनियों को संकरा बनाकर उनमें रक्त प्रवाह को कम या बंद कर देता है।
४- अधिक शराब पीनें से बचें। यह मधुमेह पीड़ितों में सेक्स क्षमता को घटाता है और रक्तवाहिनियों को नुक्सान पहुंचाता है। अगर पीना जरूरी है तो पुरुष एक दिन में दो पैग और महिलाएं एक से ज्यादा न लें।
इन सब के पीछे सिर्फ यह एहतियात होनी चाहिए कि मधुमेहपीड़ित तंत्रिकाओं और रक्तवाहिनियों को नष्ट होने से बचाएं। और ऐसा सिर्फ जागरूक रहकर ही किया जा सकता है। अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें और सुगर को कभी बढ़ने नहीं दें।

साभार-- मेलाबिकडाटकाम

Saturday, 2 August 2008

सुगर को घटने ही नहीं देता है तनाव

तनाव आपके ब्लड सुगर को बढ़ा देता है। अगर आप मधुमेह रोगी हैं तो सावधान हो जाएं क्यों कि आप विभिन्न प्रयासों से मधुमेह को नियंत्रित तो करते हैं मगर तनाव आपको ऐसा करने नहीं देगा। मतलब ब्लड सुगर बढ़ाने में तनाव महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हम आप सामान्यतया पांच किस्म के तनाव के शिकार होते हैं। ये हैं- भावनात्मक, भौतिक, पेशागत, जीवन के प्रति अपनी प्रतिक्रियाएं वगैरह। ये सभी फिजियोलाजिकल ( शारीरिक क्रियाओं से संबंधित ) तनाव पैदा करते हैं। इनसे उत्पन्न तनावों से ब्लड सुगर का लेवेल नसिर्फ बढ़ जाता है बल्कि गंभीर बीमारियों को भी साथ लाते हैं। एमस्टरडम के शोध करने वालोंविशेषग्यों एक अध्ययन के बाद सुझाया है कि ब्लड सुगर नियंत्रण का खुशहाल रहने से गंभीर संबंध है। अर्थात खुश और बेहतर जीवन जीने वाले ब्लड सुगर को अच्छी तरह नियंत्रित कर सकते हैं।
आइए जानने की कोशिश करते हैं कि कैसे तनाव ब्लड सुगर को बढ़ाता है और गंभीर बीमारियों को दावत देता है।
जब तनाव हद की सामा पार कर जाता है तो इसके कारण एक खास किस्म का हारमोन पैदा होता है। इसे कोर्टिसोल कहते हैं। यह सीधे इनसुलिन पर हमला करता है और नतीजे में रक्त में सुगर की मात्रा को बढ़ा देता है। यह बड़ा लड़ाकू हारमोन होता है। इसे फाइट या फ्लाइट हारमोन भी कहते हैं। जिसका अर्थ है कि जितना ज्यादा आप तनाव पालेंगे उतना ही अधिक क्रिस्टोल पैदा होगा। जब हमारा शरीर ज्यादा क्रिस्टोल पैदा कर देता है तो यह यह शरार के प्रति इन्सुलिन की संवेदनशीलता को घटा देता है। इन्सुलिन का यह दुश्मन क्रिस्टोल शरीर में स्थित ग्लूकोज इतना कठोर बना देता है जिससे शरीर की कोशिकाएं इस सुगर को ग्रहण नहीं कर पाती हैं। इसके बाद यह बचा ग्लूकोज रक्त में मिलकर सुगर की मात्रा को बढ़ा देता है। अर्थात यह आसानी से समझ में ाने वाली बात है कि तनाव किस तरह ब्लड सुगर को बढ़ा देता है। अगर तनावग्रस्त व्यक्ति मधुमेह रोगी है तो तनाव उसके लिए बड़ी समस्या ला सकती है। क्यों कि सुगर के कारण उसे तनाव विरासत में मिली रहती है। रोज का तनाव हो तो निश्चित ही सुगर लेवेल को ठीक रखना मुश्किल हो जाएगा। क्यों कि इससे पैदा हुआ क्रिस्टोल हारमोन रक्त में सुगर को बढ़ाता ही रहेगा।
तनावरहित जीवन मधुमेह के रोगी के स्वस्थ जीवन का मूलमंत्र है। तनाव से बचेंगे तो सुगर नियंत्रित रहेगा या फि सुगर को कड़ाई से नियंत्रित रखेंगे तो तनाव भी दूर रहेगा। दोनों ही स्थितियों में सुधार होगा और आप स्वस्थ महसूस करेंगे। अपनी दिनचर्या व जीवनशैली को तनाव मुक्त रखकर सुगर पर आसानी से नियंत्रण पाया जा सकता है। अध्ययनों से साबित हो चुका है कि तनाव मुक्त रहकर सुगर को नियंत्रित रखा जा सकता है। तनाव से निजात के लिए सामान्यतया निम्न उपायों की मदद ली जा सकती है।-----
१- गहरी सांस लें, सांस को रोकें और फिर धीरे-धीरे छोड़ें।
२-खुली जगह में नियमित टहलें।
३-व्यायाम करें।
४-प्राकृतिक जगहों की सैर करें।
५-सकारात्मक नजरिया बनाए रखें।
६- अपना मूड ठीक करने के लिए कैफीन व निकोटीन वाले पदार्थ, शराब व सुगर के सेवन से बचें।
७- खुद के मन की शांन्ति के लिए खुद ही रास्ता तलाशें। संतुलित व शांत रहने की तकनीक तलाशें और उसे आजमाएं।


इन सबके बाद अगर आपका ब्लड सुगर अनियंत्रित है तो बेहतर होगा कि अपने स्वास्थ्य को सुधारने और तनाव से मुक्ति पर पूरा ध्यान दें।
( यह जानकारी मुझे मेल से जूलिया हन्फ ने भेजी है। जूलिया सुगर सेसंबंधित समस्याओं के स्थायी इलाज का भी दावा करती हैं। अपनी साइट में बड़े विस्तार से कई चरणों इलाज की प्रकिया भी दी हैं। इनका कहना है कि सुगर की जटिलताओं पर वे बराबर अध्ययन बी करती रहती हैं। इन्हों ने इस साइट (http://www.melabic.com/ ) में एक दवा भी सुझाई है। इस दवा का नाम मेलाबिक है। साइट में जाकर आप भी विस्तार से जान सकते हैं कि सुगर व इसके इलाज की कितनी इनको महारत हासिल है। सुगर की आम दवाओं से होने वाली हानियों को भी बड़े विस्तार से बताती हैं। तनाव दूर कर तीन चरणों में आपको स्वस्थ कर देने का नुस्खा है इनके पास। उनके ही शब्दों में देखिए-
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गुड़मार के पत्ते। इनके खाने से मीठापन गायब हो जाता है।


यही है जूलिया हन्फ की मेलाबिक दवा।

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