जब कश्मीर में शुरुआती झगड़े हुए तभी मैंने इसी ब्लाग में लिखे लेख ( इसी देश के हैं अमरनाथ तीर्थयात्री ) में आशंका जताई थी कि अमरनाथ के तार्थयात्रियों के लिए जमीन देना और वापस लेना जानबूझकर खेला गया सियासी खेल है। अमरनाथ की जमीन तो बहाना है । दरअसल इसी बहाने कश्मीर केलोगों में अलगाववाद की भावनाओं को भड़काना है। और अब कुछ राजनीतिक दल और कश्मीर के अलगाववादी एक ही सुर में बोल रहे हैं। सज्जाद लोन ने तो शांति के लिए कश्मीर को बाकायदा तीन हिस्सों में बांटने की दलील पेश कर दी । अब इसके बाद से कश्मीर की हालत और बिगड़ गई है।
एनडीटीवी के मुकाबला कार्यक्रम में संचालक दिवांग ने पूछा था कि कैसे कश्मीर में शांति संभव है। ठीक इसी तरह के बयान लगभग धमकी के अंदाज में महबूबा मुफ्ती ने एनडीटीवी के चक्रव्यूह में कहा कि समस्या का हल नहीं निकला तो कश्मीर के कई टुकड़े हो जाएंगे। इस कार्यक्रम में महबूबा से विजय त्रिवेदी बात कर रहे थे। बंद के कारण कश्मीर का जो ब्लाकेड हुआ है उससे महबूबा काफी नाराज दिख रही थीं। साफ-साफ कहा कि हम पाकिस्तान से अपनी जरूरत का सामान मंगाने पर मजबूर हो जाएंगे। और वहीं किया जिसकी धमकी महबूबा ने दी थी। हुरियत नेता शेख अजीज के साथ घाटी के लोग और व्यापारियों का जत्था पाक अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद की और कूच कर गया जिसे रोकने के लिए पुलिस और सेना ने फायरिंग की जिसमें १५ लोग मारे गए। इन प्रदर्शनों में अब तक २२ लोग मारे जा चुके हैं। यही तो चाहते हैं कश्मीर के उग्रवादी और उनसे सुर मिला रहे राजनीतिक दल। कशमीर की जनता जितनी भड़केगी वे उतनी ही सहानुभूति बटोरेंगे। दरअसल यह जानबूझकर कश्मीर को बांटने की साजिश रची गई है। तभी तो कुरान लेकर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
घाटी के अलगाववादी समर्थक मुसलमानों और सत्तालोलुप राजनैतिक दलों ने इस संकट में एक राजनीतिक अवसर देखा और जम्मू- श्रीनगर राजमार्ग के बदले मुज़फ़्फ़राबाद रोड खोलने और उसी रास्ते से कारोबार करने की धमकी दी। इस संघर्ष के कारण राज्य की स्थिति 1990 से भी ख़राब हो गई है. वर्ष 1990 में पहले हिंसा शुरू हुई और उसके बाद जनप्रदर्शन, मगर इस वक़्त बंदूक़ ख़ामोश है और कश्मीरी अलगाववादी संगठन प्रदर्शन की ओट में स्वतंत्रता का आंदोलन चला रहे हैं. दरअसल कश्मीर के उग्रवादी नहीं चाहते हैं कि कश्मीर में बाहर के लोगों का ज्यादा आना-जाना हो। इससे उनकी गतिविधियों पर अंकुश लगेगा। कश्मीर में उग्रवादियों के आधिपत्य का खामियाजा पूरा राज्य भुगत रहा है। कश्मीर का विकास रुका हुआ है।
कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला ने जब कश्मीर के पर्यटन के विकास के निमित्त होटल व अन्य सुविधाओं के विकास के लिए लीज पर जमीन देने की घोषणा की तो इसी तरह का विरोध हुआ जो आज श्राइन बोर्ड को जमीन देने के सवाल पर हो रहा है। तब शेख अब्दुल्ला को कश्मीर विरोधी करार दिया गया था जबकि यह वह रास्ता था जहां से कश्मीर का बड़े पैमाने पर विकास होने वाला था। कश्मीर भले गरीब रहे मगर पूरी तरह से मुस्लिम आबादी वाला बना रहे की मानसिकता हर बार ऐसे रोड़ खड़ा करती है जिससे लगता है कि कश्मीर भारत का राज्य ही नहीं है। दरअसल कश्मीर को ऐसे विशेष राज्य का दर्जा हासिल है जहां की जमीन कोई बाहरी नहीं खरीद सकता न ही स्थाई तौर पर इस्तेमाल कर सकता है। यह राज्यों के गठन के समय की गई वह भारी भूल थी जिसका नतीजा आज सामने है।
जबसे कश्मीर में उग्रवाद भड़का है तब से पूरे कश्मीर में भारत विरोधी ताकतें बंदूकों के बल पर वहां की जनता का भयादोहन कर रहीं हैं। यह बात स्थानीय लोगों के मन में बैठा दी गई है कि भारत सरकार उनका हित नहीं चाहती है। अभी कश्मीर में विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्र या भारत सरकार के प्रति अविश्वाश की बात महबूबा मुफ्ती भी कर रही हैं । यह सब सिर्फ इस लिए ताकि देश के दूसरे भागों के लोगों की यहां कश्मीर में गतिविधि न बढ़े। अगर दूसरी आबादी का यहां आना जाना शुरू हो जाएगा तो देर सबेर यहां की जनता उनकी झूठ को पहचान जाए और विकास के उस रास्ते की हामी भर दे जिसे शेख अब्दुल्ला ने शुरू किया था। इसमें कश्मीर का विकास तो होगा, लोग संपन्न् और खुशहाल भी होंगे मगर उग्रवादियों को कश्मीर छोड़ना भी पड़ेगा। तब भारत विरोध पर टिकी पाकिस्तान की राजनीति को भी धक्का लगेगा। इसे न तो पाकिस्तान की आईएसआई बर्दास्त करेगी और न कश्मीर में पनाह लिए उनके उग्रवादी। इसके खिलाफ संत्रास में दबी कश्मीर की जनता क्या बोलेगी जब इस राज्य के नेता ही उग्रवादियों के सुर में सुर मिलाकर बोल रहे हैं। कौन नहीं चाहता कि कश्मीर में अमन चैन हो और विकास की वह बयार बहे जिसमें कश्मीरी भी खुशहाल हो। ऐसा कश्मीर के भारत की मुख्य धारा से जुड़ने से ही संभव है। जबकि उग्रवादी और उनके पिट्ठू कश्मीर को भारत की मुख्य धारा से अलग-थलग रखना चाहते हैं। इसी मकसद को अंजाम देने के लिए अमरनाथ यात्रियों को दी जाने वाली जमीन का बहाना ढूंढ लिया है।
अमरनाथ श्राइन बोर्ड एक ऐसा बहाना है जिसकी आड़ में कश्मीर को हिंदू मुस्लिम खेमे में बांटना आसान हो गया है। विरोध करो नहीं तो कश्मीर में हिंदू बस जाएंगे जैसे भयादोहन के अवसर मिल गए हैं। उग्रवाद की बजाए कश्मीरी जनता को इस तरह बरगलाकर काम करना अब ज्यादा आसान हो गया है। इससे कश्मीरी जनता में अपने आप विद्रोह पनपेगा। एक साल के भीतर कश्मीर में होने वाले चुनाव ने उग्रवादियों और उनकी आड़ में बहुसंख्यक कश्मीरी मुसलमान जनता का वोट हासिल करने की चाहत रखने वाले दलों को और करीब ला दिया है। यह खतरनाक खेल महबूबा जैसी नेता भी खेल रही हैं।
जम्मू-कश्मीर में हालात बिगड़े, 15 की मौत
(देखे बीबीसी का यह समाचार--- http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2008/08/080812_kashmir_curfew_lastrites.shtml )
भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर की पुलिस के अनुसार मंगलवार को कश्मीर घाटी के विभिन्न इलाक़ों में हिंसक भीड़ पर हुई पुलिस फ़ायरिंग में कम से कम तेरह लोगों की मौत हुई है. कई अन्य लोग घायल हुए हैं.जबकि सोमवार की फ़ायरिंग में घायल हुए लोगों में से दो की मंगलवार को मौत हो गई. सोमवार से लेकर अब तक कश्मीर घाटी में प्रदर्शनाकरियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पों में 22 लोग मारे जा चुके हैं. उधर जम्मू में मंगलवार को भड़के सांप्रदायिक दंगों के दौरान हुए विस्फोट में दो व्यक्ति की मौत हुई है और इसके बाद किश्तवाड़ के इलाक़े में सेना तैनात कर दी गई है. कश्मीर घाटी के सभी शहरों में कर्फ़्यू लगा दिया गया है और ख़बरें हैं कि घाटी के विभिन्न हिस्से में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. कश्मीर घाटी में लोग वरिष्ठ हुर्रियत नेता शेख़ अब्दुल अज़ीज़ की मौत के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं. सोमवार को मुज़फ़्फ़राबाद मार्च करने की कोशिश कर रहे लोगों पर सेना की फ़ायरिंग में हुर्रियत नेता अज़ीज़ सहित सात लोगों की मौत हो गई थी और पूरी घाटी में तनाव फैल गया था. सोमवार रात से ही फ़ायरिंग का विरोध करते हुए हज़ारों लोग ग़ाजीगुंड, अनंतनाग और गंदरबल क्षेत्रों में सड़कों पर उतर आए थे. उधर पाकिस्तान ने सोमवार की इस घटना की निंदा की है और पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने शेख़ अज़ीज़ की मृत्यु पर अफ़सोस ज़ाहिर किया. पाकिस्तान ने फ़ायरिंग की घटना को 'नाजायज़ और ज़रूरत से ज़्यादा बल का इस्तेमाल' बताया है. भारत प्रशासित कश्मीर की स्थिति पर पाकिस्तान के बयान को गंभीरता से लेते हुए भारत ने कहा है कि इससे शांति वार्ता प्रभावित हो सकती है. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने कहा, "मैंने जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर पाकिस्तानी विदेश मंत्री और उनके मंत्रालय के प्रवक्ता के बयानों को देखा है. ये सीधे-सीधे भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है." उनका कहना था, "इस तरह के बयानों से जम्मू-कश्मीर में स्थिति सुधारने में मदद नहीं मिलती और ना ही इससे द्विपक्षीय शांति वार्ता को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी." विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट कहा कि आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का असर शांति वार्ता पर पड़ सकता है.
किश्तवाड़ में सांप्रदायिक झड़पें
दूसरी ओर जम्मू में बीबीसी संवाददाता बीनू जोशी के अनुसार वहाँ प्रदर्शनों का दौर जारी है और वहाँ कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई है और दर्जन भर अन्य लोग घायल हुए हैं. पुलिस का कहना है कि यह मौत किश्तवाड़ में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच हुई झड़पों के कारण हुई है. प्रशासन ने जम्मू में कर्फ़्यू में दिन भर की छूट दी है. जम्मू में राजौरी में भी कर्फ़्यू में ढील दी गई है. लेकिन किश्तवाड़ में कर्फ़्यू दोबारा लागू कर दिया गया है. पुलिस का कहना है कि किश्तवाड़ में हिंदू और मुसलमान दोनों कर्फ़्यू का उल्लंघन करते हुए सड़कों पर उतर आए और उन्होंने एक दूसरे की संपत्तियों को नुक़सान पहुँचाया. अधिकारियों का कहना है कि इसी बीच किसी ने भीड़ के बीच एक बम फेंक दिया जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई. उनके अनुसार इसके बाद सुरक्षाबलों ने फ़ायरिंग करके भीड़ को तितरबितर किया और उसे नियंत्रित किया. लेफ़्टिनेंट कर्नल एसडी गोस्वामी के अनुसार किश्तवाड़ में सेना को तैनात किया गया है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इसके अलावा जम्मू के शेष इलाक़े में तनावपूर्ण शांति है.
बातचीत बेनतीजा
इस बीच दिल्ली में सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल की एक बैठक गृहमंत्रलय में हुई है.इस बैठक में सिवाय इस बात के कोई नतीजा नहीं निकल सका कि और बातचीत करनी चाहिए. माना जा रहा है कि अब प्रधानमंत्री एक और बैठक बुला सकते हैं जिसमें जम्मू के नेताओं के अलावा कश्मीरी नेताओं को भी आमंत्रित किया जा सकता है. महत्वपूर्ण है कि हाल में भारतीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जम्मू-कश्मीर गया था जिसका मकसद अमरनाथ संघर्ष समिति के साथ बातचीत कर जम्मू में चल रहे आंदोलन का समाधान खोजना था.
तीस से ज़्यादा राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक संगठनों की अमरनाथ संघर्ष समिति की माँग है कि अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन दी जाए और अमरनाथ यात्रा का प्रबंधन सरकार की जगह फिर से अमरनाथ मंदिर बोर्ड संभाले.
हालाँकि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की संघर्ष समिति के लोगों से बातचीत हुई लेकिन उसका कोई हल नहीं निकल पाया था और जम्मू क्षेत्र में आंदोलन अब भी जारी है. उधर गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने भारत प्रशासित कश्मीर के व्यापारियों से अपील की थी कि वे जम्मू में जारी आंदोलन के कारण वैकल्पिक रास्ता खोजने के लिए मार्च न करें.
Wednesday, 13 August 2008
Saturday, 2 August 2008
सुगर को घटने ही नहीं देता है तनाव
तनाव आपके ब्लड सुगर को बढ़ा देता है। अगर आप मधुमेह रोगी हैं तो सावधान हो जाएं क्यों कि आप विभिन्न प्रयासों से मधुमेह को नियंत्रित तो करते हैं मगर तनाव आपको ऐसा करने नहीं देगा। मतलब ब्लड सुगर बढ़ाने में तनाव महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हम आप सामान्यतया पांच किस्म के तनाव के शिकार होते हैं। ये हैं- भावनात्मक, भौतिक, पेशागत, जीवन के प्रति अपनी प्रतिक्रियाएं वगैरह। ये सभी फिजियोलाजिकल ( शारीरिक क्रियाओं से संबंधित ) तनाव पैदा करते हैं। इनसे उत्पन्न तनावों से ब्लड सुगर का लेवेल नसिर्फ बढ़ जाता है बल्कि गंभीर बीमारियों को भी साथ लाते हैं। एमस्टरडम के शोध करने वालोंविशेषग्यों एक अध्ययन के बाद सुझाया है कि ब्लड सुगर नियंत्रण का खुशहाल रहने से गंभीर संबंध है। अर्थात खुश और बेहतर जीवन जीने वाले ब्लड सुगर को अच्छी तरह नियंत्रित कर सकते हैं।
आइए जानने की कोशिश करते हैं कि कैसे तनाव ब्लड सुगर को बढ़ाता है और गंभीर बीमारियों को दावत देता है।
जब तनाव हद की सामा पार कर जाता है तो इसके कारण एक खास किस्म का हारमोन पैदा होता है। इसे कोर्टिसोल कहते हैं। यह सीधे इनसुलिन पर हमला करता है और नतीजे में रक्त में सुगर की मात्रा को बढ़ा देता है। यह बड़ा लड़ाकू हारमोन होता है। इसे फाइट या फ्लाइट हारमोन भी कहते हैं। जिसका अर्थ है कि जितना ज्यादा आप तनाव पालेंगे उतना ही अधिक क्रिस्टोल पैदा होगा। जब हमारा शरीर ज्यादा क्रिस्टोल पैदा कर देता है तो यह यह शरार के प्रति इन्सुलिन की संवेदनशीलता को घटा देता है। इन्सुलिन का यह दुश्मन क्रिस्टोल शरीर में स्थित ग्लूकोज इतना कठोर बना देता है जिससे शरीर की कोशिकाएं इस सुगर को ग्रहण नहीं कर पाती हैं। इसके बाद यह बचा ग्लूकोज रक्त में मिलकर सुगर की मात्रा को बढ़ा देता है। अर्थात यह आसानी से समझ में ाने वाली बात है कि तनाव किस तरह ब्लड सुगर को बढ़ा देता है। अगर तनावग्रस्त व्यक्ति मधुमेह रोगी है तो तनाव उसके लिए बड़ी समस्या ला सकती है। क्यों कि सुगर के कारण उसे तनाव विरासत में मिली रहती है। रोज का तनाव हो तो निश्चित ही सुगर लेवेल को ठीक रखना मुश्किल हो जाएगा। क्यों कि इससे पैदा हुआ क्रिस्टोल हारमोन रक्त में सुगर को बढ़ाता ही रहेगा।
तनावरहित जीवन मधुमेह के रोगी के स्वस्थ जीवन का मूलमंत्र है। तनाव से बचेंगे तो सुगर नियंत्रित रहेगा या फि सुगर को कड़ाई से नियंत्रित रखेंगे तो तनाव भी दूर रहेगा। दोनों ही स्थितियों में सुधार होगा और आप स्वस्थ महसूस करेंगे। अपनी दिनचर्या व जीवनशैली को तनाव मुक्त रखकर सुगर पर आसानी से नियंत्रण पाया जा सकता है। अध्ययनों से साबित हो चुका है कि तनाव मुक्त रहकर सुगर को नियंत्रित रखा जा सकता है। तनाव से निजात के लिए सामान्यतया निम्न उपायों की मदद ली जा सकती है।-----
१- गहरी सांस लें, सांस को रोकें और फिर धीरे-धीरे छोड़ें।
२-खुली जगह में नियमित टहलें।
३-व्यायाम करें।
४-प्राकृतिक जगहों की सैर करें।
५-सकारात्मक नजरिया बनाए रखें।
६- अपना मूड ठीक करने के लिए कैफीन व निकोटीन वाले पदार्थ, शराब व सुगर के सेवन से बचें।
७- खुद के मन की शांन्ति के लिए खुद ही रास्ता तलाशें। संतुलित व शांत रहने की तकनीक तलाशें और उसे आजमाएं।
इन सबके बाद अगर आपका ब्लड सुगर अनियंत्रित है तो बेहतर होगा कि अपने स्वास्थ्य को सुधारने और तनाव से मुक्ति पर पूरा ध्यान दें।
( यह जानकारी मुझे मेल से जूलिया हन्फ ने भेजी है। जूलिया सुगर सेसंबंधित समस्याओं के स्थायी इलाज का भी दावा करती हैं। अपनी साइट में बड़े विस्तार से कई चरणों इलाज की प्रकिया भी दी हैं। इनका कहना है कि सुगर की जटिलताओं पर वे बराबर अध्ययन बी करती रहती हैं। इन्हों ने इस साइट (http://www.melabic.com/ ) में एक दवा भी सुझाई है। इस दवा का नाम मेलाबिक है। साइट में जाकर आप भी विस्तार से जान सकते हैं कि सुगर व इसके इलाज की कितनी इनको महारत हासिल है। सुगर की आम दवाओं से होने वाली हानियों को भी बड़े विस्तार से बताती हैं। तनाव दूर कर तीन चरणों में आपको स्वस्थ कर देने का नुस्खा है इनके पास। उनके ही शब्दों में देखिए-
PS. The combination of Melabic and my 3 step program will help you
relieve stress and take retake control of your health. Find out more
by visiting me at Melabic.com
PPS You can order online or by calling Toll FREE
1 877 MELABIC (635 2242)
बेहतर होगा इनकी साइट में जाकर खुद जानें दावे में कितना दम है।
गुड़मार के पत्ते। इनके खाने से मीठापन गायब हो जाता है।
यही है जूलिया हन्फ की मेलाबिक दवा।
आइए जानने की कोशिश करते हैं कि कैसे तनाव ब्लड सुगर को बढ़ाता है और गंभीर बीमारियों को दावत देता है।
जब तनाव हद की सामा पार कर जाता है तो इसके कारण एक खास किस्म का हारमोन पैदा होता है। इसे कोर्टिसोल कहते हैं। यह सीधे इनसुलिन पर हमला करता है और नतीजे में रक्त में सुगर की मात्रा को बढ़ा देता है। यह बड़ा लड़ाकू हारमोन होता है। इसे फाइट या फ्लाइट हारमोन भी कहते हैं। जिसका अर्थ है कि जितना ज्यादा आप तनाव पालेंगे उतना ही अधिक क्रिस्टोल पैदा होगा। जब हमारा शरीर ज्यादा क्रिस्टोल पैदा कर देता है तो यह यह शरार के प्रति इन्सुलिन की संवेदनशीलता को घटा देता है। इन्सुलिन का यह दुश्मन क्रिस्टोल शरीर में स्थित ग्लूकोज इतना कठोर बना देता है जिससे शरीर की कोशिकाएं इस सुगर को ग्रहण नहीं कर पाती हैं। इसके बाद यह बचा ग्लूकोज रक्त में मिलकर सुगर की मात्रा को बढ़ा देता है। अर्थात यह आसानी से समझ में ाने वाली बात है कि तनाव किस तरह ब्लड सुगर को बढ़ा देता है। अगर तनावग्रस्त व्यक्ति मधुमेह रोगी है तो तनाव उसके लिए बड़ी समस्या ला सकती है। क्यों कि सुगर के कारण उसे तनाव विरासत में मिली रहती है। रोज का तनाव हो तो निश्चित ही सुगर लेवेल को ठीक रखना मुश्किल हो जाएगा। क्यों कि इससे पैदा हुआ क्रिस्टोल हारमोन रक्त में सुगर को बढ़ाता ही रहेगा।
तनावरहित जीवन मधुमेह के रोगी के स्वस्थ जीवन का मूलमंत्र है। तनाव से बचेंगे तो सुगर नियंत्रित रहेगा या फि सुगर को कड़ाई से नियंत्रित रखेंगे तो तनाव भी दूर रहेगा। दोनों ही स्थितियों में सुधार होगा और आप स्वस्थ महसूस करेंगे। अपनी दिनचर्या व जीवनशैली को तनाव मुक्त रखकर सुगर पर आसानी से नियंत्रण पाया जा सकता है। अध्ययनों से साबित हो चुका है कि तनाव मुक्त रहकर सुगर को नियंत्रित रखा जा सकता है। तनाव से निजात के लिए सामान्यतया निम्न उपायों की मदद ली जा सकती है।-----
१- गहरी सांस लें, सांस को रोकें और फिर धीरे-धीरे छोड़ें।
२-खुली जगह में नियमित टहलें।
३-व्यायाम करें।
४-प्राकृतिक जगहों की सैर करें।
५-सकारात्मक नजरिया बनाए रखें।
६- अपना मूड ठीक करने के लिए कैफीन व निकोटीन वाले पदार्थ, शराब व सुगर के सेवन से बचें।
७- खुद के मन की शांन्ति के लिए खुद ही रास्ता तलाशें। संतुलित व शांत रहने की तकनीक तलाशें और उसे आजमाएं।
इन सबके बाद अगर आपका ब्लड सुगर अनियंत्रित है तो बेहतर होगा कि अपने स्वास्थ्य को सुधारने और तनाव से मुक्ति पर पूरा ध्यान दें।
( यह जानकारी मुझे मेल से जूलिया हन्फ ने भेजी है। जूलिया सुगर सेसंबंधित समस्याओं के स्थायी इलाज का भी दावा करती हैं। अपनी साइट में बड़े विस्तार से कई चरणों इलाज की प्रकिया भी दी हैं। इनका कहना है कि सुगर की जटिलताओं पर वे बराबर अध्ययन बी करती रहती हैं। इन्हों ने इस साइट (http://www.melabic.com/ ) में एक दवा भी सुझाई है। इस दवा का नाम मेलाबिक है। साइट में जाकर आप भी विस्तार से जान सकते हैं कि सुगर व इसके इलाज की कितनी इनको महारत हासिल है। सुगर की आम दवाओं से होने वाली हानियों को भी बड़े विस्तार से बताती हैं। तनाव दूर कर तीन चरणों में आपको स्वस्थ कर देने का नुस्खा है इनके पास। उनके ही शब्दों में देखिए-
PS. The combination of Melabic and my 3 step program will help you
relieve stress and take retake control of your health. Find out more
by visiting me at Melabic.com
PPS You can order online or by calling Toll FREE
1 877 MELABIC (635 2242)
बेहतर होगा इनकी साइट में जाकर खुद जानें दावे में कितना दम है।
गुड़मार के पत्ते। इनके खाने से मीठापन गायब हो जाता है।
यही है जूलिया हन्फ की मेलाबिक दवा।Monday, 28 July 2008
भविष्य के लिए बुनें सपने
सामयिक कैरियर चुनना एक मुश्किल काम है। अगर इसमें मित्रों या माता-पिता के सुझावों को भी मिला दिया जाए तो ऐसी भ्रामक स्थिति पैदा हो जाती है जिसके कोई फैसला लेना भी लगभग असंभव हो जाता है। यहां हम कुछ तरीके बताने जा रहे हैं जिससे न सिर्फ उचित कैरियर चुना जा सकता है बल्कि उसके लक्ष्य तय करके सफलता भी हासिल की जा सकती है। हालांकि हर अलग-अलग युवा के लिए एक ही तरीका उपयुक्त नहीं होता क्यों कि सभी के व्यक्तित्व और क्षमता अलग-अलग होती है। फिर भी जो बात यहां रखी जा रही है उससे नवयुवकों को काफी मदद मिल सकती है।
आत्म मूल्यांकन
कैरियर चुनने की यह पहली और महत्वपूर्ण कड़ी है। इसके तहत खुद के बारे में सूचनाएं जुटानी होती हैं। ये सूचनाएं रुचि, योग्यताएं, व्यक्तिगत कौशल, मनपसंदजीवन शैली और मूल्यों पर आधारित होती हैं। आत्ममूल्यांकन के वक्त खुद और पेशागत चयन के बीच अंतरसंबंधों को ध्यान में रखकर सावधानी भी बरतनी चाहिए। आत्ममूल्यांकन न सिर्फ कैरियर चुनने बल्कि जीवन के हर दौर में खुद के बारें में फैसले लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आत्ममूल्यांकन की प्रक्रिया आप इस तरह शुरू कर सकते हैं।
(अ)---- अपनी रूचियों, योग्यताएं, प्रवीणता और काम के महत्व का अध्ययन करिए।
(ब)---- उन क्षेत्रों को जानिए जहां आपको सराहा जाता है।
(स)---- भौतिक व मनोवैग्यानिक जरूरतों को समझें।
(द)---- महत्वाकाक्षांएं और असके प्रति तत्परता का स्तर पहचानें।
(य)---- और व्यक्तिगत कौशल व अपने गुण-दोष की पड़ताल करें।
एकबार जब आप खुद को बेहतर तरीके से समझने लगेंगे तो खुद के प्रति सावधानी भी बरतने लगेंगे। यही नहीं आपके आत्मविश्वास में सुधार आएगा, समय के प्रबंधन ( यानी समय के सदुपयोग ) की समझ के साथ व्यक्तिगत व व्यवहारिक प्रबंधन की प्रवीणता आ जाएगी।इन सब यानी आत्ममूल्यांकन के लिए कार्यशाला, क्लब की गतिविधियों में शामिल होने के अलावा दोस्तों की भी मदद ली जा सकती है।
आत्ममूल्यांकन के तहत पहले अपने व्यक्तित्व शैली की पहचान करनी होगी और यह भी देखना होगा कि उसके लिए उपयपक्त क्या है। जिस काम को चुना है उसके महत्व को जानने के साथ उसके प्रति अपनी सोच भी सार्थक रखें। एक बार जब आत्ममूल्यांकन का काम पूरा हो जाए तो यह जरूरी होगा कि उपलब्ध शैक्षणिक व कैरियर संबंधी विकल्पों की पहचान कर ली जाए। आत्ममूल्यांकन के बाद कैरियर की उपलब्ध संभावनाओं की पहचान करनी होगी। यानी प्रभावशाली कैरियर की तलाश, इसके बारे में उचित सूचनाएं जुटाना शुरू करके इन सूचनाओं यह परीक्षण भी करना होगा कि ये आपके आत्ममूल्यांकन के नतीजों से मेल खाते हैं या नहीं। दरअसल में आत्ममूल्यांकन के बाद यहीं से कैरियर के बारे में ठोस निर्णय लेने की प्रक्रिया शुरू होती है। यह तलाश करनी होगी कि कैसे और कहां शिक्षण और प्रशिक्षण की जरूरतें पूरी होंगी। जिस संस्थान में जाना चाहते हैं उसे जानें और उसके जरिए रोजगार के अवसर के विस्तार को समझना होगा। इतना ही नहीं विकल्प के तौर पर एक समानांतर योजना भी तैयार रखनी होगी। खुद में समस्याओं के समाधान की प्रवीणता भी विकसित करनी होगी।
प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र
जिस कैरियर में जाना चाहते हैं उसके लिए दक्ष लोगों से बातचीत करनी चाहिए। शिक्षा व रोजगार के सलाहकारों व विशेषज्ञों से मिलना या ऐसी कार्यशालाओं में जाना चाहिए जहां कुछ जानने व सीखने को मिल सके। रोजगार से सम्बद्ध मेलों (कैरियर फेयर) में जाना चाहिए। कोई अंशकालिक रोजगार उपलब्ध हो तो उसे करना चाहिए इससे अपनी दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
आदर्श जीवनशैली प्रश्नमाला
नीचे दिए प्रश्नों के तीन वैकल्पिक उत्तर दिए गए हैं। इसमें से जो आपको अच्छा लगता है उसे आप चुनें। इसमें कोई मार्किंग नहीं है मगर यह आत्ममूल्यांकन में ापकी मदद करेगी।
१- घर में रहना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
२-ग्रामीण क्षेत्र में रहना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
३-अपने घर में मनोरंजन ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
४-पैसे खर्च करना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
५-उन्मुक्त भ्रमण ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
६-बहुत सारी जगहें रखना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
७-ढेर सारे पैसे रखना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
८-मनोरंजन वाली जगह पर रहना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
९-किसी सांस्कृतिक केंद्र के नजदीक रहना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
१०-सिनेमा देखना, रेस्तराओं में जाना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
११- किसी समुदाय का सक्रिय सदस्य बनना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
१२-अकेले रहना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
१३-पढ़ाई में व्यस्त रहना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
१४-काम करने वाली जगह के नजदीक रहना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
१५-सिर्फ पैसे के लिए काम करना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
उपर दिए गए सवाल के जो जवाब आप ईमानदारी से देंगे वे जवाब ही बताएंगें कि आपने कितना अपनी सही मूल्यांकन किया है। सार्थक और सही जवाब के रास्ते पर चलें तो आपकों वह काम ढूंढने में आसानी होगी। वैसे यह बात ठीक से समझ लेनी चाहिए कि अपनी योग्यता या मनमुताबिक काम पाना आसान नहीं होता है। बड़ी तैयारी व समर्पण की जरूरत होती है। बहरहाल भविष्य के जीवन के लिए खूब सपने बुनिए और उसे पाने के लिए ठोस प्रयास कीजिए। अभी आपने शुरू किया है तो कम से कम छह सात सालों तक जरूर ऐसा जीरी रखिए। जो आप कर रहे हैं उससे कम से कम दोगुना विस्तार की अपेक्षा रखिए। ऐसी बातें भी खूब करिए कि आप कहां रहेंगे और किसके साथ रहेंगे।
अपने भविष्य के लिए बुने सपने को साकार करिए। इन सब को पाने के लिए विशेषज्ञों से मिलते रहिए। उनसे अपने व्यवसायिक पहलुओं को खोजना शुरू करिए। नई जिम्मेदारियों को ओढ़ने की कोशिश करिए। अपने पेशे से संबद्ध शिक्षण, प्रशिक्षण के बारे में निरंतर जानकारी हासिल करना चाहिए। अपनी दक्षता, योग्यता को पेशे के अनुरू बनाए रखना होगा जिससे खोखलापन न दिखे। अखबारों व पत्रिकाओं का हमेशा साथी बनाए रखिए। इनसे अपडेट रहने में सुविधा होती है। जहां आप काम करते हैं वहां के लोगों का ध्यान से अध्ययन करके उनकी आदतें व काम को समझें।
इन सब के अलावा पेशे के बारे में लोगों से बात करें। और काम की जानकारियां संग्रह करके रखें। इस तरह की कुछ प्रश्नावलियां रखें जो आपको दिशानिर्देशन देंगी। नाचे की कुछ प्रश्नावलियों को देखें---
१- इस पेशे या संस्थान में आप कैसे आए ?
२-इस पेशे या संस्थान में आपकी रुचि कैसे जगी ?
३- शुरू में इस क्षेत्र में आने के लिए कौन सी परीक्षा से गुजरना होगा ?
४-इस पेशे में उच्च पद पर जाने के लिए क्या और कितने चरण हैं ?
५- इस काम में किन जिम्मेदारियों और कर्तव्यों का ध्यान रखना होगा ?
६-हमारे प्रतियोगी और ग्राहक कौन हैं ?
७-अपना काम दक्षतापूर्वक करने के लिए किन योग्यताओं की जरूरत होती है ?
८- रोजगार के क्षेत्र में घुसने के लिए किस शिक्षण, प्रशिक्षण या पृष्ठभूमि की जरूरत होती है ?
९-जिस संगठन में काम कर रहे हैं , उसके दिशा निर्देश के दर्शन क्या हैं ?
१०- अपने पेशे या संस्थान में आगे बढ़ने के लिए किन कौशल व मूल्यों की जरूरत होती है ?
११-इस पेशे की बड़ी गड़बड़ियां या परेशानियां क्या हैं ?
१२- काम के किए आप कितना समय देते हैं ?
विशेषज्ञों से मिलकर अपने दिमाग में उठी शंकाओं का निवारण करते रहना चाहिए। लेकिन इन सब सवालों का जवाब जानने या अपनी शंकाओं के निवारण के लिए यह ध्यान देना जरूरी है कि सामने वाला आपको ईमानदारी से सब बताए। अगर आप उस व्यक्ति या विशेषज्ञ को ठीक से नहीं जानते हैं तो यह पूरी आशंका रहेगी कि वह आपको ईमानदारी से जवाब दे। इसके लिए पहले संबद्ध व्यक्ति से पहले व्यवहारिक संबन्ध बनाएं, परखें कि वह आपको सही दिशा निर्देश देता है तब अपने पेशागत सवालों या निजी समस्याओं पर चर्चा करें। ये सारी सावधानियां व आत्ममूल्यांकन आपको निश्चित ही अपने काम की उचित जगह तलाशने में मदद करेंगी।
यह माडल भी इतना उपयुक्त नहीं माना जा सकता है क्यों कि इसकी सफलता या उपयोगिता इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितनी ईमानदारी से आत्ममूल्यांकन करते हैं। साथ ही आप पर यह माडल कितना उपयुक्त साबित होता है। फिर भी आपके जीवन में महत्वपूर्ण भुमिका निभा सकता है। सतर्क व दक्ष होकर तो सभी को रहना होता है और इस माडल में भी इसी सिद्धांत पर जोर दिया गया है। ईश्वर आपको सफलता प्रदान करे।
आत्म मूल्यांकन
कैरियर चुनने की यह पहली और महत्वपूर्ण कड़ी है। इसके तहत खुद के बारे में सूचनाएं जुटानी होती हैं। ये सूचनाएं रुचि, योग्यताएं, व्यक्तिगत कौशल, मनपसंदजीवन शैली और मूल्यों पर आधारित होती हैं। आत्ममूल्यांकन के वक्त खुद और पेशागत चयन के बीच अंतरसंबंधों को ध्यान में रखकर सावधानी भी बरतनी चाहिए। आत्ममूल्यांकन न सिर्फ कैरियर चुनने बल्कि जीवन के हर दौर में खुद के बारें में फैसले लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आत्ममूल्यांकन की प्रक्रिया आप इस तरह शुरू कर सकते हैं।
(अ)---- अपनी रूचियों, योग्यताएं, प्रवीणता और काम के महत्व का अध्ययन करिए।
(ब)---- उन क्षेत्रों को जानिए जहां आपको सराहा जाता है।
(स)---- भौतिक व मनोवैग्यानिक जरूरतों को समझें।
(द)---- महत्वाकाक्षांएं और असके प्रति तत्परता का स्तर पहचानें।
(य)---- और व्यक्तिगत कौशल व अपने गुण-दोष की पड़ताल करें।
एकबार जब आप खुद को बेहतर तरीके से समझने लगेंगे तो खुद के प्रति सावधानी भी बरतने लगेंगे। यही नहीं आपके आत्मविश्वास में सुधार आएगा, समय के प्रबंधन ( यानी समय के सदुपयोग ) की समझ के साथ व्यक्तिगत व व्यवहारिक प्रबंधन की प्रवीणता आ जाएगी।इन सब यानी आत्ममूल्यांकन के लिए कार्यशाला, क्लब की गतिविधियों में शामिल होने के अलावा दोस्तों की भी मदद ली जा सकती है।
आत्ममूल्यांकन के तहत पहले अपने व्यक्तित्व शैली की पहचान करनी होगी और यह भी देखना होगा कि उसके लिए उपयपक्त क्या है। जिस काम को चुना है उसके महत्व को जानने के साथ उसके प्रति अपनी सोच भी सार्थक रखें। एक बार जब आत्ममूल्यांकन का काम पूरा हो जाए तो यह जरूरी होगा कि उपलब्ध शैक्षणिक व कैरियर संबंधी विकल्पों की पहचान कर ली जाए। आत्ममूल्यांकन के बाद कैरियर की उपलब्ध संभावनाओं की पहचान करनी होगी। यानी प्रभावशाली कैरियर की तलाश, इसके बारे में उचित सूचनाएं जुटाना शुरू करके इन सूचनाओं यह परीक्षण भी करना होगा कि ये आपके आत्ममूल्यांकन के नतीजों से मेल खाते हैं या नहीं। दरअसल में आत्ममूल्यांकन के बाद यहीं से कैरियर के बारे में ठोस निर्णय लेने की प्रक्रिया शुरू होती है। यह तलाश करनी होगी कि कैसे और कहां शिक्षण और प्रशिक्षण की जरूरतें पूरी होंगी। जिस संस्थान में जाना चाहते हैं उसे जानें और उसके जरिए रोजगार के अवसर के विस्तार को समझना होगा। इतना ही नहीं विकल्प के तौर पर एक समानांतर योजना भी तैयार रखनी होगी। खुद में समस्याओं के समाधान की प्रवीणता भी विकसित करनी होगी।
प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र
जिस कैरियर में जाना चाहते हैं उसके लिए दक्ष लोगों से बातचीत करनी चाहिए। शिक्षा व रोजगार के सलाहकारों व विशेषज्ञों से मिलना या ऐसी कार्यशालाओं में जाना चाहिए जहां कुछ जानने व सीखने को मिल सके। रोजगार से सम्बद्ध मेलों (कैरियर फेयर) में जाना चाहिए। कोई अंशकालिक रोजगार उपलब्ध हो तो उसे करना चाहिए इससे अपनी दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
आदर्श जीवनशैली प्रश्नमाला
नीचे दिए प्रश्नों के तीन वैकल्पिक उत्तर दिए गए हैं। इसमें से जो आपको अच्छा लगता है उसे आप चुनें। इसमें कोई मार्किंग नहीं है मगर यह आत्ममूल्यांकन में ापकी मदद करेगी।
१- घर में रहना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
२-ग्रामीण क्षेत्र में रहना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
३-अपने घर में मनोरंजन ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
४-पैसे खर्च करना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
५-उन्मुक्त भ्रमण ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
६-बहुत सारी जगहें रखना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
७-ढेर सारे पैसे रखना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
८-मनोरंजन वाली जगह पर रहना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
९-किसी सांस्कृतिक केंद्र के नजदीक रहना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
१०-सिनेमा देखना, रेस्तराओं में जाना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
११- किसी समुदाय का सक्रिय सदस्य बनना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
१२-अकेले रहना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
१३-पढ़ाई में व्यस्त रहना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
१४-काम करने वाली जगह के नजदीक रहना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
१५-सिर्फ पैसे के लिए काम करना ? बहुत महत्वपूर्ण , सामान्यतया महत्वपूर्ण, महत्वपूर्ण नहीं
उपर दिए गए सवाल के जो जवाब आप ईमानदारी से देंगे वे जवाब ही बताएंगें कि आपने कितना अपनी सही मूल्यांकन किया है। सार्थक और सही जवाब के रास्ते पर चलें तो आपकों वह काम ढूंढने में आसानी होगी। वैसे यह बात ठीक से समझ लेनी चाहिए कि अपनी योग्यता या मनमुताबिक काम पाना आसान नहीं होता है। बड़ी तैयारी व समर्पण की जरूरत होती है। बहरहाल भविष्य के जीवन के लिए खूब सपने बुनिए और उसे पाने के लिए ठोस प्रयास कीजिए। अभी आपने शुरू किया है तो कम से कम छह सात सालों तक जरूर ऐसा जीरी रखिए। जो आप कर रहे हैं उससे कम से कम दोगुना विस्तार की अपेक्षा रखिए। ऐसी बातें भी खूब करिए कि आप कहां रहेंगे और किसके साथ रहेंगे।
अपने भविष्य के लिए बुने सपने को साकार करिए। इन सब को पाने के लिए विशेषज्ञों से मिलते रहिए। उनसे अपने व्यवसायिक पहलुओं को खोजना शुरू करिए। नई जिम्मेदारियों को ओढ़ने की कोशिश करिए। अपने पेशे से संबद्ध शिक्षण, प्रशिक्षण के बारे में निरंतर जानकारी हासिल करना चाहिए। अपनी दक्षता, योग्यता को पेशे के अनुरू बनाए रखना होगा जिससे खोखलापन न दिखे। अखबारों व पत्रिकाओं का हमेशा साथी बनाए रखिए। इनसे अपडेट रहने में सुविधा होती है। जहां आप काम करते हैं वहां के लोगों का ध्यान से अध्ययन करके उनकी आदतें व काम को समझें।
इन सब के अलावा पेशे के बारे में लोगों से बात करें। और काम की जानकारियां संग्रह करके रखें। इस तरह की कुछ प्रश्नावलियां रखें जो आपको दिशानिर्देशन देंगी। नाचे की कुछ प्रश्नावलियों को देखें---
१- इस पेशे या संस्थान में आप कैसे आए ?
२-इस पेशे या संस्थान में आपकी रुचि कैसे जगी ?
३- शुरू में इस क्षेत्र में आने के लिए कौन सी परीक्षा से गुजरना होगा ?
४-इस पेशे में उच्च पद पर जाने के लिए क्या और कितने चरण हैं ?
५- इस काम में किन जिम्मेदारियों और कर्तव्यों का ध्यान रखना होगा ?
६-हमारे प्रतियोगी और ग्राहक कौन हैं ?
७-अपना काम दक्षतापूर्वक करने के लिए किन योग्यताओं की जरूरत होती है ?
८- रोजगार के क्षेत्र में घुसने के लिए किस शिक्षण, प्रशिक्षण या पृष्ठभूमि की जरूरत होती है ?
९-जिस संगठन में काम कर रहे हैं , उसके दिशा निर्देश के दर्शन क्या हैं ?
१०- अपने पेशे या संस्थान में आगे बढ़ने के लिए किन कौशल व मूल्यों की जरूरत होती है ?
११-इस पेशे की बड़ी गड़बड़ियां या परेशानियां क्या हैं ?
१२- काम के किए आप कितना समय देते हैं ?
विशेषज्ञों से मिलकर अपने दिमाग में उठी शंकाओं का निवारण करते रहना चाहिए। लेकिन इन सब सवालों का जवाब जानने या अपनी शंकाओं के निवारण के लिए यह ध्यान देना जरूरी है कि सामने वाला आपको ईमानदारी से सब बताए। अगर आप उस व्यक्ति या विशेषज्ञ को ठीक से नहीं जानते हैं तो यह पूरी आशंका रहेगी कि वह आपको ईमानदारी से जवाब दे। इसके लिए पहले संबद्ध व्यक्ति से पहले व्यवहारिक संबन्ध बनाएं, परखें कि वह आपको सही दिशा निर्देश देता है तब अपने पेशागत सवालों या निजी समस्याओं पर चर्चा करें। ये सारी सावधानियां व आत्ममूल्यांकन आपको निश्चित ही अपने काम की उचित जगह तलाशने में मदद करेंगी।
यह माडल भी इतना उपयुक्त नहीं माना जा सकता है क्यों कि इसकी सफलता या उपयोगिता इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितनी ईमानदारी से आत्ममूल्यांकन करते हैं। साथ ही आप पर यह माडल कितना उपयुक्त साबित होता है। फिर भी आपके जीवन में महत्वपूर्ण भुमिका निभा सकता है। सतर्क व दक्ष होकर तो सभी को रहना होता है और इस माडल में भी इसी सिद्धांत पर जोर दिया गया है। ईश्वर आपको सफलता प्रदान करे।
Sunday, 27 July 2008
परमाणु करार बनाम कांग्रेस, भाजपा, माकपा की अंतर्कथा


जनसत्ता दिल्ली के २७ जुलाई के अंक में पेज छह पर प्रभाष जोशी और सात पर साजिद रशीद व तरूणविजय के लेख एक साथ सरकार के विश्वास मत के संसद में चले ड्रामे के कई रहस्य खोलते हैं। यही प्रश्न मुझे भी उद्देलित कर रहे थे जिन्हें इन प्रबुद्ध लेखकों ने उठाया है। सांसदों की निष्ठा क्यों डोली? सिर्फ परमाणु करार के मुद्दे पर ही वामपंथी समर्थन वापस क्यों लिए? विपक्ष के नेता के तौर पर आडवाणी की खराब भूमिका जैसे सवाल भारतीय राजनीति उस काले पक्ष को सामने लाते हैं जिसमें पाकसाफ के भी दामन दागदार हैं। मैं इन लेखों की यहां ब्लाग में समीक्षा नहीं करना चाहता मगर यह जरूर चाहता हूं कि इन तीन धाराओं के विचारों से आप भी अवगत हों। तरणविजय को तो आप जानते ही हैं। पांचजन्य के संपादक रह चुके हैं जो कि संघ की विचारधारा को सामने लाते हैं। भाजपा या फिर किसी जनविरोधी मुद्दों पर बेबाक लिखने वाले जनसत्ता के संपादक रह चुके प्रभाष जोशी से भी आप अपरिचित नहीं होंगे। इनतीनों लेखकों में से प्रभाष जोशी और साजिद रशीद ने सरकार के उसी विश्वासमत मुद्दे की पेराई की है जिसपर अब भी मंथन चल रहा है। मगर तरणविजय ने ताजा मुद्दे रामसेतु के राम द्वारा तोड़े जाने के विवाद पर विश्वसनीय होकर सफाई पेश करने की कोशिश की है। इन तीनों लेख के पीडीएफ ब्लाग में दिए हैं। इनपर क्लिक करके पढ़ें। सांप्रदायिकता, वामपंथी और सत्ता के मुद्दे पर मैं भी अगले लेख में इनके चेहरे बेनकाब करूंगा।
Wednesday, 2 July 2008
मंदिरों के प्रसाद व असम की चाय भी दूसरे को दे देंगे डाकिए !
डाक विभाग तमाम नए प्रयोग कर रहा है टिकने के लिए मगर उसके लापरवाह व गुटबाज कर्मचारीहर कोशिश को धूल में मिलाते जा रहे हैं। विश्वसनीयता भी इसी से दाव पर लगी हुई है। डाक विभाग को टेलीफोन व संचार तकनीक की क्रांति ने वैसे ही हासिए पर ला खड़ा किया है। डाक गायब होने, सही तरीके से डाक वितरित नहीं हो पाने, लोगों की गाढ़ी कमाई के मनीआर्डर गायब होने, बचत व निवेश के तौरतरीके अपारदर्शी होने के कारण डाक विभाग लोगों की नजर में उतना महत्वपूर्ण नहीं रह गया है जितना कभी मजबूरी के कारण था। आज निवेश के हजारों विकल्प हैं। मनीआर्डर को एटीएम निगल गया है। चिट्ठी को मेल और कंपनियों वगैरह की डाक ज्यादातर आनलाइन के हवाले हो गई है। डाक विभाग की मासिक बचत योजना तमाम परिवारों की अब भी जीवनरेखा बनी हुई है मगर डाकघरों के फौरन कंप्यटरीकृत नहीं किए जाने से स्टेट बैंक आप इंडिया का मासिक बचत योजना अब विकल्प बन रही है। ऐसे में डाक विभाग को बचाने की नई कवायद हो रही है।
इसी कोशिश के तहत डाक विभाग अब दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिरों के प्रसाद और मसालों से लेकर सुदूर असम की चाय और पंजाब की मिठाइयां तक आपके दरवाजे तक पहुंचाने की तैयारी में है। पंजाब में शुरू की जा रही इस योजना के तहत वस्तु की असली कीमत से केवल दस रुपये ज्यादा लिए जाएंगे। उपभोक्ता को केवल नजदीक के डाक घर में जाकर आर्डर करना है, उसके बाद संबंधित संगठन को एक ई-मेल भेज दिया जाएगा। इसके बाद एक या दो दिनों में सामान पैक होकर उसके घर पहुंच जाएगा। पंजाब के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल पृथ्वीराज कुमार ने बताया, "इंडिया पोस्ट ने स्पाइस बोर्ड आफ इंडिया के साथ एक समझौता किया है जिसके तहत अब उत्पादों को ग्राहकों केघर तक पहुंचाया जाएगा। यह योजना लगभग एक साल से कागजों पर ही है और इसकी ठीक ढंग से मार्केटिंग नहीं की गई और अब इसकी पुनरीक्षा की जा रही है।" उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश में तिरुपति मंदिर और असम के चाय बागानों के अलावा पंजाब के कोट कपूरा कस्बे की प्रसिद्ध ढोडा मिठाइयों की भी आपूर्ति के लिए समझौते किए गए हैं।
कर्मचारी ही प्रतिबद्ध नहीं
लेकिन क्या गारंटी है कि डाक विभाग को ये योजनाए बचा पाएंगी ? जबतक विभाग के कर्मचारी खुद इसके प्रति प्रतिबद्ध नहीं होंगे यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा। प्रतिबद्धता में कमी और धोखाधड़ी की तमाम खबरें लोगों को मालूम हैं मगर मैं सिर्फ अपना उदाहरण दूंगा जिसके कारण डाक विभाग के डाकिए संदिग्ध लगने लगे हैं। मैं कोलकाता शहर के दमदम इलाके में रहता हूं। मेरे दो बच्चे स्टेट बैंक आफ इंडिया के क्लर्क पद के लिए आनलाइन फार्म भरे। बैंक ने नियत समय पर प्रवेश पत्र डाक विभाग क् जरिए वितरित करने की व्यवस्था भी की। मगर यह महामहिम डाकिए की कृपा रही कि मेरे दोनों बच्चे का प्रवेशपत्र किसी ऐसे गैर लोगों के हाथों में सौंप गया जिनसे मैं कभी भले की उम्मीद नहीं रखता। जब मेरे इन शत्रुओं को पता चला कि प्रवेश पत्र चुरा लेने से उम्मीदवार को परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जा सकता तो कटे-फटे हालत में पहुंचाकर मेरे यहां फेंक दिया गया। दूसरा प्रवेश पत्र भी इसी तरह से किसी को सौंप कर डाकिया चला गया। यह बाकायदा लिफाफा था जिसमें प्रवेश पत्र के अलावा एक बुकलेट भी था। जबकि पहला वाला सिर्फ प्रवेश पत्र मिला।
पोस्ट आफिस जाकर पूछा कि ऐसा क्यों हुआ तो एक अधिकारी ने कहा कि ऐसा लोग न जाने क्यों करते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके फ्लैट में भी लोग डाकिए से किसी की भी डाक लेकर गायब कर देते हैं। उन्होंने डाकिए को बुलाकर कह दिया कि इनकी डाक सिर्फ इन्हें हीं सौंपें। डाकिए ने मानने को भी कहा मगर मेरा विस्वास तो डिग गया है कि इतनी संवेदनशील डाक को जो डाकिया गैरजरूरी की तरह फेंक गया तो आगे कितना ध्यान रखेगा।
लगे हाथ आपको यह भी बतादूं कि हर साल ऐसे तमाम नौजवानों को अपनी नौकरी के बुलावा पत्र से डाक विभाग के ऐसे डाकिए के कारण वंचित होना पड़ता है। पश्चिम बंगाल में हर आदमी पार्टी या खेमे में बंटा हुआ है लिहाजा खुन्नस में यह काम डाकिए स्थानीय लोगों की मर्जी से करते हैं। यह डाकिए की भी मजबूरी होगी क्यों कि वह किस- किस से लड़ाई करेगा। या फिर वह भी किसी पार्टी का समर्थक होता है। कोलकाता में बाहरी लोग इस विरोध के ज्यादा शिकार होते हैं। ऐसे में नए तरीके अपनाकर डाक विभाग विश्वसनीयता नहीं हासिल करता जबतक नीचे से अपनी कार्यप्रणाली को फुलप्रूफ नहीं करेगा। डाक बिना किसी भेदभाव के वितरित हो इसके लिए डाकिए को जिम्मेदार बनाना होगा। डाक विभाग का फौरन आधुनिकीकरण करना होगा ताकि बचत व निवेश जैसे उत्पाद के काम त्वरित व विश्वसनीय हों। अगर ऐसा नहीं हुआ तो चाय, मिटाई और डाक भी किसी दूसरे को ही देकर लोगों की आखों में धूल झोंकते रहेंगे डाकिए।
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