Wednesday, 9 February 2011

बदल रही है सागरद्वीप की फिजा !



चित्र में बाएं से प्रभात खबर के अखिलेश, दैनिक जागरण के अरविंद दूबे, जनसत्ता के डा. मान्धाता सिंह, राजस्थान पत्रिका के प्रभात गुप्ता और जनसत्ता के जयनारायण प्रसाद। पीछे दिख रहा है निर्माणाधीन शिविर स्थल। हमारे सामने की तरफ समुद्र और पीछे की तरफ कपिलमुनि का मंदिर व मेला स्थल है। दूसरी फोटो में पीछे दिख रही हैं समुद्र की लहरे।
 ६  जनवरी २०११ को १६ साल बाद पत्रकार मित्रों ( जयनारायण प्रसाद, अरविंद दूबे व कोलकाता के बांग्ला, हिंदी व अंग्रेजी के पत्रकारों )  के साथ दूसरी बार गंगासागर गया था। पश्चिम बंगाल सरकार का सूचना विभाग गंगासागर मेले की पूर्व तैयारियों की देने के लिए हर साल पत्रकारों को गंगासागर ले जाता है। सागरद्वीप पर १४ जनवरी को मकर संक्रांति के मौके पर पुण्यस्नान के लिए लाखों तीर्थयात्री आते हैं। इस बार सागरद्वीप पूरी तरह से बदला हुआ दिखा। सागरद्वीप की बेतहासा बढ़ी आबादी ने बाजार को भी फैलने में सहयोग दिया। १६ साल पहले सागरद्वीप में कहीं-कहीं या कहें बेहद कम आबादी थी मगर इस बार जब से बस सागरद्वीप की ओर दौड़ने लगी तब से रास्तें में बाजार ही बाजार दिखाई दिए। इतना ही नहीं बाजार और सड़क के किनारे के गांवों में खपरैल या छत वाले जायादातर मकानों पर सोलर पैनल लगे दिखे। सागरद्वीप में बिजली इसी से प्राप्त होती है।इसी सोलर बिजली के कारण इन घरों पर डिस एंटिना भी लगे हुए दिखे। अभी तक  बिजली के खंभे नहीं पहुंच पाए हैं। यह जरूर है २०११-१२ तक सागद्वीप तक भी बिजली पहुंच जाएगी। हमने कचूबेड़िया तट से सागर को जोड़ने वाले मीलों लंबी नदी में बनाए जा चुके कई बिजली के खंभे देखे। अब महज दो तीन और बनना बाकी था। यानी जल्दी सही सागरद्वीप भी बिजली की रोशनी में रोशन हो जाएगा। हो सकता है कि आनेवाले दोतीन सालों में इसी नदी पर (हारवुड़ प्वाइंट पर ) पुल भी बन जाए। फिलहाल अभी तो हमें लांच से इसे पार करने में घंटे भर लगे। अफसोस होता है कि गंगासागर जैसे महत्वपूर्ण व इतने बड़े तीर्थ तक जाने के लिए सरकारें माकूल इंतजाम तक नहीं कर पाईं हैं। जबकि यहां आने वाले लाखों तीर्थयात्रियों से आम भाड़े से कई गुना भाड़ा वसूला जाता है। मसलन जो लांच आम दिनों में सिर्फ छह रुपए लेते हैं वहीं लांच का किराया तीर्थयात्रियों के लिए ४० रुपए हो जाता है। बहरहाल आने वाले दिनों में सागरद्वीप अब कोई बियावान जंगल नहीं रह जाएगा और न ही कोई कष्टसाध्य तीर्थ रह जाएगा। गंगासागर के बार में मान्यता थी कि वहां से कम ही लोग वापस लौट पाते हैं। कहावत भी है कि- सभी तीर्थ बार-बार, गंगासागर एक बार। पर अब यह मिथ आपको टूटता नजर आएगा। बड़ी ही मनोरम स्थल है गंगासागर। मैं तो कहूंगा कि आप भी जरूर जाइए एक बार गंगासागर।

दुःस्वप्न सी लगती है वह यात्रा

१६ साल पहले गंगासागर से जुड़ी एक घटना तो मुझे जीवनभर याद रहेगी। इस घटना से शायद आपको भी अंदाजा हो जाएगा कि तमाम व्यवस्था के बावजूद तबतक तो बहुत कष्टसाध्य थी गंगासागर की यात्रा। १३ जनवरी १९९४ की रात में आमतीर्थयात्रियों की तरह कोलकाता के दमदम कैंट इलाके से गंगासागर जाने वाली एक बस से हम सात लोग रवाना हुए। मैं, मेरी मां, मेरे मित्र अनिल त्रिवेदी व उनकी मां, मेरे मित्र अभय सिंह उनकी मां व पत्नी सभी बेहद उत्साहित से इस यात्रा की शुरुआत से। मगर यात्रा के मध्य से ही कष्ट के संकेत मिलने लगे थे। रात दो बजे बस जब हारवुड़ प्वाइंट की तरफ बढ़ रही थी तभी हमारी बस को पुलिसवालों के निर्देश पर नामखाना की तरफ मोड़ दिया गया। आपको बता दें कि हारवुड प्वाइंट ही वह जगह है जहां से गंगासागर जाना सुरक्षित और आसान है। इसी हारवुड प्वाइंट से ही सागरद्वीप के लिए पुल बनाए जाने की बात कही जा रही है। ममता बनर्जी ने तो इस पुल के बनवाने का वायदा भी किया है। नामखाना से गंगासागर का रास्ता खतरनाक माना जाता है। लांच जब नामखाना से सागरद्वीप की ओर बढ़ता है तो घंटों दूर-दूर तक सिर्फ अथाह सागर दिखता है। हिंदमहासागर के पास से गुजरते हुए रोमाच के साथ भय भी लगता है।

बहरहाल हमारी बस नामखाना तो पहुंच नहीं सकी। लापरवाही से ज्यादा तीर्थयात्रियों को इस तरफ भेज देने से बस ने हमें काफी हगले उतार दिया। तब सुबह के चार बजे थे। तीन बूढ़ी माताओं के साथ हम भी लांच पकड़ने के लिए कतारबद्ध हो गए। सोचे थे कि घंटे भर में लाच मिल जाएगी। मगर हमारा अंदाजा गलत निकला। शौच, दातून, नाश्ता की तो सोच भी नहीं सकते थे। खड़े-खड़े बुरी तरह से थक गए। हमारा धैर्य भी जवाब दे गया था। लांच तक पहुंचने तक ११ बज गए। नजदीक हुंचे तो देखा कि जमीन से करीब पंद्रह फुट उंची सीढ़ी पर चढ़कर लांच पर जाना होगा। बहरहाल मैं सबसे पीछे रहकर अपने मित्रों अनिलजी व अभयजी के साथ अपनी व उनकी माताओं को लांच पर चढ़ने में मदद की। सभी ऊपर चढ़ चुके थे अब सिर्फ मैं बाकी था और मेरे पीछे भारी भीड़ धक्का-मुक्की कर रही थी। जल्दी से सीढ़ियां चढ़ रहा था। जब आखिरी सिरे पर था तभी पार फिसल गया और मैं नीचे गिरने ही वाला थी तभी मुझे पकड़ने के लिए उपर खड़े अभय सिंह ने मेरा दाहिना हाथ पकड़ लिया। दो मिनट के लिए मेरे हाथ पैर सुन्न हो गए। बहरहाल अभयजी व दूसरे लोगों ने मुझे खींचकर लांच पर चढ़ा लिया। मैं इतना डर गया था कि करीब डेढ़ घंटे तक मारे डर के कांपता रहा। सीढ़ी से गिरने का वह दृश्य आज भी जब मेरे आंखों के सामने आता है तो मेरी रुह कांप जाती है। दरअसल नामखाना में लांच पर चढ़ने के लिए जेटी ही नहीं थी। ज्वार खत्म होने के बाद लांच पर चढ़ना सामान्य लोगों के लिए बेहद खतरनाक हो जाता है। समुद्र में जब ज्वार होता है तो पानी १०-१५ मीटर ऊंचा होकर करार तक चला जाता है। उस समय तो आप लांच पर आसानी से चढ़ सकते हैं मगर भाटा होने पर लांच तट से काफी दूर ही रह जाता है जहां से लांच पर चढ़ने के लिए सीढ़ी लगानी पड़ती है। अब ऐसी अव्यवस्था वाली जगह पर प्रशासन ने भारी तादाद में तीर्थयात्रियों को भेज दिया था। इसके ठीक विपरीत हारवुड प्वाइंट पर बहुत जेटी बनीं हैं जहां से लांच पर जाना आसान होता हैं। इसके अलावा हारवुड प्वाइंट में नौसेना के तटरक्षक होते हैं। इस लिए भी भय की कोई बात नहीं होती। नामखाना आज भी सागरद्वीप के लिए कष्टसाध्य रास्ता है।

एक और घटना आज भी मेरे मन में सिहरन पैदा करती रहती है। दरअसल जिस लांच से हम सागरद्वीप पहुंचे थे, वह मां अभया लांच थी। यहीं लांच रात को लौटते वक्त दुर्घनाग्रस्त हो गया। नामखाना के रास्ते पर सागर में चलने वाले इस रूट पर रात में लांच चलाने के कोई माकूल इंतजाम नहीं थे। फिर तो दुर्घटना होनी ही थी। रात में सागरद्वीप से तीर्थयात्रियों को लेकर वहीं मां अभया लांच लौट रही थी। अंधेरा और सिगनल का सही इंतजाम नहीं होने के कारण सागरद्वीप की ओर जारही एक दूसरी लांच ने मां अभया लांच को टक्कर मार दी। मां अभया के दो टुकड़े हो गए। इस भयानक हादसे में मां अभया पर सवार ज्यादातर तीर्थयात्रियों की मौत हो गई। इस इलाके में निगरानी का कोई इंतजाम नहीं होने किसी को बचाना संभव नहीं था। यह हादसा अगर हारवुड प्वाइंट पर होता तो नौसेना के तटरक्षक ज्यादातर को बचा लेते। अव्वल तो यह है कि हारवुड इलाके में हादसा होता ही नहीं। सवाल यह उठता है कि जहां सुरक्षा के इतजाम नहीं वहां से इतनी भारी तादाद में तीर्थयात्रियों को प्रशासन भेजता ही क्यों है ?

हमें जब इस घटना की सूचना सुबह सागरद्वीप में मिली तो हमें भी काठ मार गया। अगर हमारे साथ ऐसा होता हम क्या करते ? शाम को हम भी लौटने की योजना बना रहे थे। मगर बसवालों की वजह से सुबह जाना तय किया था। अगर रात में लौटते तो हम भी उसी मां अभया में होते जिसकी सागर में जलसमाधि बन गई। हम बच गए मगर सागरद्वीप की वह यात्रा एक दुःस्वप्न की तरह लगती है।

Friday, 14 January 2011

आज समाज में चिंतन यानी आप भी किसी अखबार में छपे अपने लेख को यहां खोजें

http://blogsinmedia.com/2011/01/आज-समाज-में-चिंतन
आज समाज में ‘चिंतन’ का छपा अंश इसी नए ब्लाग एग्रीगेटर ब्लागमीडियाडाटकाम से उपलब्ध हो पाया है। इस एग्रीगेटर के बारे में विस्तार से इस लिंक से पढ़ें।
http://blogsinmedia.com/  
नीचे जो विवरण आप देख रहे हैं उसे प्रवीणजी ने गूगल बज पर लिखा है।
हिन्दी ब्लॉगिंग को समर्पित 11 वेबसाईट्स आ रही हैं 2011 में - ब्लॉग बुखार
पिछले वर्ष अनायास ही इतने पारिवारिक हादसे हुए कि तमाम योजनाएँ धरी की धरी रह गईं। अब पुन: स्फूर्ति आई है तो हिन्दी ब्लॉगिंग को केन्द्र में रख कर किए जाने वाले कार्यों से अवगत करवाना चाहता हूँ आपको।

जैसी योजना है उसके अनुसार इस वर्ष 2011 में हिन्दी ब्लॉगिंग को समर्पित 11 वेबसाईट्स लाई जाएँगी। 2011 के प्रत्येक माह के भारतीय पर्व पर एक वेबसाईट। चूंकि जून में कोई प्रचलित पर्व नहीं है अत: इस माह को छोड़ कर 11 वेबसाईट्स। यह ऐसी वेबसाईट्स हैं जिनमें हिन्दी ब्लॉगरों के द्वारा प्रदत्त जानकारियों का उपयोग उन्हीं के द्वारा होगा। उपयोगकर्ता स्वयं भी इसमें योगदान कर सकेंगे।


इस कड़ी में मकर संक्रांति की शुभकामनाएँ देते हुए इस वर्ष की पहली वेबसाईट ब्लॉग्स इन मीडियाwww.BlogsInMedia.com की सूचना देना चाहता हूँ।

बहुत पहले से हिन्दी चिट्ठाकारों के लेखों को समाचार पत्र-पत्रिकाएँ हिन्दी ब्लॉग लेखों को नियमित स्थान देने लगी हैं। ऑनलाईन पत्रिकायों के साथ-साथ अब रेडियो, टेलीविज़न पर भी हिन्दी ब्लॉगों को उद्धृत किया जाने लगा है। आप अभी तक अलग अलग ब्लॉग संकलकों के द्वारा विभिन्न ब्लॉगों तक जाते रहे होंगे किन्तु इस वेबसाईट द्वारा आप उन ब्लॉगों तक अपनी पहुँच आसान बना सकेंगे जिन्हें प्रिंट मीडिया, रेडियो, टेलीविज़न, वेब-पत्रिकाओं ने स्थान दे उनकी उपयोगिता सिद्ध की है। परिणामस्वरूप, हालिया परिदृष्य में, बेहतर हिन्दी ब्लॉगों की तलाश में संतुष्ट हुया जा सकेगा।


इस नए नवेले अनोखे ब्लॉग-एग्रीगेटर www.BlogsInMedia.com का स्वागत कीजिए जो केवल संचार माध्यमों में उल्लेखित हिन्दी ब्लॉगों का संकलन करेगा। यह निश्चित तौर पर अविवादित भी होगा क्योंकि ब्लॉग लेखक व एग्रीगेटर के मध्य आकलनकर्ता के रूप में मीडिया के अन्य कारक भी शामिल होंगे। इसी के साथ पुराना, प्रिंट मीडिया पर ब्लॉग चर्चा वाला ब्लॉग बंद किया जा चुका है। यदि भूले भटके कोई वहाँ पहुँच भी जाए तो तकनीक उसे स्वत: ही इस नई वेबसाईट तक पहुँचा देगी।

इस लेख को लिखे जाते तक ब्लॉग्स इन मीडिया वेबसाईट में 2178 जानकारियाँ देते लेखों पर लगभग 2700 अखबारी कतरनें हैं जिन पर विभिन्न 32 समाचार पत्र-पत्रिकाओं द्वारा हिन्दी ब्लॉगरों की पोस्ट का उल्लेख ब्लॉगर का नाम/ ब्लॉग नाम/ ब्लॉग यूआरएल/ संदर्भ देते हुए किया गया है। इस प्रयास में यहाँ अंदाज़न 4000 हिन्दी ब्लॉग लेखों का संकलन हो चुका है। विश्वास कीजिए अभी भी 500 से अधिक अखबारी कतरनें और सैकड़ों संदर्भ, यहाँ अपना स्थान पाने की प्रतीक्षा में हैं।

ऐसा नहीं है कि इस वेबसाईट में एकाएक यह प्रचुर जानकारियाँ समाहित की गईं हैं। इसके पीछे 21 माह का व्यक्तिगत परिश्रम व विभिन्न ब्लॉगर साथियों ( सुश्री शेफ़ाली पांडे, प्रतिभा कटियार, प्रतिभा कुशवाहा, सर्वश्री अविनाश वाचस्पति, कुमारेन्द्र सेंगर, संजीव कुमार सिन्हा, प्रवीण त्रिवेदी, अजय कुमार झा, महेश सिन्हा, कृष्ण कुमार मिश्रा आदि) का सहयोग है। अजय कुमार झा आज भी सक्रिय हैं इस वेबसाईट पर।

Friday, 7 January 2011

चुनाव या खूनी जंग


मई २०११ में पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव होने हैं। चुनाव के लिहाज से पश्चिम बंगाल की फिजा अलग ही होती है। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की वाममोर्चा को सत्ता से बेदखल की मुहिम ने माहौल को और गरमा दिया है। १९७७ से लगातार तीन दशक से अधिक समय से पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज कम्युनिष्ट सरकार की नींव पिछले पंचायत , लोकसभा और कोलकाता नगर निगम व नगरपालिका चुनावों में हिल चुकी है। अब विधानसभा चुनावों पर भारत समेत पूरी दुनिया की नजर है। कौतूहल भरी इस दिलचस्प लड़ाई का बिगुल बज चुका है। मैं भी अपने ब्लाग के माध्यम से आपको इस जंग से रूबरू कराना चाहता हूं। निरपेक्ष भाव से इस महाभारत की कथा सुनाऊंगा। रखिए मेरे ब्लाग के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-२०११ धारावाहिक की हर कड़ी पर नजर। पढ़िए दूसरी कड़ी।
ब्लाग नियंत्रक - डा.मान्धाता सिंह
 धारावाहिक : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-२०११ ( भाग-2 )

चुनाव या खूनी जंग


पश्चिम बंगाल में चुनावी संघर्ष की शुरुआत हो चुकी है। आशंका जताई जा रही है कि इस बार का पश्चिम बंगाल चुनाव खून खराबे का हर रिकार्ड तोड़ देगा। लालगढ़ में हर्मद वाहिनी के मुद्दे पर जो वाकयुद्ध ममता बनर्जी और बुद्धदेव भट्टाचार्य में चल रहा है वह अब खून कराबे की शक्ल अख्तियार करने लगा है। ममता ने आरोप लगाया है कि जो यूथवाहिनी लालगढ़ में तैनात की गई है दरअसल में वह हथियारबंद माकपा कैडर हैं। ऐसे लोगों को ममता हर्मदवाहिनी कहती हैं। माकपा ने इस शब्द पर कड़ा प्रतिवाद किया है। इसी आशय की मुख्यमंत्री बुद्धदेव को लिखी गई चिट्ठी ने तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल खड़ा कर दिया है। अब उसके आगे ममता के लोग लालगढ़ में हर्मदवाहिनी के सबूत पुख्ता कर रहे हैं और साबित करने में तुले हैं कि खूनखराबा यही हर्मदवाहिनी के लोग करके इलाका दखल कर रहे हैं। इलाका दखल की इसी लड़ाई ने सिंगुर, नंदीग्राम की जंग को अंजाम दिया था। छोटा अंगुरियाकांड भी शायद आप नहीं भूले होंगे जिसमें एक घर में सभा कर रहे तृणमूल के लोगों को घर समेत विस्फोट करके उड़ा दिया गया था और आरोप माकपा पर लगा था।

ठीक वैसी ही घटना आज लालगढ़ में घटी। एक घर में जुटे माकपा कार्यकर्ताओं को जब लोगों ने घेरा तो भीतर बैठे माकपा के लोगों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी जिसमें  पांच लोग मारे गए और २० लोग जख्मी होगए हैं। पांच और की हालत नाजुक है। इस घटना के बाद से पश्चिम बंगाल में बंद की अफवाह फैली हुई है। लोग बदले की कार्रवाई में और खूनखराबा होने की आशंका से सहमें हुए हैं। जब कि अभी चुनाव में चार महीने बाकी हैं। बहरहाल भाषा समाचार एजंसी की वह खबर पढ़िए जिसने फिर लालागढ़ समेत बंगाल में भय का माहौल पैदा कर दिया है।

अंधाधुंध फायरिंग में मारे गए

पश्चिम मिदनापुर के लालगढ़ क्षेत्र में एक महिला समेत पांच लोग तब मारे गए, जब गांववालों ने माकपा कार्यकर्ताओं के द्वारा एक घर का इस्तेमाल होने के संदेह में उसका घेराव किया, इसी दौरान घर के भीतर से गोली बरसाई गई। इस घटना में 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए।

जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने प्रेट्र को बताया कि पांच लोगों की मौत हो गई और 20 से ज्यादा लोग तब घायल हो गए, जब लालगढ़ पुलिस थाना क्षेत्र के बेलाटिकरी ग्राम पंचायत के नेताई गांव में एक घर के अंदर से गोलीबारी होने लगी। उन्होंने कहा मृतकों में एक महिला भी शामिल है। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया जहां पांच की हालत नाजुक बनी हुई है।

मृतकों की शिनाख्त फूलकुमारी , सौरभ घोराई, श्यामनंदा घोरोई, कबलू पात्र और धिरेन सेन के तौर पर की गई है। यह पूछे जाने पर कि उस घर को माकपा के सशस्त्र कैंप की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था, उन्होंने कहा, ‘‘हमलोग इसकी जांच कर रहे हैं।’’ इस संबंध में जब लालगढ़ माकपा के नेता चांदी किरण से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, ‘‘मैं अभी एक निजी दौरे पर पश्चिम मेदिनीपुर में हूं, इसलिए अभी कुछ नहीं कह सकता।’’ ( कोलकाता, ७ जनवरी - भाषा )

Sunday, 2 January 2011

धारावाहिक : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-२०११ (भाग-१)

मई २०११ में पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव होने हैं। चुनाव के लिहाज से पश्चिम बंगाल की फिजा अलग ही होती है। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की वाममोर्चा को सत्ता से बेदखल की मुहिम ने माहौल को और गरमा दिया है। १९७७ से लगातार तीन दशक से अधिक समय से पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज कम्युनिष्ट सरकार की नींव पिछले पंचायत , लोकसभा और कोलकाता नगर निगम व नगरपालिका चुनावों में हिल चुकी है। अब विधानसभा चुनावों पर भारत समेत पूरी दुनिया की नजर है। कौतूहल भरी इस दिलचस्प लड़ाई का बिगुल बज चुका है। मैं भी अपने ब्लाग के माध्यम से आपको इस जंग से रूबरू कराना चाहता हूं। निरपेक्ष भाव से इस महाभारत की कथा सुनाऊंगा। रखिए मेरे ब्लाग के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-२०११ धारावाहिक की हर कड़ी पर नजर। पढ़िए पहली कड़ी।
ब्लाग नियंत्रक - डा.मान्धाता सिंह

बुद्धदेव की जनसभाओं का पीछा करती फिर रही हैं ममता
कहती हैं- माकपा के झूठ का पर्दाफाश करना जरूरी
   पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है। वैसे-वैसे राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि अब से ही दोनों दलों की ओर से जोरदार जनसभा का आयोजन किया जा रहा है। वहीं ममता बनर्जी ठीक मुख्यमंत्री बुद्धदेव बनर्जी के पीछे-पीछे चल रही है। जहां मुख्यमंत्री सभा कर जाते है कुछ दिनों के अंतराल पर ही वहां तृणमूल कांग्रेस की ओर से सभा का आयोजन किया जाता है एवं मुख्य वक्ता के रूप में ममता बनर्जी होती है। राज्य में पिछले दो माह से ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। चाहे वह व‌र्द्धमान जिला हो या पूर्व मेदिनीपुर या पश्चिम मेदिनीपुर सभी जगह एक ही हाल देखने को मिलता है। माकपा ने जोरदार प्रचार शुरू कर दिया है। माकपा ने प्रचार में मुख्यमंत्री को उतार दिया है। उनका जवाब देने के लिए उसी स्थान पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से सभाओं का आयोजन होता है। लालगढ़ में दो माह पहले मुख्यमंत्री की सभा से ऐसी स्थिति शुरू हुई है। लालगढ़ में मुख्यमंत्री द्वारा सभा करने के कुछ दिन बाद ही रेलमंत्री ममता बनर्जी ने सभा की। उसके बाद कोलकाता व राज्य के दूसरे हिस्से में भी ऐसी स्थिति बनी हुई है।

हाल की दो तीन सभाओं में तृणमूल व माकपा के बयानबाजी की बानगी देखिए।

कांग्रेस व तृणमूल पर जमकर बरसे बुद्धदेव

२७ दिसंबर को दमदम सेन्ट्रल जेल मैदान में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुये मुख्यमंत्री बुद्धदेव भंट्टाचार्य ने कांग्रेस और तृणमूल पर जमकर बरसे। उन्होंने फिर कहा कि दिल्ली में तृणमूल का कांग्रेस के साथ जोट है लेकिन बंगाल में माओवादियों के साथ जोट है। पहले गुपचुप तरिके से तृणमूल नेता माओवादियों के साथ बैठक करते थे, अब खुलेआम बैठक कर रहे हैं। पूरे राज्य को तृणमूल कांग्रेस अशांत करने की कोशिश में है। ऐसा खूनखराबा कभी नहीं होता था जैसा पिछले एक वर्ष से हो रहा है। वीरभूम, बर्दवान, हुगली समेत विभिन्न जिलों में हमले हो रहे हैं। राइटर्स पर कब्जा करने की बात हो रही है। महंगाई पर एक शब्द भी नहीं बोल रहे हैं। इतना ही नहीं माल भाड़े में भी बढ़ोत्तरी कर दी गयी है जिसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा और आवश्यक सामानों की कीमत और बढ़ेंगे। कांग्रेस महंगाई बढ़ाने व घोटाले की सरकार साबित हो रही है लेकिन उनके सहयोगी दल तृणमूल कांग्रेस इस पर एक शब्द भी कहने को तैयार नहीं है।

मुख्यमंत्री ने एक बार फिर कहा कि बंगाल कृषि, शिक्षा में काफी आगे बढ़ चुका है और उद्योग भी बढ़ेंगे। पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि गलती हुयी है तो लोगों के पास सिर नीचे कर जाएं और उनसे माफी मांगे। उन्होंने कहा कि आराजकता बर्दाश्त नहीं किया जायेगा और न ही पार्टी में किसी अपराधी को पनाह मिलेगा। गृहमंत्री चिदंबरम ने तृणमूल को खुश करने के लिए पत्र भेजा है। उसका जबाव हम देंगे और अच्छे से देंगे। उन्होंने कहा कि पत्र के माध्यम से हमलोग गृहमंत्री से पूछेंगे तृणमूल व कांग्रेस जोट का समर्थन कर रहे हैं कि तृणमूल व माओवादी गठजोड़ को समर्थन कर रहे हैं।

आवासन मंत्री गौतम देव ने कहा कि हमलोगों से गलती हुयी है जिसे सुधारने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। बहुत जल्द ही हमलोग सुदृढ़ और सुव्यवस्थित होंगे। पूर्व सांसद मोहम्मद सलीम ने भी लोगों से वाममोर्चा को मजबूत करने की अपील की। मंच पर मंत्री रेखा गोस्वामी, दमदम के पूर्व सांसद अमिताभ नंदी समेत कई माकपा नेता उपस्थित थे।

माकपा के आतंक का मुकाबला करूंगी : ममता

माकपा की सभा के बाद ठीक तीसरे दिन ३० दिसंबर दमदम के उसी सेंट्रल जेल मैदान पर तृणमूल सुप्रीमो व रेल मंत्री ममता बनर्जी भी पहुंच गईं। ममता ने कहा है कि सत्ता में बने रहने के लिए माकपा किसी भी हद तक जा सकती है लेकिन तृणमूल कांग्रेस इसका राजनीतिक स्तर पर मुकाबला करेगी। मुख्यमंत्री जहां-तहां झूठ बोल कर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। वह जहां भी सभा कर झूठ बोलेंगे तृणमूल कांग्रेस वहीं सभा कर उसका जवाब देगी।

सुश्री बनर्जी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सोनारपुर में सरकारी कर्मचारियों की सभा में आज भी झूठ बोला है। सरकारी कर्मचारी सिर्फ उन्हीं के नहीं है। तृणमूल के साथ भी सरकारी कर्मचारी है। सुश्री बनर्जी ने रविवार को सोनारपुर में सरकारी कर्मचारियों को लेकर सभा करने की घोषणा की और कहा कि जहां-जहां मुख्यमंत्री सभा करेंगे वह भी वहां सभा कर उसका जवाब दूंगी। ममता ने कहा कि वाममोर्चा सरकार ने 34 साल में राज्य को पतन के गर्त में ढकेल दिया है। सरकार पर 2 लाख करोड़ रुपया का कर्ज है। राज्य में हर बच्चा 25 हजार रुपया का कर्ज लेकर पैदा हो रहा है और मुख्यमंत्री सरकार की उपलब्धियां गिनाते चल रहे हैं।

माकपा राजनीतिक तोड़फोड़ में भी लिप्त है। ट्रेनों में गड़बड़ी फैला रही है। राज्य में सरकार प्रायोजित आतंक चल रहा है। कानून व्यवस्था संभाल नहीं पा रहे हैं तो मुख्यमंत्री को कुर्सी छोड़ देना चाहिए। चुनाव कराने से मुख्यमंत्री क्यों डर रहे हैं? तृणमूल कांग्रेस ऐसी स्थिति में भी राष्ट्रपति शासन में चुनाव कराने की मांग नहीं कर माकपा पर दया कर रही है। तृणमूल को लोकतांत्रिक लड़ाई में विश्वास है। सुश्री बनर्जी ने कहा कि अगला चुनाव बंगाल की जनता की प्रतिष्ठा की लड़ाई है। बंगाल की जनता को वह माकपा के आतंक से मुक्त करायेंगी।

चंद दिनों की मेहमान है वामो सरकार : ममता

ममता ने यह भाषण २४ दिसंबर को धर्मतल्ला की विशाल सभा में दिया था। देखिए उनके तेवर। तृणमूल सुप्रीमो और रेलमंत्री ममता बनर्जी का राज्य में सत्ता परिवर्तन का जो सपना 2001 में पूरा नहीं हो सका था उसके 2011 के विधानसभा चुनाव में पूरा होने की उन्हें उम्मीद है। नेत्री ने आज धर्मतल्ला में इस साल की अपनी दूसरी विशाल जनसभा में राज्य की बुद्धदेव भंट्टाचार्य वाली वामो सरकार को चंद दिनों का मेहमान बताया और कहा कि राज्य की जनता माकपा की विदाई चाहती है। पार्टी के नेता प्रचारित कर रहे है कि आमरा घूरे दाड़ाबो। अगले साल होने वाले चुनाव में वापसी होगी लेकिन वह अपने को झूठी सांत्वना दे रहे है। ऐसा होने वाला नहीं। राज्य की जनता चाहती है बुद्धदेव सरकार खत्म हो,सिर्फ चुनाव का इंतजार है। राज्य के शिक्षा प्रतिष्ठानों में बढ़ती हिंसा के विरोध में धर्मतल्ला के मेट्रोचैनेल पर आयोजित इस जनसभा में ममता ने कहा कि मेरे घेराव की धमकी दी जा रही है। बुद्धदेव नहीं जानते कि मैं भी एक इशारा कर दूं तो वे घर से निकल नहीं पायेंगे। सभा मंच से कांग्रेस को भी खुली चुनौती मिली और उसे बिहार जैसे परिणाम पर आगाह किया गया। तृणमूल सुप्रीमो ने कहा कि राज्य में 35 सालों में परिवर्तन इस लिये नहीं हो सका क्योंकि तृणमूल का जन्म नहीं हुआ था। 2001 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल को सत्ता परिवर्तन में सफलता मिल सकती थी लेकिन एनडीए ने माकपा का साथ दिया। नेत्री ने कहा कि 2001 में जो हासिल नहीं हुआ था वह 2011 में हासिल होगा। तृणमूल हिंसा में यकीन नहीं करती क्योंकि वह आम आदमी की पार्टी है। जनविरोधी गतिविधियों में संलिप्तता की बात सामने आने पर पार्टी अपने किसी सदस्य को नहीं बख्शेगी। पिछले 35 साल में राज्य में 55 हजार राजनीतिक हत्यायें हुई हैं। सभा में ममता ने मारे गये लोगों की विस्तारित सूची वाले कागजात भी लोगों के सामने पेश किये।

Saturday, 1 January 2011

अखबार कर्मचारियों को नए साल का तोहफा :- वेतन में 65 फीसद बढ़ोतरी की सिफारिश

श्रम सचिव को रिपोर्ट सौंपते मजीठिया। फोटो-साभार जनसत्ता।

 आप सभी को नववर्ष २०११ की शुभकामनाएं।


   पत्रकारों और गैर पत्रकारों के लिए बने मजीठिया वेज बोर्ड ने अखबारों और समाचार एजंसियों के कर्मचारियों के लिए 65 फीसद तक वेतन वृद्धि की सिफारिश की है। मूल वेतन का 40 फीसद तक आवास भत्ता और 20 फीसद तक परिवहन भत्ता देने का सुझाव दिया है।

न्यायमूर्ति जीआर मजीठिया के नेतृत्व में बने वेतन बोर्ड ने शुक्रवार को यह भी सिफारिश की कि नए वेतनमान जनवरी 2008 से लागू किये जाएं। बोर्ड ने पहले ही मूल वेतन का 30 फीसद अंतरिम राहत राशि के रूप में देने का एलान किया था। मजीठिया ने शुक्रवार को श्रम सचिव पीके चतुर्वेदी को रपट सौंपी। चतुर्वेदी ने आश्वासन दिया कि सरकार इस रपट की समीक्षा करने के बाद इसे जल्द से जल्द लागू कराने का प्रयास करेगी।

बोर्ड ने 35 फीसद वैरिएबल पे देने की सिफारिश की है। समाचार पत्र उद्योग के इतिहास में किसी वेतन बोर्ड ने इस तरह की सिफारिश पहली बार की है। मजीठिया वेतन बोर्ड ने पत्रकारों और अन्य अखबारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ा कर 65 साल करने, महंगाई भत्ते के मूल वेतन में सौ फीसद न्यूट्रलाइजेशन और विवादों के निपटारे के लिए स्थायी न्यायाधिकरण बनाने की सिफारिश की है।

न्यायमूर्ति मजीठिया ने कहा कि इस बार की रपट में सबसे निचले गे्रड के लिए भी अच्छे वेतन की सिफारिश की गई है। उन्होंने कहा कि नए फार्मूले के अनुसार पत्रकार और गैर पत्रकार कर्मचारियों का मूल वेतन उसके वर्तमान मूल वेतन और महंगाई भत्ते में 30 फीसद अंतरिम राहत राशि और 35 फीसद वैरियेबल पे को जोड़ कर तय किया गया है। महंगाई भत्ता मूल वेतन में सौ फीसद न्यूट्रलाइजेशन के साथ जुडेÞगा। ऐसा अब तक केवल सरकारी कर्मचारियों के मामले में होता आया है। वेतन बोर्ड ने 60 करोड़ रुपए या इससे अधिक सकल राजस्व वाली समाचार एजंसियों को शीर्ष श्रेणी वाले समाचार पत्रों के साथ रखा है। इस तरह समाचार एजंसी पीटीआई शीर्ष श्रेणी में जबकि यूएनआई दूसरी श्रेणी में रखी गई है।

मजीठिया बोर्ड की सिफारिशों के अनुसार आवास भत्ता एक्स श्रेणी के शहरों के लिए मूल वेतन का 40 फीसद होगा, जो दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बंगलूर, हैदराबाद, चंडीगढ, अमदाबाद, कानपुर, लखनऊ और नागपुर पर लागू होगा। वाई श्रेणी के शहरों के लिए यह मूल वेतन का 30 फीसद होगा। वाई श्रेणी के शहरों में आगरा, अजमेर, अलीगढ, इलाहाबाद, अमृतसर, बरेली, बीकानेर, भोपाल, भुवनेश्वर, कोयंबटूर, दुर्गापुर, गुवाहाटी, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जलंधर, जमशेदपुर, कोच्चि, कोटा, मदुरै, मेरठ, पटना, पुणे, रायपुर, राजकोट, रांची, श्रीनगर, सूरत, तिरूवनंतपुरम, वडोदरा, वाराणसी, विशाखात्तनम, मंगलौर, पुडुचेरी, धनबाद, देहरादून, जम्मू और जामनगर आदि शामिल हैं। बाकी शहरों को जेड श्रेणी में रखा गया है, जहां के कर्मचारियों को मूल वेतन का 20 फीसद आवास भत्ता मिलेगा।

वेतन बोर्ड ने वार्षिक वेतन बढ़ोतरी की दर पहली से चौथी श्रेणी के लिए छह फीसद, पांचवीं और छठी के लिए पांच फीसद, सात से नौ के लिए चार, दस से 11 के लिए तीन फीसद तय की है। मजीठिया बोर्ड ने जनवरी, 2008 में अंतरिम राहत घोषित की थी और इसी तारीख से कर्मचारियों को एरियर मिलेगा। इसके अलावा बोर्ड ने एक्स श्रेणी के शहरों के लिए 20 फीसद परिवहन भत्ता, वाई श्रेणी के लिए 10 फीसद और जेड श्रेणी के लिए पांच फीसद परिवहन भत्ता देने की सिफारिश की है।

बोर्ड ने रात्रि भत्ते में भारी बढ़ोतरी करते हुए इसे पहली और दूसरी श्रेणी के लिए सौ रुपए, तीसरी और चौथी के लिए 75 रुपए और पांचवी से 11वीं श्रेणी के लिए 50 रुपए तय कर दिया है। इसके अलावा एक हजार रुपए मासिक कठिनाई भत्ता निर्धारित किया है। एलटीए दो साल में एक बार मिलेगा और मूल वेतन के बराबर होगा।

बोर्ड ने मेडिकल भत्ते में बढ़ोतरी करते हुए इसे पहली और दूसरी श्रेणी के लिए एक हजार रुपए मासिक, तीसरी और चौथी श्रेणी के लिए पांच सौ रुपए मासिक किया है। जिन लोगों पर ईएसआई लागू है, वे ये भत्ता नहीं हासिल कर सकेंगे। बोर्ड ने एरियर का भुगतान तीन समान किस्तों में करने की सिफारिश की है।

इस बीच कनफेडरेशन आफ न्यूजपेपर एंड न्यूज एजंसी इम्प्लाइज आर्गेनाइजेशंस के महासचिव एमएस यादव ने कहा कि वेतन बोर्ड अध्यक्ष ने श्रमजीवी पत्रकार एवं अन्य कर्मचारी कानून में प्रदत्त अधिकारों से वंचित रखते हुए बोर्ड सदस्यों को कई महत्त्वपूर्ण मसलों पर वोटिंग नहीं करने दिया लेकिन इस बात की खुशी है कि कई महत्त्वपूर्ण मांगों पर बोर्ड ने सकारात्मक फैसला किया है और दीर्घकाल में कर्मचारियों को फायदा होगा। सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाना, वैरियेबल पे और परिवहन भत्ता इनमें से एक है।

कनफेडरेशन में शामिल इंडियन जर्नलिस्ट्स

यूनियन के अध्यक्ष सुरेश अखौरी, नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स (आई) के वरिष्ठ नेता डा नंद किशोर त्रिखा, आल इंडिया न्यूजपेपर इम्प्लाइज फेडरेशन के महासचिव मदन तलवार, फेडरेशन आफ पीटीआई इम्प्लाइज यूनियंस के अध्यक्ष जान सी गोंजाल्विस, यूएनआई वर्कर्स यूनियन के नेता एमएल जोशी ने भी प्रतिक्रिया दी। (नई दिल्ली, 31 दिसंबर (भाषा)।)

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