Friday, 18 March 2011

पीएफ पर ९.५ फीसद से राहत पर वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने में देरी से पत्रकार नाराज, २४ को प्रदर्शन करेंगे

भविष्य निधि जमा पर अब 9.5 फीसद ब्याज
वित्त मंत्रालय ने 2010-11 के लिए कर्मचारी भविष्यनिधि संगठन के भविष्य निधि के सदस्यों को उनकी जमाराशि पर साढ़े नौ फीसद ब्याज देने की मंजूरी दे दी है। इस संबंध में जारी अधिसूचना की प्रति श्रम मंत्रालय के जरिए केंद्रीय भविष्य निधि संगठन को मिल गई है। इस फैसले से भविष्य निधि के 4.7 करोड़ से भी ज्यादा जमाकर्ताओं को लाभ होगा। वित्त मंत्रालय के इस फैसले का केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने स्वागत किया है।

एटक के सचिव डीएल सचदेव ने कहा कि केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने हमेशा इस बात पर एतराज किया है कि जब कर्मचारियों की भविष्यनिधि के न्यासियों ने साढ़े नौ फीसद की दर से ब्याज देने की सिफारिश कर दी उसे श्रम मंत्रालय के मंत्री व भविष्य निधि के अध्यक्ष ने मंजूरी ही नहीं बल्कि घोषित भी कर दिया तो उस पर वित्त मंत्रालय को इतना समय गंवाने की क्या जरूरत थी। फिर भी केंद्रीय श्रमिक संगठनों के साथी सदस्य एटक इस फैसले का स्वागत करती है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन 2005-06 से भविष्य निधि जमा पर 8.5 फीसद की दर से ब्याज दे रहा है। सितंबर महीने में संगठन के न्यासियों ने ब्याज दर बढ़ा कर साढ़े नौ फीसद करने की मांग को मंजूर किया था। जिसकी घोषणा श्रम मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी दी थी। लेकिन केंद्रीय श्रमिक संगठनों की अर्से से मांग थी कि भविष्य निधि के खाते में लगभग 1,731 करोड़ की रकम ऐसी है जिस पर दावे नहीं हैं। इसका लाभ भविष्य निधि के सदस्यों को उनके ब्याज दर में बढ़ोतरी कर दिया जा सकता है।

श्रम मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के साढ़े नौ फीसद की दर से ब्याज देने के फैसले को वित्त मंत्रालय के पास भेजा था। जिस पर वित्त मंत्रालय ने न केवल बगैर दावे की जमा राशि बल्कि खातों के सही तरीके से रखरखाव और ब्याज की दर बढ़ाने के आधार पर सवालिया निशान लगाए थे। वित्त मंत्रालय ने अपनी मंजूरी इस शर्त के साथ दी है कि कर्मचारी भविष्य निधि से अंशधारकों की सूची छह महीने में दुरुस्त हो जाएगी। साथ ही यदि साढ़े नौ फीसद की दर से रिटर्न देने में यदि निधि में कहीं कमी आती है तो उसका समायोजन 2011-12 में ब्याज दर के साथ कर दिया जाएगा।

केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त समिरेंद्र चटर्जी ने गुरुवार को कहा कि अगले वित्त वर्ष में समायोजन की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। वित्त मंत्रालय ने भी अपनी छानबीन में कर्मचारी भविष्य निधि के ‘सस्पेंस एकाउंट’ अतिरिक्त 1,731 करोड़ रुपए की हमारी गणना को सही पाया। इसी कारण उसने एक फीसद अधिक दर से ब्याज देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। उन्होंने बताया कि एक फीसद की दर से बढ़े ब्याज का लाभ भविष्य निधि के 4.7 करोड़ से अधिक जमाकर्ताओं को मिलेगा।(साभार-जनसत्ता ब्यूरो)

वेतनआयोग की सिफारिशों पर अमल में देर पर 24 को करेंगे प्रदर्शन

अखबारी कर्मचारियों और पत्रकारों के लिए बने वेतन आयोग की सिफारिशों के अमल में सरकार की ओर से हो रही देर पर 24 मार्च को श्रम मंत्रालय पर होगा धरना-प्रदर्शन। यह घोषणा की है कंफेडरेशन आॅफ न्यूजपेपर एंड न्यूज एजंसी एंप्लाइज आर्गेनाइजेशन के महासचिव एमएस यादव ने। उन्होंने कहा कि वेतन आयोग के अध्यक्ष जस्टिस जीआर मजीठिया ने समय पर यानी 31 दिसंबर को सिफारिशों संबंधी अपनी रपट जमा कर दी। लेकिन अब सरकार जानबूझ कर देर कर रही है।

उन्होंने बताया कि 24 मार्च को पत्रकार और अखबारों के कर्मचारी यूएनआई मुख्यालय से दोपहर बारह बजे रैली-प्रदर्शन शुरू करेंगे और श्रम मंत्रालय पर धरना देंगे। कंफेडरेशन ने गुरुवार को हुई अपनी आपात बैठक में इस धरना प्रदर्शन का फैसला लिया। उन्होंने बताया कि लोकसभा और राज्यसभा में विभिन्न दलों के सदस्य संसद में भी इस वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने संबंधी अधिसूचना जारी होने में हो रही देर पर सरकार से प्रतिक्रिया मांगते रहे हैं लेकिन सरकार से कोई स्पष्ट जवाब अब तक नहीं मिला।(साभार-जनसत्ता ब्यूरो)

Monday, 14 March 2011

ममता बनर्जी सीटों के बंटवारें में उलझीं, वाममोर्चा ने उम्मीदवार घोषित कर चुनाव प्रचार शुरू किया


१८ अप्रैल २०११ से छह चरणों में पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव होने हैं। चुनाव के लिहाज से पश्चिम बंगाल की फिजा अलग ही होती है। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की वाममोर्चा को सत्ता से बेदखल की मुहिम ने माहौल को और गरमा दिया है। १९७७ से लगातार तीन दशक से अधिक समय से पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज कम्युनिष्ट सरकार की नींव पिछले पंचायत , लोकसभा और कोलकाता नगर निगम व नगरपालिका चुनावों में हिल चुकी है। अब विधानसभा चुनावों पर भारत समेत पूरी दुनिया की नजर है। कौतूहल भरी इस दिलचस्प लड़ाई का बिगुल बज चुका है। मैं भी अपने ब्लाग के माध्यम से आपको इस जंग से रूबरू कराना चाहता हूं। निरपेक्ष भाव से इस महाभारत की कथा सुनाऊंगा। रखिए मेरे ब्लाग के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-२०११ धारावाहिक की हर कड़ी पर नजर।
ब्लाग नियंत्रक - डा.मान्धाता सिंह
असम में ममता की कांग्रेस से नहीं पटी, पश्चिम बंगाल में भी सीटों पर तकरार
     तमिलनाडु में द्रमुक के साथ अपने माफिक समझौते की कामयाबी के बाद कांग्रेस अब पश्चिम बंगाल में भी ज्यादा सीटें पाने की उम्मीद लगाए है। ममता बनर्जी कांग्रेस को साठ से सीटें देना चाहतीं है जबकि कांग्रेस 75 से ज्यादा चाहती है। इसके पहले शहरी निकाय के चुनाव में सीटों के तालमेल नहीं हो पाने के कारण दोनों पार्टियां अलग-अलग लड़ी थीं। तृणमूल कांग्रेस अभी भी उसी तरह की हेकड़ी दिखा रही है। फिलहाल बातचीत जारी है मगर सीटों पर जारी तकरार शायद इसलिए खत्म नहीं हो पाएगी क्यों कि ममता को बंगाल में अकेले ही विधानसभा चुनाव जीत लेने का भरोसा है।

   असम में जीत की हैट्रिक की तैयारी कर रही कांग्रेस पड़ोसी पश्चिम बंगाल की तर्ज पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से समझौता नहीं करेगी। जबकि अपने प्रभाव क्षेत्र के बाहर फैलकर राष्ट्रीय दल बनने की महत्वाकांक्षा पाल रही टीएमसी पश्चिम बंगाल और असम के चुनाव समझौतों को आपस में जोड़कर कांग्रेस पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने दबाव में आने से इनकार करते हुए असम में टीएमसी की सीटों की मांग ठुकरा दी है। अब टीएमसी वहां अकेले चुनाव लड़ने की धमकी दे रही है। लेकिन असम के मामले देख रहे कांग्रेस के नेताओं ने साफ कर दिया है कि टीएमसी की वोट काटने की भूमिका को वहां स्वीकार नहीं किया जाएगा। टीएमसी वहां 126 में से 110 सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है। उसका कहना है कि सोमवार को वह पार्टी उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर देगी।असम में टीएमसी का कोई असर नहीं है। मगर प. बंगाल से लगे कुछ इलाकों में उसे समर्थन मिलता रहा है। 2001 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने एक सीट जीती थी। लेकिन 2006 में उसका खाता भी नहीं खुला। हां, इस बीच 2003 के एक उपचुनाव में टीएमसी जीत चुकी है। उत्तर-पूर्व के इलाकों में अपना असर बढ़ाने के लिए ममता वहां के राज्यों में चुनाव लड़ती रहती है। पिछले महीने मणिपुर विधानसभा के एक उपचुनाव में टीएमसी कांग्रेस को शिकस्त दे चुकी हैं।

    उधर काग्रेस ने असम में विधानसभा चुनाव के लिए अपने 118 उम्मीदवारों की सूची जारी की। इसमें मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और विधानसभा अध्यक्ष टांका बहादुर राय के भी नाम हैं। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई पार्टी की चुनाव समिति की बैठक में 126 सदस्यीय प्रदेश विधानसभा के लिए 118 उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लगाई गई।

   पश्चिम बंगाल में वाममोर्चा अपनी पूरी टीम के दो तिहाई चेहरों को बदलकर चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। वाममोर्चा के उम्मीदवारों की जारी सूची में 149 नए चेहरे शामिल किए गए हैं। मौजूदा की विधायकों और नौ मंत्री रहे लोगों को उम्मीदवार नहीं बनाया है। वाममोर्चा ने ऐसा करके यह संकेत दिया है कि हम अनुशासित हैं और एक नई टीम लेकर अपनी लड़ाई लड़ेंगे। जिस तरह से फेरबदल करके वाममोर्चा ने उम्मीदवार तय किए वह अगर दूसरी पार्टी करती तो बगावत और मारपीट की नौबत आ जाती। ऐसा पश्चिम बंगाल कांग्रेस में अभी हाल में हो चुका है। वाममोर्चा ने इस बार के चुनाव में महिला उम्मीदवारों की संख्या में वृद्धि कर 46 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है। 2006 के विधानसभा चुनाव में महिला उम्मीदवारों की संख्या 34 थी। इसी तरह अबकी सूची में नए चेहरों की संख्या भी पिछली बार के 134 से बढ़कर 149 हो गई है। खास बात यह कि इस बार करीब 60 ऐसे उम्मीदवार हैं, जिनकी उम्र 40 वर्ष से कम है।

विधानसभा चुनाव-2011 के लिए दो सीटों को छोड़कर बाकी 292 सीटों पर खड़े होने वाले वाममोर्चा  उम्मीदवारों के नामों की सूची इस प्रकार है-

1. मेखलीगंज (सुरक्षित)-परेश चंद्र अधिकारी (फारवर्ड ब्लाक), 2. माथाभांगा (सुरक्षित) -अनंत राय (माकपा), 3. कूचबिहार उत्तर (सुरक्षित)-नगेन राय (फारवर्ड ब्लाक), 4. कूचबिहार दक्षिण-अक्षय ठाकुर (फारवर्ड ब्लाक), 5. शीतलकूची (सु)-विश्वनाथ प्रमाणिक (माकपा), 6. सिताई (सु)- दीपक राय (फारवर्ड ब्लाक), 7. दिनहाटा -उदयन गुहा (फारवर्ड ब्लाक), 8. नटबाड़ी-तमशेर अली (माकपा), 9. तूफानगंज (एसटी)-धनंजय रावा (माकपा), 10. कुमारग्राम (अनु. जाति) - दशरथ तिर्के (आरएसपी), 11. कालचीनी (अनु. जाति) से विनय भूषण करकेट््टा (आरएसपी), 12. अलीपुरडुआर्स -क्षिति गोस्वामी (आरएसपी), 13. फालाकाटा (सु)- रवींद्रनाथ वर्मा (माकपा), 14. मदारीहाट (अनु. जाति) - कुमारी कुजूर (आरएसपी), 15. धूपगुड़ी (सु) -ममता राय (माकपा), 16. मोयनागुड़ी (सु) - अनंत देव अधिकारी (आरएसपी), 17. जलपाईगुड़ी (सु)- गोविंद राय (फारवर्ड ब्लाक), 18. राजगंज (सु) -अमूल्य राय (माकपा), 19. देवग्राम-फूलबाड़ी -दिलीप सिंह (माकपा), 20. माल (अनु. जाति) -बुलू बराइक (माकपा), 21. नगराकाटा (अनु. जाति) - सुखमोआइत ओरांव (माकपा), 22. कलिमपोंग सीट (घोषणा बाद में), 23. दार्जिलिंग- केबी वत्तार (माकपा), 24. कर्सियांग - दीपा छेत्री (माकपा), 25. माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी (सु)-झरेन राय (माकपा), 26. सिलीगुड़ी- अशोक भट््टाचार्य (माकपा), 27. फांसीदेवा (अनु. जाति)- छोटन किस्कू (माकपा), 28. चोपड़ा -अनवारुल हक (माकपा), 29. इस्लामपुर - सइदा फरहत अफरोज (माकपा), 30. गोपालपोखड़ - शफीउर रहमान (फारवर्ड ब्लाक), 31. चाकुलिया - अली इमरान रम्ज (विक्टर) (माकपा), 32. करण दिघी (सु) - गोकुल राय (फारवर्ड ब्लाक), 33. हेमताबाद (सु) -खगेन सिन्हा (माकपा), 34. कालियागंज (सु)- ननीगोपाल राय (माकपा), 35. रायगंज -किरणमय नंद (एसपी), 36. इटाहार- श्रीकुमार मुखर्जी (भाकपा), 37. खुशमंडी (सु)-नर्मदा चंद्र राय (आरएसपी), 38. कुमारगंज -मफूजा खातून (माकपा), 39. बालूरघाट - विश्वनाथ चौधरी (आरएसपी), 40. तपन (अनु. जाति)- खारा सोरेन (आरएसपी), 41. गंगारामपुर (सु) - नंदलाल हाजरा (माकपा), 42. हरिरामपुर -नारायणचंद्र विश्वास (माकपा), 43. हबीबपुर (अनु. जाति) - खगेन मुर्मू (माकपा), 44. गाजोल (सु) गोविंद मंडल (माकपा), 45. चांचल - अंजुमनारा बेगम (माकपा), 46. हरीश्चंद्रपुर -तजमुल हुसैन (फारवर्ड ब्लाक), 47. मालतीपुर- अब्दुर रहीम बक्शी (आरएसपी),48. रातुआ - शैलेन सरकार (माकपा), 49. माणिकचक -रत्ना भट््टाचार्य (माकपा), 50. मालदा (सु) - राहुल रंजन दास (माकपा), 51. इंग्लिशबाजार - समर राय (माकपा), 52. मोथाबाड़ी - नइमुद्दीन शेख (माकपा), 53. सूजापुर - केताबुद्दीन (माकपा), 54. वैष्णवनगर- विश्वनाथ घोष (माकपा), 55. फरक्का -अब्दुस सलाम (माकपा), 56. शमशेरगंज - तोयब अली (माकपा), 57. सुती - जाने आलम मियां (आरएसपी), 58. जंगीपुर - पूर्णिमा भट््टाचार्य (माकपा), 59. रघुनाथगंज- अब्दुल हसनत खान (आरएसपी), 60. सागरदिघी - इस्माइल (माकपा), 61. लालगोला -यान अली (माकपा), 62. भगवानगोला -चांद मोहम्मद (एसपी), 63. रानीनगर - मकसुदा बेगम (फारवर्ड ब्लाक), 64. मुर्शिदाबाद -विभाष चक्रवर्ती (फारवर्ड ब्लाक), 65. नवग्राम (सु) - कनाई मंडल (माकपा), 66. खारग्राम (सु) -गौतम मंडल (माकपा), 67. बरवान (सु) -विनय सरकार (आरएसपी), 68. कांदी -इनाल हक (भाकपा), 69. भरतपुर -ईद मोहम्मद (आरएसपी), 70. रेजीनगर- सिराजुल इस्लाम मंडल (आरएसपी), 71. बेलडांगा -मोहम्मद रफतुल्ला (आरएसपी), 72. बहरमपुर - तड़ित ब्रह्मचारी (आरएसपी), 73. हरिहरपाड़ा -इंसार अली (माकपा), 74. नवदा -जयंत विश्वास (आरएसपी), 75. डोमकल - अनिसुर रहमान (माकपा), 76. जालंगी - अब्दुर रज्जाक (माकपा), 77. करीमपुर -समर घोष (माकपा), 78. तेहट््टा -रंजीत मंडल (माकपा), 79. पलाशीपाड़ा - एसएम सद्दी (माकपा), 80. कालीगंज -शंकर सरकार (आरएसपी), 81. नक्काशीपाड़ा (अनु. जाति)-गायत्री सरदार (माकपा), 82. चापरा - शमशुल इस्लाम मोल्ला (माकपा), 83. कृष्णनगर उत्तर -सुविनय घोष (माकपा), 84. नवद्वीप - सुमित विश्वास (माकपा),85. कृषणनगर दक्षिण (सु) - रमा विश्वास (माकपा), 86. शांतिपुर - यार मल्लिक (आरसीपीआई), 87.रानाघाट उत्तर पश्चिम - मीना भट््टाचार्य (माकपा), 88. कृष्णागंज (सु) -वरुण विश्वास (माकपा), 89. रानाघाट उत्तर पूर्व (सु) - अर्चना विश्वास (माकपा), 90. रानाघाट दक्षिण (सु) - आलोक दास (माकपा), 91. चाकदा - विश्वनाथ गुप्त (माकपा), 92. कल्याणी (सु)-ज्योत्सना सरकार (माकपा), 93. हरिणघाटा (सु)-डा. विश्वजीत पाल (माकपा), 94. बागदा (सु)-मृणाल सिकदर (फारवर्ड ब्लाक), 95. बनगांव उत्तर (सु)- डा. विश्वजीत विश्वास (माकपा), 96. बनगांव दक्षिण (सु) -अनुज सरकार (माकपा), 97. गाइघाटा (सु) -मनोज कांति विश्वास (भाकपा), 98. स्वर्णनगर (सु)- शिवपद दास (माकपा), 99. बादुरिया-मोहम्मद सलीम गाएन (माकपा), 100. हबरा-प्रणव भट््टाचार्य (माकपा), 101. अशोकनगर -सत्यसेवी कर (माकपा), 102. आमडांगा - अब्दुस सत्तार (माकपा),103. बिजपुर- निर्झरणी चक्रवर्ती (माकपा), 104. नैहाटी - रंजीत कुंडू (माकपा), 105. भाटपाड़ा -नेपालदेव भट््टाचार्य (माकपा), 106. जगदल (सु) - हरिपद विश्वास (फारवर्ड ब्लाक),107. नोआपाड़ा - डा. केडी घोष (माकपा),108. बैरकपुर - डा. मधुसूदन सामंत (माकपा), 109. खरदह-असीम दासगुप्त (माकपा), 110. दमदम उत्तर-रेखा गोस्वामी (माकपा), 111.पानीहाटी - दुलाल चक्रवर्ती (माकपा), 112. कमरहट््टी-मानस मुखर्जी (माकपा), 113. बरानगर- अमर चौधरी (आरएसपी),114. दमदम-गौतम देव (माकपा), 115. राजारहाट न्यूटाउन -तापस चटर्जी (माकपा), 116. विधाननगर-पलाश दास (माकपा), 117. राजारहाट गोपालपुर-रबीन मंडल (माकपा), 118. मध्यमग्राम -रंजीत चौधरी (फारवर्ड ब्लाक), 119. बारासात- संजीव चटर्जी (फारवर्ड ब्लाक ), 120. देगंगा- डा. मुर्तजा हुसैन (फारवर्ड ब्लाक), 121. हाड़ोआ-इम्तियाज हुसैन (माकपा), 122. मिनाखां (सु) -दिलीप राय (माकपा), 123. संदेशखाली (अनु. जाति) - निरापद सरदार (माकपा), 124. बशीरहाट दक्षिण -नारायण मुखर्जी (माकपा), 125. बशीरहाट उत्तर - मुस्तफा बिन कासिम (माकपा), 126. हिंगलगंज (सु) - आनंद मंडल (भाकपा), 127. गोसाबा (सु) - समरेंद्र नाथ मंडल (आरएसपी), 128. बासंती (सु) - सुभाष नस्कर (आरएसपी), 129. कुलतली (सु) -रामशंकर हालदार (माकपा), 130. पाथरप्रतिमा - योगेश्वर दास (माकपा), 131. काकद्वीप -मिलन भट््टाचार्य (माकपा), 132. सागर -मिलन पारुआ (माकपा), 133. कुल्पी (सु)- शकुंतला पाइक (माकपा), 134. रायदिघी - कांति गांगुली (माकपा), 135. मंदिरबाजार (सु) -डा. शरत हालदार (माकपा), 136. जयनगर (सु) - श्यामली हालदार (माकपा), 137. बारुईपुर पूर्व (सु)-विमल मिस्त्री (माकपा), 138. कैनिंग पश्चिम (सु) -जयदेव पुरकायत (माकपा), 139. कैनिंग पूर्व -अब्दुर रज्जाक मोल्ला (माकपा), 140. बारुईपुर पश्चिम -कनक कांति पारिया (माकपा), 141. मगराहाट पूर्व (सु)- चंदन साहा (माकपा), 142. मगराहाट पश्चिम -डा. अब्दुल हसनत (माकपा), 143. डायमंड हार्बर-शुभ्रा साव (माकपा), 144. पालता -अर्द्धेंदु शेखर बिंदु (माकपा), 145. सातगाछिया (सु) -वरुण नस्कर (माकपा), 146. विष्णुपुर (सु) -प्रो. सुधीन सिन्हा (माकपा), 147. सोनारपुर दक्षिण -तड़ित चक्रवर्ती (भाकपा), 148. भांगड़ - बादल जमादार (माकपा), 149. कसबा - शतरूप घोष (माकपा), 150. यादवपुर - बुद्धदेव भट््टाचार्य (माकपा), 151. सोनारपुर उत्तर (सु)- श्यामल नस्कर (माकपा), 152. टालीगंज -प्रो. पार्थ प्रतीम विश्वास (माकपा), 153. बेहला पूर्व -कुमकुम चक्रवर्ती (माकपा), 154. बेहला पश्चिम- प्रो. अनपम देव शंकर (माकपा),155. महेशतला- शेख मोहम्मद इसरायल (माकपा), 156. बजबज- हृषिकेश पोद्दार (माकपा), 157. मटियाबुर्ज -बदरुदोजा मोल्ला (माकपा), 158. कोलकाता पोर्ट -मोइनुद्दीन शम्स (फारवर्ड ब्लाक), 159. भवानीपुर-नारायण जैन (माकपा), 160. रासबिहारी- प्रो. शांतनु बोस (माकपा), 161. बालीगंज - डा. फुआद हलीम (माकपा), 162. चौरंगी-विमल सिंह (राजद), 163. इंटाली (सु)- डा. देवेश दास (माकपा),164. बेलेघाटा-अनादि साहू (माकपा), 165. जोड़ासांको- जानकी सिंह (माकपा), 166. श्यामपुकुर-जीवन साहा (फारवर्ड ब्लाक),167. मानिकतला- रूपा बागची (माकपा), 168. काशीपुर-बेलगछिया-कनिनिका घोष (माकपा), 169. बाली - कनिका गांगुली (माकपा), 170. हावड़ा उत्तर - निमाई सामंत (माकपा), 171. हावड़ा मध्य-अरूप राय (माकपा), 172. शिवपुर- डा. जगन्नाथ भट््टाचार्य (फारवर्ड ब्लाक), 173. हावड़ा दक्षिण-कृष्ण किशोर राय (माकपा), 174. सांकराइल (सु)-अनिर्वाण हाजरा (माकपा), 175. पांचला-डोला राय (फारवर्ड ब्लाक), 176. उलबेड़िया पूर्व- मोहन मंडल (माकपा), 177. उलबेड़िया उत्तर (सु)- भीम घुकू (माकपा), 178. उलबेड़िया दक्षिण-शेख कुतुबुद्दीन अहमद (फारवर्ड ब्लाक), 179. श्यामपुर-मिनती प्रमाणिक (पारवर्ड ब्लाक), 180. बागनान-अक्केल अली (माकपा), 181. आमता सीट से रवींद्रनाथ मित्र (माकपा), 182. उदयनारायणपुर सीट से चंद्रलेखा बाग (माकपा), 183. जगतवल्लभपुर-काजी जफ्फार अहमद (माकपा), 184. डोमजुर -मोहंत चटर्जी (माकपा), 185. उत्तरपाड़ा-श्रतिनाथ प्रहराज (माकपा), 186. श्रीरामपुर (बाद में घोषित), 187. चंपदानी -जीवेश चक्रवर्ती (माकपा), 188. सिंगुर-डा. असित दास (माकपा), 189. चंदननगर- शिव प्रसाद बनर्जी (माकपा), 190. चूंचुड़ा -नरेन दे (फारवर्ड ब्लाक), 191. बलागढ़ (सु)-भुवन प्रमाणिक (माकपा), 192. पंडुआ-अमजद हुसैन (माकपा), 193. सप्तग्राम -आशुतोष मुखोपाध्याय (माकपा), 194. चंडीतला - शेख आजिम अली (माकपा), 195. जंगीपाड़ा- प्रो. सुदर्शन रायचौधरी (माकपा), 196. हरिपाल-भारती मुखर्जी, 197. धनियाखाली (सु)-श्रवाणी सरकार (फारवर्ड ब्लाक), 198. तारकेश्वर-प्रतीम चटर्जी (मार्क्सवादी फारवर्ड ब्लाक), 199. पुरसुरा -सौमेंद्रनाथ बेरा (माकपा), 200. आरामबाग (सु)- असित मलिक (माकपा), 201. गोघाट (सु)- विश्वनाथ कराक (फारवर्ड ब्लाक), 202. खानकुल- शुभ्रा पारुई (माकपा), 203. तमलुक-जगन्नाथ मित्र (भाकपा), 204. पांशकुरा पूर्व -अमिय साहू (माकपा), 205. पांशकुरा पश्चिम- निर्मल कुमार बेरा (भाकपा), 206. मोयना-मुजीबुर रहमान (माकपा), 207. नंदकुमार -ब्रह्ममय नंद (एसपी), 208. महिषादल-तमालिका पंडा सेठ (माकपा), 209. हल्दिया (सु)-नित्यानंद बेरा (माकपा), 210. नंदीग्राम-परमानंद बेरा (भाकपा), 211. चंडीपुर -विद्युत गुछायट (माकपा), 212. पटाशपुर-माखन नायक (भाकपा), 213. कांथी उत्तर (ओबीसी)-चक्रधर मैकप (माकपा), 214. भगवानपुर- रंजीत मन्ना (एसपी), 215. खेजुरी (सु) -असीम मंडल (एसपी), 216. कांथी दक्षिण -उत्तम कुमार प्रधान (भाकपा), 217. रामनगर -स्वदेश रंजन नायक (माकपा), 218. एगरा- प्रो. हृषिकेश पायरा (डीएसपी), 219. दांतन -अरुण महापात्र (भाकपा), 220. नयाग्राम (अनु.जाति) - भूतनाथ सोरेन (माकपा), 221. गोपीवल्लभपुर -रविलाल मोइत्र (माकपा), 222. झाड़ग्राम-अमर बोस (माकपा), 223. केशियारी (अनु. जाति) - विराम मांडी (माकपा),

224. खड़गपुर सदर - अनिल दास (माकपा), 225. नारायणगढ़- सूर्यकांत मिश्र (माकपा), 226. संबग-रामापद साहू (बीबीसी), 227. पिंगला- प्रो. प्रबोध चंद्र सिन्हा (डीएसपी), 228. खड़गपुर-नजामुल हक (माकपा), 229. डेबरा-शोहराब हुसैन शेख (माकपा), 230. दासपुर-सुनील अधिकारी (माकपा), 231. घटाल (सु)-छवि पाखीरा (माकपा), 232. चंद्रकोना (सु)-छाया दलुई (माकपा), 233. गड़बेता-सुशांत राणा (भाकपा), 234. सालबनी-अभिराम महतो (माकपा), 235. केशपुर (सु)-रामेश्वर दालुई (माकपा),236. मेदिनीपुर सीट से संतोष राणा (भाकपा), 237. बीनपुर- दिवाकर हांसदा (माकपा), 238. बांदवान (अनु. जाति)-सुशांत बेसरा (माकपा), 239. बलरामपुर (ओबीसी)- मणिंद्र गोप (माकपा), 240. बाघमुंडी-मंगल महतो (फारवर्ड ब्लाक), 241.जयपुर-धीरेन महतो (फारवर्ड ब्लाक), 242. पुरुलिया सीट से कौशिक मजुमदार (माकपा), 243. मानबाजार (अनु. जाति) सीट से हीमानी हांसदा (माकपा), 244. काशीपुर सीट से सुभाष महतो (माकपा), 245. पारा (सु) सीट से दीपक बारुई (माकपा), 246. रघुनाथपुर (सु) सीट से दीपाली बाउरी (माकपा), 248. छातना सीट से अनाथबंधु मंडल (आरएसपी), 249. रानीबांध (अनु. जाति) सीट से देवलीना हेंब्रम (माकपा), 250. रायपुर (अनु. जाति) सीट से उपेन किस्कू (माकपा), 251. तालडांगा सीट से मनोरंजन पात्र (माकपा), 252. बांकुड़ा सीट से प्रतीक मुखर्जी (माकपा), 253. बरजोरा सीट से सुष्मिता विश्वास (माकपा), 254. ओंदा सीट से तारापद चक्रवर्ती (फारवर्ड ब्लाक), 255. विष्णुपुर-स्वपन घोष (माकपा), 256. कतुलपुर (सु)- पूर्णिमा बागदी (माकपा), 257. इंदस (सु)- शांतनु बोरा (माकपा), 258. सोनामुखी (सु)- मनोरंजन चोंगरे (माकपा), 259. खंडघोष (सु)- नवीन बाग (माकपा), 260. बर्दवान दक्षिण- निरूपम सेन (माकपा), 261. रायना (सु)- बासुदेव खान (माकपा), 262. जमालपुर (सु)-समर हाजरा (मार्क्सवादी फारवर्ड ब्लाक), 263. मंतेश्वर- चौधरी मोहम्मद हिदायतुल्ला (माकपा), 264. कालना (सु)- प्रणव सिकदर (माकपा), 265. मेमारी- देवाशीष घोष (माकपा), 266. बर्दवान उत्तर (सु)- अपर्णा साहा (माकपा), 267. भातार- श्रीजीत कोनार (माकपा), 268. पूर्वस्थली दक्षिण- आलिया बेगम (माकपा), 269. पूर्वस्थली उत्तर-प्रदीप साहा (माकपा), 270. काटवा-सुदीप्ता बागची (माकपा)स 271. केतुग्राम- प्रो. सैयद अबुल कादर (माकपा), 272. मंगलकोट-शाहजहां चौधरी (माकपा),

273. आउसग्राम (सु)- बासुदेव मेटे (माकपा), 274. गलसी (सु)- सुनील कुमार मंडल (फारवर्ड ब्लाक), 275. पंजेश्वर- गौरांग चटर्जी (माकपा), 276. दुर्गापुर पूर्व- अल्पना चौधरी (माकपा), 277. दुर्गापुर पश्चिम-बीपरेंदु चक्रवर्ती (माकपा), 278. रानीगंज- रुनू दत्त (माकपा), 279. जामुड़िया-जहांआरा खान (माकपा), 280. आसनसोल दक्षिण-आलोक मुखर्जी (माकपा), 281. आसनसोल उत्तर-रानू राय चौधरी (माकपा), 282. कुल्टी-मानिकलाल आचार्य (फारवर्ड ब्लाक), 283. बाराबनी- आभास रायचौधरी (माकपा), 284. दुबराजपुर (सु)- विजय बागदी (फारवर्ड ब्लाक), 285. सुरी-अब्दुल गफ्फार (माकपा), 286. बोलपुर- तपन होड़ (आरएसपी), 287. नानूर (सु)-श्यामली प्रधान (माकपा), 288. लाभपुर-नवनीता मुखर्जी (माकपा), 290. मयुरेश्वर-अशोक राय (माकपा), 291. रामपुरहाट- रेवती रंजन भट््टाचार्य (फारवर्ड ब्लाक), 292. हासन-कमल हासन (आरसीपीआई), 293. नलहाटी-दीपक चटर्जी (फारवर्ड ब्लाक) व 294. मुराराई-डा. कमरे इलाही (माकपा)।









Tuesday, 1 March 2011

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में विधाननसभा चुनाव की तारीखों का एलान



१८ अप्रैल २०११ से छह चरणों में पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव होने हैं।। चुनाव के लिहाज से पश्चिम बंगाल की फिजा अलग ही होती है। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की वाममोर्चा को सत्ता से बेदखल की मुहिम ने माहौल को और गरमा दिया है। १९७७ से लगातार तीन दशक से अधिक समय से पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज कम्युनिष्ट सरकार की नींव पिछले पंचायत , लोकसभा और कोलकाता नगर निगम व नगरपालिका चुनावों में हिल चुकी है। अब विधानसभा चुनावों पर भारत समेत पूरी दुनिया की नजर है। कौतूहल भरी इस दिलचस्प लड़ाई का बिगुल बज चुका है। मैं भी अपने ब्लाग के माध्यम से आपको इस जंग से रूबरू कराना चाहता हूं। निरपेक्ष भाव से इस महाभारत की कथा सुनाऊंगा। रखिए मेरे ब्लाग के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-२०११ धारावाहिक की हर कड़ी पर नजर।
ब्लाग नियंत्रक - डा.मान्धाता सिंह  

लोकलुभावन-बेवकूफबनावन कार्यक्रमों में ठहराव और चुनाव प्रचार में तेजी 


 वैसे तो पश्चिम बंगाल में चुनावी जंग तीन-चार महीने पहले से शुरू हो चुकी है मगर आज पहली मार्च को चुनाव आयोग ने तारीखों का एलान करके बाकायदा युद्ध आरम्भ करा दिया। जिन पाच राज्यों में चुनाव होने हैं उसमें सबसे संवेदनशील माहौल पश्चिम बंगाल में है। हालांकि छह चरणों में चुनाव सत्तापक्ष के गले शायद नहीं उतरे मगर सत्ता के लिए पहले से हो रहे खूनखराबे के मद्देनजर चुनाव आयोग ने सही फैसला लिया है। अब चुनाव आचार संहिता प्रभावी होगी। इस बीच जनता के लिए लोकलुभावन-बेवकूफबनावनकार्यक्रमों में ठहराव और चुनाव प्रचार में तेजी होगी। देखते हैं जनता किसके झांसे में आती है ?
चुनाव आयोग ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में विधासभा चुनाव की तारीखों का एलान किया।
मुख्‍य चुनाव आयुक्त कुरैशी ने बताया कि पश्चिम बंगाल में छह चरणों में - 18, 23, 27 अप्रैल और 7, 10 मई को चुनाव होंगे, जबकि असम में 4 और 11 अप्रैल को दो चरणों में चुनाव होंगे। केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी में 13 अप्रैल को वोट डाले जाएँगे। कुरैशी ने बताया विधानसभा चुनाव अप्रवासी भारतीय भी वोट डाल सकेंगे। उन्होंने बताया कि यह पहला मौका है जब अप्रवासी भारतीय वोट डाल सकेंगे। पाँचों राज्यों की मतगणना 13 मई को होगी। चुनावों की तारीख का एलान करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त सैय्यद याकूब क़ुरैशी ने कहा कि तारीख़ें तय करने से पहले स्थानीय मौसम, स्कूलों की परीक्षाओं, त्योहारों और केंद्रीय सुरक्षा बलों की उपलब्धि का ध्यान रखा गया है।
चुनाव का तिथिवार विवरण
प. बंगाल
पहला चरण- अधिसूचना जारी करने की तारीख- 24 मार्च, चुनाव की तारीख- 18 अप्रैल
दूसरा चरण- अधिसूचना जारी करने की तारीख- 30 मार्च,  चुनाव की तारीख- 23 अप्रैल
तीसरा चरण- अधिसूचना जारी करने की तारीख- 2 अप्रैल,  चुनाव की तारीख- 27 अप्रैल
चौथा चरण- अधिसूचना जारी करने की तारीख- 7 अप्रैल,  चुनाव की तारीख- 3 मई
पांचवा चरण- अधिसूचना जारी करने की तारीख- 11 अप्रैल,  चुनाव की तारीख- 7 मई
छंठवा चरण- अधिसूचना जारी करने की तारीख- 14 अप्रैल,  चुनाव की तारीख- 10 मई

तमिलनाडू


अधिसूचना जारी करने की तारीख- 19 मार्च
चुनाव की तारीख- 13 अप्रैल

केरल
अधिसूचना जारी करने की तारीख- 19 मार्च
चुनाव की तारीख- 13 अप्रैल

असम
पहला चरण- अधिसूचना जारी करने की तारीख- 10 मार्च, चुनाव की तारीख- 4 अप्रैल
दूसरा चरण - अधिसूचना जारी करने की तारीख- 18 मार्च, चुनाव की तारीख- 11 अप्रैल

पुडुचेरी

अधिसूचना जारी करने की तारीख- 19 मार्च
चुनाव की तारीख- 13 अप्रैल

सभी राज्यों में कुल विधानसभा क्षेत्रों की संख्या इस प्रकार है-
राज्य                  कुल विधानसभा क्षेत्र
तमिलनाडू                    234
केरल                        140
पुडुचेरी                       30
पश्चिम बंगाल                 294
असम                       126








Monday, 28 February 2011

मजीठिया आयोग की सिफारिशों पर जल्द अमल की सरकार से अपील


     पत्रकारों की चेतावनी- छेड़छाड़ हुई तो विरोध किया जाएगा

   सात पत्रकार इकाइयों और अखबारी कर्मचारियों के संगठनों ने आम बजट की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार से अपील की है कि वह जस्टिस मजीठिया आयोग की सिफारिशों को जल्दी ही अधिसूचित करे। नेशनल प्लेटफार्म आफ जर्नलिस्ट आरगेनाइजेशन की स्टीयरिंग कमिटी ने अपनी दो दिन की बैठक के बाद यह घोषणा की। स्टीयरिंग कमिटी ने चेतावनी दी है कि यदि आयोग की सिफारिशों के साथ छेड़-छाड़ की गई तो इस पूरे मुद्दे को जनता के बीच, सड़कों पर, संसद में उठाया जाएगा। इस मौके पर दिल्ली प्रेस यूनिटी सेंटर के गठन की घोषणा की गई जिसके अध्यक्ष रूपचंद राजपूत हैं। उन्होंने कार्यकारिणी की भी घोषणा की।
दिल्ली यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स (डीयूजे) की अगुआई में आंध्र प्रदेश वर्किंग जर्नलिस्ट फेडरेशन, उत्तर प्रदेश के एलायंस आफ जर्नलिस्ट्स, उत्तरांचल के पत्रकार संघ, जम्मू कश्मीर की पत्रकार इकाई, छत्तीसगढ़ के पत्रकार मंच, केरल के पत्रकार और एसोसिएशन आफ एक्रिडेटेड न्यूज कैमरामैन की अगुआई में बने नेशनल प्लेटफार्म आफ जर्नलिस्ट्स आरगेनाइजेशन के तहत शनिवार और रविवार को राजधानी में हुए अपने सम्मेलन में फैसला लिया कि जस्टिस मजीठिया की सिफारिशों से कोई छेड़छाड़ यदि हुई तो इसका पुरजोर विरोध होगा। इस सम्मेलन में बताया गया कि विभिन्न सिफारिशों पर संशोधनों के लिए अब मंत्रालय पर दबाव डाले जा रहे हैं जो अनुचित है। नेशनल प्लेटफार्म आॅफ जर्नलिस्ट्स आरगेनाइजेशन की स्टीयरिंग कमिटी में शामिल पत्रकारों और गैर पत्रकार कर्मचारियों ने यह साफ किया कि उनका यह संगठन मीडिया के विभिन्न संगठनों में एका बढ़ाने के लिए बना है। इनकी मांग है कि जस्टिस मजीठिया की सिफारिशों पर जल्द से जल्द अमल हो। सिफारिशों में एरियर की अवधि कम न की जाए क्योंकि आयोग का गठन ही लगभग दो दशक बाद हुआ। तबसे महंगाई लगातार बढ़ी है।
आंध्र प्रदेश वर्किंग जर्नलिस्ट्स फेडरेशन के महासचिव जी आंजनेयलु ने कहा कि पत्रकारों और गैर पत्रकार कर्मचारियों को अर्से बाद जस्टिस मजीठिया आयोग मिला। इसकी सिफारिशों पर हमारे मतभेद हैं लेकिन जो भी सिफारिशें हैं उन पर जल्दी से जल्दी अमल होना चाहिए। एपीडब्लू जेएफ के राष्ट्रीय संयोजक परमेश्वर राव ने कहा कि जस्टिस मजीठिया की सिफारिशों पर कोई छेड़छाड़ किसी भी स्तर पर नहीं की जानी चाहिए। उप्र एलायंस आफ जर्नलिस्ट्स के शिव प्रकाश गौर ने कहा कि जिलों में अखबारों के संवाददाताओं को उचित मानदेय दिया जाना चाहिए। डीयूजे के महासचिव एसके पांडे ने कहा कि नेशनल प्लेटफार्म आफ जर्नलिस्ट्स आरगेनाइजेशन का गठन आज की जरूरत है।  कन्फेडरेशन और एआईईएनएफ के साथ यह आरगेनाइजेशन सहयोग करते हुए पत्रकारों और गैर पत्रकार अखबारी कर्मचारियों की एका बढ़ाने के लिए बना है।
इस मौके पर दिल्ली प्रेस यूनिटी सेंटर का गठन हुआ। आम राय से रूपचंद राजपूत इसके अध्यक्ष और दिनेश चंद्र उपाध्यक्ष घोषित किए गए। महासचिव बनीं सरस्वती। इनके अलावा सुजाता मधोक, राजकुमार और सीएस नायडू सचिव बने। प्रचार सचिव बने एसके पांडे। राजपूत ने बताया कि दिल्ली प्रेस यूनिटी सेंटर पत्रकारों व अखबारी कर्मचारियों में एका और जुझारूपन को धारदार बनाने के इरादे से गठित हुआ है। इसमें राजधानी से प्रकाशित अखबारों के अलावा क्षेत्रीय अखबारों के लोगों को  कार्यकारिणी में जल्दी ही शामिल किया जाएगा। ( साभार- जनसत्ता ब्यूरो , २८ फरवरी )

पत्रकारों-गैरपत्रकारों के वेतन में 35 फीसदी वृध्दि की सिफारिश

   पत्रकारों और गैरपत्रकारों के लिये गठित मजीठिया वेतनबोर्ड ने आज ( 31 December 2011 को ) केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट दे दी जिसमें लगभग 35 प्रतिशत वेतन वृध्दि की सिफारिश की गई है। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जी.आर. मजीठिया ने केंद्रीय श्रम सचिव पीसी चतुर्वेदी को आज अपनी रिपोर्ट दी। श्री चतुर्वेदी ने बाद में संवाददाताओं को बताया कि पत्रकारों और गैरपत्रकारों के वेतन में बढ़ोतरी के लिये रिपोर्टों की समीक्षा करके जल्द ही उसकी सिफारिशों को लागू किया जायेगा। न्यायमूर्ति मजीठिया ने बताया कि एक जुलाई 2010 के वेतन के आधार पर विभिन्न मदों में कुल मिलाकर लगभग 35 प्रतिशत वृध्दि की सिफारिश की गयी है। इसके अलावा पत्रकारों की सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाकर 65 वर्ष करने और भविष्य में वेतन वृध्दि के मामलों पर विचार करने के लिये न्यायाधिकरण बनाने का भी सुझाव दिया गया है। न्यायमूर्ति मजीठिया ने बताया कि वेतन वृध्दि के लिये मूल वेतन की वर्तमान दरें, महंगाई भत्ता और पहले से ही मंजूर 30 प्रतिशत अंतरिम राहत को ध्यान में रखा गया है। सालाना वेतन वृध्दि विभिन्न वेतनमानों में शुरुआती दर के आधार पर तय होगी। नये वेतनमानों में आवास भत्ता, परिवहन भत्ते, रात्रि पाली भत्ते, विषम परिस्थितिजन्य भत्ते, अवकाश यात्रा भत्ते और चिकित्सा भत्ते में भी उचित वृध्दि की सिफारिश की गई है। जनसंख्या के आधार पर शहरों के वर्गीकरण के लिये आवास भत्ता और परिवहन भत्ता से जोड़ते हुये शहर क्षतिपूर्ति भत्ता के बारे में विचार नहीं किया गया। नये वेतमान में महंगाई भत्ता को शत-प्रतिशत समायोजित करने की सिफारिश की गयी है और अब इसमें वर्ष में दो बार ही घट-बढ़ होगी। अभी हर तिमाही में  महंगाई भत्ते में संशोधन किया जाता है। ( साभार- रांची एक्सप्रेस )

Wednesday, 9 February 2011

बदल रही है सागरद्वीप की फिजा !



चित्र में बाएं से प्रभात खबर के अखिलेश, दैनिक जागरण के अरविंद दूबे, जनसत्ता के डा. मान्धाता सिंह, राजस्थान पत्रिका के प्रभात गुप्ता और जनसत्ता के जयनारायण प्रसाद। पीछे दिख रहा है निर्माणाधीन शिविर स्थल। हमारे सामने की तरफ समुद्र और पीछे की तरफ कपिलमुनि का मंदिर व मेला स्थल है। दूसरी फोटो में पीछे दिख रही हैं समुद्र की लहरे।
 ६  जनवरी २०११ को १६ साल बाद पत्रकार मित्रों ( जयनारायण प्रसाद, अरविंद दूबे व कोलकाता के बांग्ला, हिंदी व अंग्रेजी के पत्रकारों )  के साथ दूसरी बार गंगासागर गया था। पश्चिम बंगाल सरकार का सूचना विभाग गंगासागर मेले की पूर्व तैयारियों की देने के लिए हर साल पत्रकारों को गंगासागर ले जाता है। सागरद्वीप पर १४ जनवरी को मकर संक्रांति के मौके पर पुण्यस्नान के लिए लाखों तीर्थयात्री आते हैं। इस बार सागरद्वीप पूरी तरह से बदला हुआ दिखा। सागरद्वीप की बेतहासा बढ़ी आबादी ने बाजार को भी फैलने में सहयोग दिया। १६ साल पहले सागरद्वीप में कहीं-कहीं या कहें बेहद कम आबादी थी मगर इस बार जब से बस सागरद्वीप की ओर दौड़ने लगी तब से रास्तें में बाजार ही बाजार दिखाई दिए। इतना ही नहीं बाजार और सड़क के किनारे के गांवों में खपरैल या छत वाले जायादातर मकानों पर सोलर पैनल लगे दिखे। सागरद्वीप में बिजली इसी से प्राप्त होती है।इसी सोलर बिजली के कारण इन घरों पर डिस एंटिना भी लगे हुए दिखे। अभी तक  बिजली के खंभे नहीं पहुंच पाए हैं। यह जरूर है २०११-१२ तक सागद्वीप तक भी बिजली पहुंच जाएगी। हमने कचूबेड़िया तट से सागर को जोड़ने वाले मीलों लंबी नदी में बनाए जा चुके कई बिजली के खंभे देखे। अब महज दो तीन और बनना बाकी था। यानी जल्दी सही सागरद्वीप भी बिजली की रोशनी में रोशन हो जाएगा। हो सकता है कि आनेवाले दोतीन सालों में इसी नदी पर (हारवुड़ प्वाइंट पर ) पुल भी बन जाए। फिलहाल अभी तो हमें लांच से इसे पार करने में घंटे भर लगे। अफसोस होता है कि गंगासागर जैसे महत्वपूर्ण व इतने बड़े तीर्थ तक जाने के लिए सरकारें माकूल इंतजाम तक नहीं कर पाईं हैं। जबकि यहां आने वाले लाखों तीर्थयात्रियों से आम भाड़े से कई गुना भाड़ा वसूला जाता है। मसलन जो लांच आम दिनों में सिर्फ छह रुपए लेते हैं वहीं लांच का किराया तीर्थयात्रियों के लिए ४० रुपए हो जाता है। बहरहाल आने वाले दिनों में सागरद्वीप अब कोई बियावान जंगल नहीं रह जाएगा और न ही कोई कष्टसाध्य तीर्थ रह जाएगा। गंगासागर के बार में मान्यता थी कि वहां से कम ही लोग वापस लौट पाते हैं। कहावत भी है कि- सभी तीर्थ बार-बार, गंगासागर एक बार। पर अब यह मिथ आपको टूटता नजर आएगा। बड़ी ही मनोरम स्थल है गंगासागर। मैं तो कहूंगा कि आप भी जरूर जाइए एक बार गंगासागर।

दुःस्वप्न सी लगती है वह यात्रा

१६ साल पहले गंगासागर से जुड़ी एक घटना तो मुझे जीवनभर याद रहेगी। इस घटना से शायद आपको भी अंदाजा हो जाएगा कि तमाम व्यवस्था के बावजूद तबतक तो बहुत कष्टसाध्य थी गंगासागर की यात्रा। १३ जनवरी १९९४ की रात में आमतीर्थयात्रियों की तरह कोलकाता के दमदम कैंट इलाके से गंगासागर जाने वाली एक बस से हम सात लोग रवाना हुए। मैं, मेरी मां, मेरे मित्र अनिल त्रिवेदी व उनकी मां, मेरे मित्र अभय सिंह उनकी मां व पत्नी सभी बेहद उत्साहित से इस यात्रा की शुरुआत से। मगर यात्रा के मध्य से ही कष्ट के संकेत मिलने लगे थे। रात दो बजे बस जब हारवुड़ प्वाइंट की तरफ बढ़ रही थी तभी हमारी बस को पुलिसवालों के निर्देश पर नामखाना की तरफ मोड़ दिया गया। आपको बता दें कि हारवुड प्वाइंट ही वह जगह है जहां से गंगासागर जाना सुरक्षित और आसान है। इसी हारवुड प्वाइंट से ही सागरद्वीप के लिए पुल बनाए जाने की बात कही जा रही है। ममता बनर्जी ने तो इस पुल के बनवाने का वायदा भी किया है। नामखाना से गंगासागर का रास्ता खतरनाक माना जाता है। लांच जब नामखाना से सागरद्वीप की ओर बढ़ता है तो घंटों दूर-दूर तक सिर्फ अथाह सागर दिखता है। हिंदमहासागर के पास से गुजरते हुए रोमाच के साथ भय भी लगता है।

बहरहाल हमारी बस नामखाना तो पहुंच नहीं सकी। लापरवाही से ज्यादा तीर्थयात्रियों को इस तरफ भेज देने से बस ने हमें काफी हगले उतार दिया। तब सुबह के चार बजे थे। तीन बूढ़ी माताओं के साथ हम भी लांच पकड़ने के लिए कतारबद्ध हो गए। सोचे थे कि घंटे भर में लाच मिल जाएगी। मगर हमारा अंदाजा गलत निकला। शौच, दातून, नाश्ता की तो सोच भी नहीं सकते थे। खड़े-खड़े बुरी तरह से थक गए। हमारा धैर्य भी जवाब दे गया था। लांच तक पहुंचने तक ११ बज गए। नजदीक हुंचे तो देखा कि जमीन से करीब पंद्रह फुट उंची सीढ़ी पर चढ़कर लांच पर जाना होगा। बहरहाल मैं सबसे पीछे रहकर अपने मित्रों अनिलजी व अभयजी के साथ अपनी व उनकी माताओं को लांच पर चढ़ने में मदद की। सभी ऊपर चढ़ चुके थे अब सिर्फ मैं बाकी था और मेरे पीछे भारी भीड़ धक्का-मुक्की कर रही थी। जल्दी से सीढ़ियां चढ़ रहा था। जब आखिरी सिरे पर था तभी पार फिसल गया और मैं नीचे गिरने ही वाला थी तभी मुझे पकड़ने के लिए उपर खड़े अभय सिंह ने मेरा दाहिना हाथ पकड़ लिया। दो मिनट के लिए मेरे हाथ पैर सुन्न हो गए। बहरहाल अभयजी व दूसरे लोगों ने मुझे खींचकर लांच पर चढ़ा लिया। मैं इतना डर गया था कि करीब डेढ़ घंटे तक मारे डर के कांपता रहा। सीढ़ी से गिरने का वह दृश्य आज भी जब मेरे आंखों के सामने आता है तो मेरी रुह कांप जाती है। दरअसल नामखाना में लांच पर चढ़ने के लिए जेटी ही नहीं थी। ज्वार खत्म होने के बाद लांच पर चढ़ना सामान्य लोगों के लिए बेहद खतरनाक हो जाता है। समुद्र में जब ज्वार होता है तो पानी १०-१५ मीटर ऊंचा होकर करार तक चला जाता है। उस समय तो आप लांच पर आसानी से चढ़ सकते हैं मगर भाटा होने पर लांच तट से काफी दूर ही रह जाता है जहां से लांच पर चढ़ने के लिए सीढ़ी लगानी पड़ती है। अब ऐसी अव्यवस्था वाली जगह पर प्रशासन ने भारी तादाद में तीर्थयात्रियों को भेज दिया था। इसके ठीक विपरीत हारवुड प्वाइंट पर बहुत जेटी बनीं हैं जहां से लांच पर जाना आसान होता हैं। इसके अलावा हारवुड प्वाइंट में नौसेना के तटरक्षक होते हैं। इस लिए भी भय की कोई बात नहीं होती। नामखाना आज भी सागरद्वीप के लिए कष्टसाध्य रास्ता है।

एक और घटना आज भी मेरे मन में सिहरन पैदा करती रहती है। दरअसल जिस लांच से हम सागरद्वीप पहुंचे थे, वह मां अभया लांच थी। यहीं लांच रात को लौटते वक्त दुर्घनाग्रस्त हो गया। नामखाना के रास्ते पर सागर में चलने वाले इस रूट पर रात में लांच चलाने के कोई माकूल इंतजाम नहीं थे। फिर तो दुर्घटना होनी ही थी। रात में सागरद्वीप से तीर्थयात्रियों को लेकर वहीं मां अभया लांच लौट रही थी। अंधेरा और सिगनल का सही इंतजाम नहीं होने के कारण सागरद्वीप की ओर जारही एक दूसरी लांच ने मां अभया लांच को टक्कर मार दी। मां अभया के दो टुकड़े हो गए। इस भयानक हादसे में मां अभया पर सवार ज्यादातर तीर्थयात्रियों की मौत हो गई। इस इलाके में निगरानी का कोई इंतजाम नहीं होने किसी को बचाना संभव नहीं था। यह हादसा अगर हारवुड प्वाइंट पर होता तो नौसेना के तटरक्षक ज्यादातर को बचा लेते। अव्वल तो यह है कि हारवुड इलाके में हादसा होता ही नहीं। सवाल यह उठता है कि जहां सुरक्षा के इतजाम नहीं वहां से इतनी भारी तादाद में तीर्थयात्रियों को प्रशासन भेजता ही क्यों है ?

हमें जब इस घटना की सूचना सुबह सागरद्वीप में मिली तो हमें भी काठ मार गया। अगर हमारे साथ ऐसा होता हम क्या करते ? शाम को हम भी लौटने की योजना बना रहे थे। मगर बसवालों की वजह से सुबह जाना तय किया था। अगर रात में लौटते तो हम भी उसी मां अभया में होते जिसकी सागर में जलसमाधि बन गई। हम बच गए मगर सागरद्वीप की वह यात्रा एक दुःस्वप्न की तरह लगती है।

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