Friday, 27 April 2012

सेक्स पर बदलनी होंगी कई धारणाएं

 ​ सेक्स पर पूरी दुनिया में हो रहे रिसर्च ने कई धारणाओं को तोड़ने पर मजबूर कर दिया है। हम पहले सुनते थे कि बांग्लादेश या फिर भारत के पश्चिम बंगाल में १३-१४ साल की ( उत्तर भारत के मुकाबले काफी कम उम्र में ही ) लड़कियों को मासिक स्राव होने लगता है। अब नए रिसर्च ने साबित कर दिया है कि पूरी दुनिया में मासिक स्राव की उम्र दर न सिर्फ घट गई है बल्कि वह १३ से १० साल में पहुंच गई है। नए रिसर्च के अनुसार भारतीय लड़कियां 10 साल की उम्र में ही जवानी की दहलीज पर पहुंच जा रही हैं। उनके अंदर फिजिकल, हार्मोनल और सेक्शुअल बदलाव अब 2 साल पहले हो जा रहा है। पहले 12-13 साल की उम्र में लड़कियां बड़ी होती थीं। यह ट्रेंड सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में देखा जा रहा है। बुधवार यानी २५ अप्रैल को सभी अखबारों में छपी एक स्टडी के मुताबिक, खाने-पीने और लाइफ स्टाइल में हो रहे बदलाव के चलते लड़कियों का यौवन वक्त से पहले आ जा रहा है। इस बदलाव से जोखिम बढ़ गया है। स्टडी को अंजाम देने वाले प्रफेसर सुसान और जॉर्ज पैटन कहते हैं, 'स्टडी से यह पता चला है कि तरुणाई का पहले आ जाना एक अहम शारीरिक घटना है। इसका हेल्थ पर खतरनाक असर हो सकता है। इससे भविष्य में मेंटल डिसऑर्डर जैसी गंभीर बीमारियां पैदा हो सकती हैं।' लाइफ स्टाइल और खाने-पीने की आदतों में आए बदलाव ने इसे बढ़ावा दिया है। पहले कहा जाता था कि 13 साल की उम्र में लड़कियों से एमसी के बारे में बात करें और उन्हें सही सलाह दें। लेकिन अब हम उन्हें 10 साल पर इस तरह की सलाह देने को कहते हैं।'​
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मर्दों की मर्दानगी खतरे में

एक और रिसर्च ने भी दुनिया भर के मर्दों में खौफ पैदा कर दिया है। एक अलग किए गए अध्ययन के मुताबिक मर्दों के स्पर्म काउंट में तेजी से गिरावट आ रही है। पिछले 50 साल में इसमें 50 पर्सेंट तक गिरावट दर्ज की गई है। अर्थात दुनिया भर के मर्दों की मर्दानगी खतरे में है। संभव है कि अगले 40-50 सालों में दुनिया भर के सभी मर्द नपुंसक हो जाएं। वजह है बढ़ता तनाव, मोटापा और पलूशन।

भारतीयों के लिए रिप्रॉडक्टिव टेक्नीक गाइडलाइंस पर काम करने वाले डॉक्टर पी. एम. भार्गव के मुताबिक स्पर्म में आ रही यह गिरावट पश्चिम देशों में 90 के मध्य में नोटिस की गई थी। भारत के जाने - माने साइंटिस्ट भार्गव का कहना है कि भारत में कुछ डॉक्टरों का मानना है कि स्पर्म में स्थानीय स्तर पर भी गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों में की गई स्टडी बताती है कि स्पर्म काउंट में हर साल 2 प्रतिशत की दर से गिरावट आ रही है। अगर यही हाल रहा तो अगले 40-50 सालों में दुनिया में सभी नपुंसक हो जाएंगे।उनके मुताबिक कुछ साल पहले स्कॉटलैंड में साढ़े सात हजार लोगों पर एक स्टडी गई गई थी। इसमें 1989 और 2002 में औसत स्पर्म काउंट में 30 पर्सेंट की गिरावट दर्ज की गई। कोपेनहेगन में की गई स्टडी में इसकी वजह अल्कोहल, स्मोकिंग और बढ़ते मोटापे को बताया गया। भार्गव के मुताबिक रोजमर्रा की इस्तेमाल होने वाली चीजों जैसे बाल्टी आदि से फीमेल हार्मोन ऐस्ट्रोजन जैसे केमिकल निकलते हैं। उनके मुताबिक स्पर्म में गिरावट की वजह यह केमिकल भी हो सकता है। हालांकि इससे कई लोग इत्तफाक नहीं रखते हैं।

सेक्स के मामले में लड़कों से आगे निकल गई लड़कियां​

भारत जैसे विकासशील देशों में 15 से 19 के आयु वर्ग की लड़कियां सेक्स के मामले में लड़कों से आगे निकल गई हैं। भारत में 2005 से 2010 के बीच 3 फीसदी लड़के जहां 15 साल की उम्र से पहले ही सेक्स कर चुके हैं, वहीं तकरीबन 8 फीसदी लड़कियां इसी उम्र में सेक्स कर चुकी हैं। यूनिसेफ द्वारा प्रकाशित 'किशोरों पर ग्लोबल रिपोर्ट कार्ड 2012 में यह खुलासा हुआ है। 15-19 वर्ष के विकासशील देशों (चीन को छोड़कर) में किशोरावस्था में ही 5 फीसदी लड़कियां 15 वर्ष की उम्र से पहले ही सेक्स कर चुकी होती है। कम उम्र में ही सेक्स के कारण प्रसव और एचआईवी संक्रमण के खतरे में भी वृद्धि हुई है।

46 हजार को एचआईवी​
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​ भारत में 35 फीसदी किशोरों और 19 फीसदी किशोरियों को ही एचआईवी के बारे में संपूर्ण जानकारी है जो कि बहुत कम है। 2010 भारत में 49000 किशोरों और 46000 किशोरियां एचआई से संक्रमित है। दुनिया भर में 10 से उन्नीस वर्ष के लगभग 22 लाख युवा एचआईवी के साथ जी रहे हैं जिसमें 13 लाख और 870000 किशोर लड़के और लड़कियों को अपनी वर्तमान स्थिति के बारे में भी अंदाजा नहीं है।

प्रसव दर भी ‍अधिक​
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​ भारतीय किशोरियों में प्रसव दर भी बहुत अधिक है। ऐसी 20-24 साल की महिलाओं की संख्‍या 20 फीसदी है जिन्होंने 18 साल से पहले ही बच्चे को जन्म दिया। दुनियाभर में से बांग्लादेश, भारत और नाइजीरिया में हर तीन में से एक किशोरी कम उम्र में बच्चे को जन्म दे रही है। यूनिसेफ ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट घोषित किया कि दुनिया में हर साल 15-19 साल की लगभग 1 करोड़ 60 लाख लड़कियां प्रसव से गुजरती है। यह आंकड़ा कुल 11 फीसदी प्रसव में से है। चीन को छोड़कर विकासशील देशों में 15-19 साल की लड़कियों में लगभग हर चार में से एक शादीशुदा है। दक्षिण एशिया में 15-19 साल की लड़की शादीशुदा है। दक्षिण एशिया क्षेत्र में 15-19 साल तक की शादीशुदा लड़कियों का अनुपात बहुत अधिक है।

Wednesday, 25 April 2012

रात भर जागने या कम सोने वालों को डायबिटीज का खतरा ज्यादा

  खूब खाने और सोने वाले लोगों के मोटे होने की बात कही जाती थी अब पता चला है कम सोने और रात में जगने वाले लोग ना सिर्फ मोटे होते हैं बल्कि डायबिटिज के शिकार भी। रात की पालियों में काम करने वाले और लगातार विमान में सफर करने वालों को डायबिटिज का ज्यादा खतरा है। अमेरिका में हुई एक रिसर्च से इस बात का पता चला है। बोस्टन के ब्रिघम एंड वीमेन्स हॉस्पीटल का कहना है कि कम सोना या अनियमित तरीके से सोना किसी भी इंसान के सर्केडियन रिदम या बायलॉजिकल क्लॉक बिगाड़ देता हैं।

इसकी वजह से पेनक्रियास से निकलने वाली इंसुलिन की मात्रा पर असर पड़ता है और खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। खून में शुगर की बढ़ी मात्रा डायबिटिज का कारण बन सकती है। रिसर्च में शामिल लोगों के मेटाबॉलिज्म की दर में भी फर्क देखा गया, यह कम हो गया। कम मेटाबोलिज्म से मोटापे की समस्या भी हो सकती है।

रिसर्च करने वाली टीम का नेतृत्व न्यूरोसाइंटिस्ट और नींद पर रिसर्च कर रहे ओरफ्यू बक्सटॉन कर रहे थे। इस टीम ने अस्पताल में 21 लोगों पर छह हफ्ते तक निगाह बनाए रखी। इन लोगों ने इस दौरान इस बात की छानबीन की कि ये लोग कब और कितनी देर तक सोते हैं, इसके साथ ही उन्होंने खाया क्या है।

शुरुआत में रिसर्च करने वालों ने इन लोगों को हर रात 10 घंटे तक सोने दिया। बाद में हर 24 घंटे के लिए इसे घटा कर 5-6 घंटे कर दिया गया और वो भी दिन और रात के अलग अलग समय में बांट कर। तीन हफ्ते तक इस तरह से चला।

नींद में कमी और सर्केडियन रिदम की गड़बड़ी वाले मरीजों की मेटाबॉलिज्म की दर में कमी का साफ मतलब है कि निष्क्रिय रहने के दौरान उनके शरीर में सामान्य की तुलना में कम कैलोरी खर्च हुई। रिसर्च करने वालों के मुताबिक यह कमी जितनी है उसके कारण एक साल में छह किलो तक वजन बढ़ सकता है।

डॉक्टरों ने यह भी देखा कि इन लोगों के खून में खाना खाने के बाद शुगर की मात्रा भी बढ़ गई थी। जाहिर है कि इसका सीधा संबंध पेंक्रियाज से निकलने वाले इंसुलिन से है। कुछ मामलों में तो शुगर की मात्रा डायबिटिज के ठीक पहले मौजूद रहने वाली मात्रा के करीब पहुंच गई थी।

रिसर्च के आखिरी चरण में नौ दिनों तक जब इन लोगों को सामान्य तरीके से सोने दिया गया तो सारी गड़बड़ियां खुद ही ठीक हो गईं। यह रिसर्च साइंस जरनल में छपी है इसके साथ ही पहले भी कई रिसर्च में यह बात सामने आ चुकी है कि रात को काम करने वाले लोगों के डायबिटिज का शिकार होने की आशंका बहुत ज्यादा होती है।

बक्सटॉन का कहना है, 'सबूत सामने है कि पर्याप्त रूप से सोना सेहत के लिए बेहद जरूरी है और पूरी तरह से इसके कारगर होने के लिए पहली कोशिश रात में सोने की होनी चाहिए।' तो स्वस्थ और सेहतमंद रहना है तो घोड़े बेच कर सोइये और वो भी रात में। ( साभार--http://www.dw.de/dw/article/0,,15904796,00.html)

Monday, 19 March 2012

'हिंदुओं के प्रति द्वेष बढ़ाती किताबें'

   अमरीकी सरकार के एक आयोग के अध्ययन के मुताबिक़ पाकिस्तानी स्कूलों की पाठ्यपुस्तकें हिंदू और बाक़ी धार्मिक अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ पक्षपात और असहिष्णुता की भावना को बढ़ावा देती हैं।
इस अध्ययन में ये भी सामने आया है कि ज़्यादातर पाकिस्तानी शिक्षक ग़ैर-मुस्लिमों को ‘इस्लाम का दुश्मन’ मानते हैं। अमरीकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग का ये अध्ययन जारी हुआ है। समाचार एजेंसी एपी के अनुसार आयोग के अध्यक्ष लियोनार्ड लियो का कहना था, “इस तरह का भेदभाव सिखाने से ये संभावना बढ़ जाती है कि पाकिस्तान में हिंसक धार्मिक चरमपंथ बढ़ता जाएगा जिससे धार्मिक स्वतंत्रता, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा कमज़ोर होती जाएगी।”

इस अध्ययन में पाकिस्तान के चार प्रांतों की पहली से 10वीं कक्षा की 100 से ज़्यादा पाठ्य पुस्तकों की समीक्षा की गई। इसके अलावा शोधकर्ताओं ने इस साल फ़रवरी में 37 पब्लिक स्कूलों के 277 छात्र और शिक्षकों और 19 मदरसों के 226 छात्र और शिक्षकों से साक्षात्कार किया। आयोग ने चेतावनी दी है कि ख़ासकर शिक्षा के क्षेत्र में धार्मिक भेदभाव से लड़ने के प्रयासों का कट्टरपंथी कड़ा विरोध करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार पाठ्य पुस्तकों में अल्पसंख्यकों, मुख्य रूप से हिंदू और कुछ हद तक ईसाइयों, का व्यवस्थित तरीक़े से नकारात्मक चित्रण पाया गया।

रिपोर्ट में कहा गया है, “पाठ्य पुस्तकों में धार्मिक अल्पसंख्यकों को अक्सर दूसरे दर्ज़े के नागरिक के रूप में पेश किया जाता है, जिन्हें उदार पाकिस्तानी मुस्लिमों ने सीमित अधिकार और सुविधाएं दी हैं और उन्हें इसके लिए शुक्रगुज़ार होना चाहिए।” रिपोर्ट में आगे लिखा है, “हिंदुओं को लगातार चरमपंथी और इस्लाम का दुश्मन बताया जाता है जिनका समाज और संस्कृति अन्याय और क्रूरता पर आधारित है जबकि इस्लाम के शांति और भाईचारे के सिद्धांत हिंदुओं की समझ से परे हैं।”

अध्य्यन में ये भी पाया गया कि पांचवी कक्षा की आधिकारिक पाठ्य पुस्तकों के मुताबिक़ हिंदू और मुसलमान एक राष्ट्र नहीं, बल्कि दो अलग-अलग राष्ट्र हैं। रिपोर्ट के मुताबिक़ किताबों में सबसे बड़े पाकिस्तानी अल्पसंख्यक गुट ईसाइयों के बारे में अलग से ज़्यादा कुछ नहीं पाया गया. लेकिन जितना कुछ भी था, उससे ईसाइयों की नकारात्मक और अपूर्ण तस्वीर ही मिलती है।” पाकिस्तान के सांस्कृतिक, सैन्य और नागरिक जीवन में हिंदू, सिख और ईसाइयों की भूमिका के बारे में पाठ्य पुस्तकों में बहुत कम वर्णन है. यानी एक युवा अल्पसंख्यक छात्र को किताबों में पढ़े-लिखे धार्मिक अल्पसंख्यकों के बहुत ज़्यादा उदाहरण नहीं मिलेंगे

अध्ययन में शोधकर्ताओं ने ये भी पाया कि पाठ्य पुस्तकें इस भावना को भी बढ़ावा देती हैं कि पाकिस्तान की इस्लामी पहचान लगातार ख़तरे में है। रिपोर्ट ये भी कहती है कि इस्लाम से जुड़े संदर्भ और बातें न सिर्फ़ धार्मिक पुस्तकों बल्कि अनिवार्य पाठ्य पुस्तकों में भी सामान्य बात है, यानि पाकिस्तानी ईसाइयों, हिंदुओं और बाक़ी अल्पसंख्यकों को इस्लाम के बारे में पढ़ाया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक़, इससे लगता है कि पाकिस्तान के संविधान का उल्लंघन हो रहा है क्योंकि पाकिस्तानी संविधान कहता है कि छात्रों को उनके धर्म के अलावा किसी और धर्म की शिक्षा नहीं मिलनी चाहिए।

शिक्षकों का रवैया
अध्ययन के मुताबिक़ पब्लिक स्कूलों के आधे से ज़्यादा शिक्षक धार्मिक अल्पसंख्यकों की नागरिकता को तो स्वीकार करते हैं लेकिन ज़्यादातर शिक्षकों का मानना है कि पाकिस्तान और मुसलमानों की रक्षा के मद्देनज़र इन्हें कोई भी महत्वपूर्ण पद नहीं दिए जाने चाहिए। हालांकि कई शिक्षकों ने माना कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के रीति-रिवाजों की इज़्ज़त करना ज़रूरी है लेकिन साथ ही ये भी पाया गया कि 80 प्रतिशत शिक्षक ग़ैर मुस्लिमों को किसी-न-किसी रूप में ‘इस्लाम का दुश्मन’ मानते हैं।

पाठ्यक्रम में बदलाव और सुधार
अध्ययन के अनुसार सरकार ने 2006 में पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए एक योजना की घोषणा की थी लेकिन ऐसा अब तक नहीं किया गया है। पाकिस्तान की नई शिक्षा नीति, 2009, के तहत इस्लाम धर्म की पढ़ाई एक अनिवार्य विषय है। लेकिन रिपोर्ट ये भी कहती है कि इस नीति में बदलाव कर अब अल्पसंख्यकों को तीसरी कक्षा से ही इस्लाम की पढ़ाई की जगह नैतिकता पर पाठ्यक्रम चुनने का विकल्प दिया गया है. इससे पहले ये विकल्प केवल नवीं और दसवीं कक्षा में ही दिया जाता है।

वहीं पाकिस्तान के ग़ैर-सरकारी संस्थानों का कहना है कि असल में इस विकल्प का कोई ख़ास मतलब नहीं है क्योंकि नैतिकता पर मौजूदा पाठ्य पुस्तकें पिछले पाठ्यक्रमों के दिशा निर्देशों पर आधारित हैं जिनमें इस्लाम के प्रति पूर्वाग्रह साफ़ हैं। साथ ही बाक़ी छात्रों से अलग-थलग पड़ने और कम अंकों के डर से अब भी अल्पसंख्यक छात्र नैतिकता की जगह इस्लाम की पढ़ाई का विषय ही चुनते हैं। इस अध्ययन पर प्रतिक्रिया के लिए पाकिस्तान के शिक्षा मंत्री से संपर्क करने की कोशिशें असफल रहीं।
साभार-बीबीसी (http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2011/11/111109_pak_curriculum_ar.shtml )

Tuesday, 13 March 2012

8 माह में शादी के मात्र 9 मुहूर्त, शुभ समय का प्रतीक है मुहूर्त

हिंदू पंचांग में इस साल शादी के मुहूर्त का टोटा है। आने वाले आठ महीने में सिर्फ 9 श्रेष्ठ मुहूर्त हैं, जिसमें फेरे लिए जा सकते हैं। मार्च, अप्रैल और जून में तीन-तीन मुहूर्त हैं। इसके बाद अक्टूबर तक कोई मुहूर्त नहीं है। फिर नवंबर, दिसंबर में विवाह किए जा सकेंगे

मीनार्क, गुरु तारा अस्त होना प्रमुख वजह
ज्योतिषी डा. दत्तात्रेय होस्कर के अनुसार होलाष्टक के कारण होली तक कोई शुभ कार्य नहीं होगा। इस महीने शादी का मुहूर्त लगातार 9, 10 व 11 मार्च को है। 14 मार्च को सूर्य मीन राशि में प्रवेश कर रहा है। इसे शास्त्रों में मीनार्क कहा जाता है। मीनार्क में सूर्य को अस्त होना माना जाता है और जब सूर्य अस्त होता है तो शादी नहीं होती। यह स्थिति 13 अप्रैल तक रहेगी। इस दौरान विवाह नहीं होगा। इसके बाद अप्रैल में 20, 24 व 30 तारीख को फेरे लिए जा सकेंगे।

3 मई को गुरु तारा अस्त होने के कारण एक भी श्रेष्ठ मुहूर्त मई में नहीं है। जून में 24, 27 व 29 तारीख को विवाह किए जा सकेंगे। जून माह में ही देवशयनी एकादशी आ रही है। इस दिन देव सो जाएंगे और चार माह बाद देवउठनी एकादशी को जागेंगे तब तक विवाह वर्जित है। इस तरह जुलाई, अगस्त, सितंबर व अक्टूबर में फेरे नहीं ले सकेंगे।
शुभ समय का प्रतीक है मुहूर्त
सात 'स' से कीजिए हर काम का शुभारंभ
 कहते हैं किसी भी वस्तु या कार्य को प्रारंभ करने में मुहूर्त देखा जाता है, जिससे मन को बड़ा सुकून मिलता है। हम कोई भी बंगला या भवन निर्मित करें या कोई व्यवसाय करने हेतु कोई सुंदर और भव्य इमारत बनाएं तो सर्वप्रथम हमें 'मुहूर्त' को प्राथमिकता देनी होगी। शुभ तिथि, वार, माह व नक्षत्रों में कोई इमारत बनाना प्रारंभ करने से न केवल किसी भी परिवार को आर्थिक, सामाजिक, मानसिक व शारीरिक फायदे मिलते हैं वरन उस परिवार के सदस्यों में सुख-शांति व स्वास्थ्य की प्राप्ति भी होती है।  यहां शुभ वार, शुभ महीना, शुभ तिथि, शुभ नक्षत्र भवन निर्मित करते समय इस प्रकार से देखे जाने चाहिए ताकि निर्विघ्न, कोई भी कार्य संपादित हो सके।

शुभ वार : सोमवार, बुधवार, बृहस्पतिवार (गुरुवार), शुक्रवार तथा शनिचर (शनिवार) सर्वाधिक शुभ दिन माने गए हैं। मंगलवार एवं रविवार को कभी भी भूमिपूजन, गृह निर्माण की शुरुआत, शिलान्यास या गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए।

शुभ माह : देशी या भारतीय पद्धति के अनुसार फाल्गुन, वैशाख एवं श्रावण महीना गृह निर्माण हेतु भूमिपूजन तथा शिलान्यास के लिए सर्वश्रेष्ठ महीने हैं, जबकि माघ, ज्येष्ठ, भाद्रपद एवं मार्गशीर्ष महीने मध्यम श्रेणी के हैं। यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि चैत्र, आषाढ़, आश्विन तथा कार्तिक मास में उपरोक्त शुभ कार्य की शुरुआत कदापि न करें। इन महीनों में गृह निर्माण प्रारंभ करने से धन, पशु एवं परिवार के सदस्यों की आयु पर असर गिरता है।

शुभ तिथि : गृह निर्माण हेतु सर्वाधिक शुभ तिथिया ये हैं - द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी एवं त्रयोदशी तिथियां, ये तिथियां सबसे ज्यादा प्रशस्त तथा प्रचलित बताई गई हैं, जबकि अष्टमी तिथि मध्यम मानी गई है। हर  महीने में तीनों रिक्ता अशुभ होती हैं। ये रिक्ता तिथियां निम्न हैं- चतुर्थी, नवमी एवं चौदस या चतुर्दशी। रिक्ता से आशय रिक्त से है, जिसे बोलचाल की भाषा में खालीपन या सूनापन लिए हुए रिक्त (खाली) तिथियां कहते हैं। अतः इन उक्त तीनों तिथियों में गृह निर्माणनिषेध है।

शुभ नक्षत्र : किसी भी शुभ महीने के रोहिणी, पुष्य, अश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपदा, स्वाति, हस्तचित्रा, रेवती, शतभिषा, धनिष्ठा सर्वाधिक उत्तम एवं पवित्र नक्षत्र हैं। गृह निर्माण या कोई भी शुभ कार्य इन नक्षत्रों में करना हितकर है। बाकी सभी नक्षत्र सामान्य नक्षत्रों की श्रेणी में आ जाते हैं।

सात 'स' और शुभता
शास्त्रानुसार (स) अथवा (श) वर्ण से शुरू होने वाले सात शुभ लक्षणों में गृहारंभ निर्मित करने से धन-धान्य व अपूर्व सुख-वैभव की निरंतर वृद्धि होती है व पारिवारिक सदस्यों का बौद्धिक, मानसिक व सामाजिक विकास होता है। सप्त साकार का यह योग है, स्वाति नक्षत्र, शनिवार का दिन, शुक्ल पक्ष, सप्तमी तिथि, शुभ योग, सिंह लग्न एवं श्रावण माह। अतः गृह निर्माण या कोई भी कार्य के शुभारंभ में मुहूर्त पर विचार कर उसे क्रियान्वित करना अत्यावश्यक है।
साभार -http://hindi.webdunia.com/religion-astrology-article/ 
 

Sunday, 19 February 2012

दुर्लभ शिवरात्रि

शिवरात्रि के दिन बन रहा दुर्लभ संयोग
20 फरवरी को महाशिवरात्रि 65 वर्ष पश्चात पंचांग व ग्रहों के दुर्लभ संयोग के साथ आ रही है। इस दिन वार, तिथि, नक्षत्र, योग, करण एवं ग्रहों पर शिव का प्रभुत्व रहेगा। ऐसा संयोग 'शिव संयोग' कहलाता है।

शिव महापुराण के अनुसार जब-जब ग्रहों के परिभ्रमण में पंचांग एवं ग्रहों का संयोग राशि तथा नक्षत्र के आधार पर एक जैसा बनता है, तो इसे शिव संयोग कहते हैं। इस शिवरात्रि पर ऐसा ही विशिष्ट संयोग बन रहा है, जो धर्म, ध्यान व अनुष्ठान के लिए विशेष पुण्य फलदायी है।

इस दिन क्रमशः भगवान गणेश, लक्ष्मी, कुबेर, चंद्रमा तथा प्रधान देव शिव का पूजन करें। अभीष्ट की प्राप्ति के लिए मध्यरात्रि में साधना व सिद्घि फलदायी रहेगी।
ऐसे बना संयोग : स्थानीय रेखांश व समय की गणना के आधार पर 20 फरवरी को दिन सोमवार, तिथि चतुर्दशी, श्रवण नक्षत्र, बारयान योग तथा सिद्घि योग है। नवग्रहों के अंतर्गत चंद्रमा मकर, सूर्य तथा बुध कुंभ एवं शनि तुला राशि में परिभ्रमण कर रहे हैं। पंचांग व ग्रहों की यह स्थिति 21 फरवरी 1955 को बनी थी।

क्या है विशेष : सोमवार के दिन के स्वामी शिव है, चतुर्दशी के स्वामी भी शिव है, सिद्घि योगाः के साथ शनि का तुला राशि में परिभ्रमण, श्रवण नक्षत्र की उपस्थिति, वरियान योग का मध्यरात्रि काल शिवरात्रि पर विशेष महत्व रखता है। इसमें मंत्र दीक्षा, इष्ट मंत्र सिद्धि, श्री यंत्र सिद्धि, रुद्र यंत्र सिद्धि, बगलामुखी यंत्र सिद्धि आदि मध्यरात्रि में की जाती है।
शिव चालीसा
।।दोहा।
श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥


जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन छार लगाये॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥
मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥
कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शम्भु सहाई॥
ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥
कहे अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

॥दोहा
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥
http://hindi.webdunia.com/religion-astrology-article

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