Tuesday, 17 March 2009

वरुण गांधी की भड़ास

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार वरुण गांधी को चुनाव प्रचार के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोप में नोटिस जारी किया गया है.चुनाव आयोग ने वरुण गांधी को नोटिस जारी कर उनपर लगाए गए भड़काऊ भाषण देने और सदभाव बिगाड़ने के कथित आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगा है.पीलीभीत से वरुण गांधी की माँ, मेनका गांधी चुनाव लड़ती और जीतती रही हैं पर इसबार इस सीट पर वरुण गांधी किस्मत आजमाने जा रहे हैं.वरुण ने इस सिलसिले में क्षेत्र के लोगों से मिलने और चुनाव के लिए प्रचार करने का काम भी शुरू कर दिया है.पर अब वरुण अपने भाषणों और बयानों को लेकर विवादों में घिरते नज़र आ रहे हैं.

उन्होंने हाल ही में एक चुनावी सभा में कहा, "ये हाथ नहीं है, ये कमल की ताकत है जो किसी का सिर कलम कर सकता है." मैं इसे बेवकूफ़ीपूर्ण मानता हूँ कि कोई अगर आपके गाल पर एक चांटा मारे तो आप दूसरा गाल आगे कर दें. उस..... के हाथ काट दो ताकि वो किसी दूसरे पर भी हाथ न उठा सके टेलीविज़न चैनलों पर दिखाई जा रही वीडियो क्लिप में वरुण गांधी कह रहे हैं, "अगर कोई हिंदुओं की ओर हाथ बढ़ाता है या फिर ये सोचता हो कि हिंदू नेतृत्वविहीन हैं तो मैं गीता की कसम खाकर कहता हूँ कि मैं उस हाथ को काट डालूंगा."
अपने भाषणों में वरुण ने महात्मा गांधी की एक विश्व प्रसिद्ध अहिंसावादी टिप्पणी को भी ग़लत करार दिया है.उन्होंने कहा, "मैं इसे बेवकूफ़ीपूर्ण मानता हूँ कि कोई अगर आपके गाल पर एक चांटा मारे तो आप दूसरा गाल आगे कर दें. उस..... के हाथ काट दो ताकि वो किसी दूसरे पर भी हाथ न उठा सके." भाषणों में वरुण मुस्लिम नामों की हंसी उड़ाते और लादेन को पकड़ने का दावा करते भी नज़र आए.उनके भाषण के कुछ अंशों को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस जारी किया है. हालाँकि वरुण गांधी ने पीलीभीत के ज़िलाधिकारी को दिए अपने जवाब में भड़काऊ भाषण देने के आरोप को ग़लत बताया है और इससे इनकार किया है.पर वरुण के भाषण की अब उनकी पार्टी में भी आलोचना हो रही है.
भाजपा नेता मुख़्तार अब्बास नक़वी ने वरुण की विवादित टिप्पणियों के लिए आलोचना की है. उन्होंने कहा कि वरुण ने जो कहा, वो भाजपा की परंपरागत संस्कृति नहीं हैं.
उधर कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "वो एक ऐसी पार्टी से जुड़े हैं जिसकी अल्पसंख्यक विरोधी विचारधारा है." (साभार-बीबीसी हिंदी)

Tuesday, 10 March 2009

देखी हमरी काशी की होली !


आप सभी को होली की शुभकामनाएं। होली आते ही बरबस काशी के वो दिन याद आ जाते हैं जब भांग के नशे में धुत्त अस्सी पर हो रहे कवि सम्मेलन में झुंड बनाकर हर-हर महादेव का जयकारा लगाते हुए घूमते रहते थे। शाम को अस्सी के कवि सम्मेलन में वैसे तो सभी भद्र ही जुटते हैं मगर उस दिन किसी को मस्ती की तथाकथित अभद्रता से कोई भी परहेज नहीं होता। उस रोज के अभद्र शब्द अस्सी के कवि सम्मेलन के दिन शुभ माने जाते हैं। तभी तो भीड़ में कहीं दिखाई दे गए अपने परिचितों का सम्मान भी गाली से ही हम भी करते थे। मसलन अबे भोसड़ी के कहां घुस गया था जो अब दिखाई दे रहा है। उधर से जो जवाब आता था वह मैं .यहां मैं नहीं लिख रहा हूं मगर आप तो समझदार हैं, समझ ही गए होंगे। इस तरह के वाकए कवि सम्मेलन में होना आम बात थी। चलिए कुछ घटनाओं का जिक्र करते है जो आज भी जेहन में अपने अल्हणपन और काशी की होली की रंगीनियों को ताजा कर देते हैं। बुरा न मानो होली है की तर्ज पर सुनिए काशी की होली के मौके पर छात्रावास के दिन और अस्सी त्रिमुहानी पर हर साल होने वाले कवि सम्मेलन की आपबीती कथा।​ उस साल घरवालों से बीस बहाने बनाकर, पढ़ाई का वास्ता देकर काशी की होली और अस्सी का कवि सम्मेलन देखने छात्रावास में ही रूक गए। खाने का इंतजाम भी शहर में रह रहे एक मित्र के घर कर लिया था। अब तो बिंदास भी हो गए थे क्यों कि यहां घरवालों का खौफ भी नहीं रह गया था।

पहले अस्सी की एक घटना। मैं और मेरे कुछ दोस्त कवि सम्मेलन में हाजिर होने से पहले भांग जुटाने में इस कदर मसगूल हो गए कि समय का खयाल ही नहीं रहा। देर होते देख जो भंग मिली उसे चढ़ाई और कूच कर दिए अस्सी की ओर। पहुंचे तो मजमा जमा हुआ था। मंच पर उस वक्त के हीरो कवि चकाचक बनारसी रंग जमा रहे थे। उनकी कविताए मैं यहां पेश नहीं करूंगा क्यों कि वह सब अस्सी पर उनके मुखारविंद से भांग के नशे में ही सुनना श्रेयस्कर होगा। मेरी बातें सुनकर अगर आपकी तबियत फड़क रही है तो हुजूर आप खुद ही कभी होली पर अस्सी पहुंच जाइएगा। फिलहाल मेरी आपबीती सुनिए क्यों कि मैं भी सुनाने के लिए फड़फड़ा ही रहा हूं।​
​ तो हुआ यह कि एक मेरे मित्र अस्सी पर ही रहते थे। उन्होंने हम लोगों को साक्षात देख लिया। गाली दी और पकड़ ले गए भंग पिलाने अपने घर। दूध में मिली भंग हम लोगों ने बेहिसाब चढ़ा ली। अब सबकुछ और रंगीन नजर आने लगा था। एक के दो दिखते और कोई कुछ बोलता तो समझ में आता नहीं, उल्टे मूर्खों की तरह बेहिसाब हंसते रहते थे। बहरहाल इसी दशा में अपने दोस्त को होली की शुभकामनाएं और धन्यवाद कहकर फिर आ गए कवि सम्मेलन के मजमे में।​
​ यहीं वह घटना घटती है जो आज तक याद है। कुछ अश्लील है इसलिए बुरा न मानो होली है कि तर्ज पर सुनिए आगे की कथा।​

भीड़ के बीचोंबीच तन्मय होकर होली की चुटीली कविताएं सुन रहे थे तभी कुछ हुल्लड़बाजों का एक झुंड हमारे करीब से हर-हर महादेव करते हुए गुजरा। उनके हाथों में कुछ पुस्तिकाएं थीं। होली से ही संबंधित थीं। इच्छा हुई कि एक मैं भी ले लूं। अपने गांव जाकर दोस्तों को दिखाउंगा। बहरहाल एक पुस्तिका मांग बैठा। उसने पुस्तिका हाथ में थमाकर पैसे मांगे। सरसरी तौर पर उसपर लिखे दाम पांच रुपए मैंने उसे पकड़ा दिए। पैसे लेकर उसने कहा- आपने पूरा दाम नहीं दिया। मैंने कहा- दे तो दिया हूं। रहस्यमय मुस्कराहट के साथ वह बोला-- फिर से देखिए। इस बार दाम ठीक से पढ़ा। लिखा था-- पांच रुपए और पांच गांड़। वह खिलखिलाकर हंस पड़ा मगर मुझे कुछ समझ में नही आया कि क्या बोलूं। कुछ बोलता इसके पहले उसने कहा- अभी रहने दीजिए फिर कभी फुरसत में ले लूंगा। और वह फिर हर-हर महादेव बोलते हुए आगे बढ़ गया। बहरहाल वह फिर साक्षात तो क्या सपने में भी नहीं आया मगर होली का यह वाकया और वह हुल्लड़बाज आज भी मुझे याद है।​​​


अब छात्रावासों की गाली की एक परंपरा की वह कथा सुनिए जिसमें विभिन्न छात्रावासों के छात्र रोज शाम को खाना खाने के बाद छत पर या उस बाल्कनी पर जुटते थे जहां से दूसरा छात्रावास दिखता था। इसके बाद शुरू होता था गालियों का दौर। मेडिकल के छात्र कला संकाय के छात्रों को ललकारते थे-- अबे चपरासियों कहां छुप गए ? तो इधर से कला संकाय का हुजूम चिल्लाता था-- अबे जमादारों-- हरामियों --- नींद नहीं आ रही है क्या ? अभी कोई जवाब उनका आता तबतक तीसरे छात्रावास से गाली गूंजती-- अरे मादर----- क्यों लड़ रहे हो ? अब तीन चार छात्रावासों से एक साथ गालियों का जो दौर चलता तो देर रात तक थमने का नाम नहीं लेता। अगर थोड़ा सुनसान हो भी जाता तो किसी छात्रावास से अकेले ही कोई दूसरे छात्रावास को ललकार देता। फिर क्या था, दुबारा शुरू हो जाता गालियों का दौर। इधर छात्रावासों के सामने की सड़क से गुजर रहे लोग भी होली की गालियों की बौछार से अछूते नही बचते थे। यह सब रोजाना नियमित कुछ देर चलता और फिर स्वतः थम जाता। होली आगमन का यह नियमित मनोरंजन और देर रात तक गूंजती गालियां होली आते ही फिर जेहन में गूंजने लगती हैं।​
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​ इन सब के बीच खासियत यह थी कहीं से कोई सद्भावना का माहौल गड़बड़ नहीं होने पाता था। सुबह सभी ऐसे मिलते थे जैसे रात का नजारा उनके लिए सपना था। मगर रात होते ही वह कार्यक्रम फिर चालू हो जाता था। जिन डाक्टर मित्रों को हम रात में गाली देते थे सुबह वही हमारे किसी बीमार साथी का अपना सगा समझकर इलाज करते थे। हम सिर्फ होली मनाते और आपस में ऐसा मनोरंजन करके अपना छात्रावासीय एकाकीपन दूर कर लेते थे। आज तो लोगों में वह सद्भाव ही नही रहा। कई लोगों को यह कहते सुना कि क्या होली मनाएं, लोग अब उतने अच्छे नहीं रहे। आखिर वह कौन सी कड़ी है जो लगातार टूटती ही जा रही है और होली जैसे भाईचारे के त्योहार को फीका करती जा रही है।​
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Tuesday, 24 February 2009

२२ नकली विश्वविद्यालयों से सावधान

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने देशभर के २२ जाली विश्वविद्यालयों की सूची जारी की है। इनमें सबसे ज्यादा उत्तरप्रदेश में नौ और राजधानी दिल्ली में छह हैं। इसके बाद बिहार, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में एक-एक हैं। इनकी सूची देखिए---- FakeUniversities in Delhi

* Varanaseya Sanskrit Vishwavidyalaya, Varanasi, Jagatpuri (Delhi)
* Indian Institute of Science and Engineering (New Delhi)
* Commercial University Ltd, Daryaganj (Delhi)
* United Nations University (Delhi)
* Vocational University (Delhi)
* ADR-Centric Juridical University, Rajendra Place (New Delhi).

Fake Universities in Uttar Pradesh (UP)


* Mahila Gram Vidyapith/Vishwavidyalaya Prayag (Allahabad)
* Indian Education Council of UP (Lucknow)
* Gandhi Hindi Vidyapith, Prayag (Allahabad)
* National University of Electro Complex Homeopathy (Kanpur)
* Netaji Subhash Chandra Bose University (Open University), Achaltal (Aligarh)
* Vishwavidyalaya, Kosi Kalan (Mathura)
* Maharana Pratap Shiksha Niketan Vishwavidyalaya (Pratapgarh)
* Indraprastha Shiksha Parishad, Institutional Area Khoda, Makanpur (Noida)
* Gurukul Vishwavidyala (Vridanvan).

Fake Universities - Rest of India


* Maithili University/Vishwavidyalaya, Darbhanga (Bihar)
* Badaganvi Sarkar World Open University Education Society, Gokak, Belgaum (Karnataka)
* St Johns University, Kishanattam (Kerala)
* Kesarwani Vidyapith, Jabalpur (Madhya Pradesh)
* Raja Arabic University, Nagpur (Maharashtra)
* DDB Sanskrit University, Putur, Trichi (Tamil Nadu)
* Indian Institute of Alternative Medicine (Kolkata)​
​​ इस लिंक से भी देख सकते हैं इन जाली विश्वविद्यालयों की सूची।
​​ http://www.ugc.ac.in/inside/fakealerts.html​​

​ यूजीसी ने यह सूची जारी करके छात्रों को गुमराह होने से बचाया मगर इससे भी बड़ा संकट प्रोफेशनल शिक्षा ( इंजीनियरिंग, प्रबंधन या अन्य छोटे बड़े पेशेवर शिक्षण ) के लिए कुकुरमुत्ते की तरह उग आए कालेजों की हकीकत कौन बताएगा। इन्हें भी तथाकथित मान्यता कौन देता है। इन संस्थानों में भारी भरकम फीस पढ़ाई और नौकरी देने के नाम पर वसूली जाती है। बेहतर होता अगर इन कालेजों को मान्यता देने वाले संस्थान भी मानदंड पर खरे न उतरने वाले कालेजों की सूची जारी करते। यह खोजबीन करते कि मान्यता हासिल करने के बाद यहां का स्तर क्या व्यवसायिक शिक्षा देने के लायक है भी या नहीं। तमाम प्राइवेट स्कूल व कालेज में स्तरीय शिक्षण स्टाफ नहीं रखे जाते। कामचलाउ लोगों से कालेज या स्कूल का स्तर क्या होगा यह तो सभी जानते हैं। कहने का अर्थ सिर्फ यह है कि जब से प्राइवेट शिक्षण संस्थानों को थोक के भाव में मान्यताएं बांटी जाने लगी हैं तब से इस भीड़ में यह जानना भी मुश्किल हो गया है कि किस कालेज को किस श्रेणी का माना जाए जबकि फीस सभी भारीभरकम ही वसूलते हैं। इनसे बचने की सूचना भी अगर दी जाती तो शायद इन शिक्षा माफियाओं के फ्राड से भी लोग जरूर बच जाते। यूजीसी और मान्यता प्रदान करने वाली संस्थाओं को यह जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
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Tuesday, 17 February 2009

बाबा रामदेव का देश की जनता से वादा

योगाचार्य स्वामी रामदेव ने स्पष्ट कहा है कि वे सक्रिय राजनीति में नहीं आएँगे, लेकिन इससे
बाहर रहकर देश की सत्ता राष्ट्रवादी, पराक्रमी, पारदर्शी, दूरदर्शी,
मानवतावादी, अध्यात्मवादी व विनयशील देशभक्त एवं ईमानदार लोगों के हाथों
सौंपकर एक शक्तिशाली लोकतांत्रिक भारत बनाने का हरसंभव प्रयास करेंगे। रामदेव
ने यहाँ आगामी लोकसभा के चुनावों के संदर्भ में कहा कि देश में आज एक
विशुद्ध चिंतन की आवश्यकता है, जिससे हम सत्ता के शीर्ष में बैठे भ्रष्ट,
बेईमान और अपराधी किस्म के लोगों को सत्ता से बाहर कर देश में एक नई आजादी
ला सकें। उन्होंने कहा चुनावों में सौ प्रतिशत मतदान कर हम देश को राजनैतिक भ्रष्टाचार से
मुक्त कर सकते हैं। उनका भारत स्वाभिमान ट्रस्ट इस दिशा में कार्यरत है।
उन्होंने स्पष्ट कहा हमने विदेशी गुलामी से मुक्ति पा ली है, लेकिन शासन
के नाम पर वही शोषण, अन्याय, अत्याचार एवं भ्रष्टाचार शिखर पर है। रामदेव
ने कहा आजादी के बाद देश में कई सरकारें बदल गईं, लेकिन आज भी चरित्र,
नियम और नीतियाँ नहीं बदली हैं, जिनके कारण आज भी सत्ता के शीर्ष में
अधिकांश भ्रष्ट, बेईमान और अपराधी किस्म के लोग विराजमान हैं। श्रीराम
मंदिर के निर्माण के नाम पर राजनीतिक लाभ उठाने के संदर्भ में पूछे गए
सवाल के उत्तर में रामदेव ने कहा कि जो लोग श्रीराम मंदिर के निर्माण के
नाम पर राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं और जो लोग श्रीराम मंदिर
के निर्माण का विरोध कर रहे हैं दोनों की नीयत पर खोट है। बाबा
रामदेव ने कहा कि शक्ति एवं संपत्ति के केंद्र सत्ता के शीर्ष पर बैठे
नेताओं का चरित्र ठीक नहीं होने के कारण ही देश में भ्रष्टाचार पनप रहा
है। दुःख इस बात का है कि इस भ्रष्टाचार को पूरे देश ने आज एक शिष्टाचार
के रूप में स्वीकार कर लिया है। रामदेव ने कहा कि यह कड़वा सच है कि देश में
99 प्रतिशत से अधिक लोग ईमानदारी केसाथ जीवन व्यतीत करना चाहते हैं, लेकिन एक प्रतिशत
से कम भ्रष्ट और बेईमान लोग एवं भ्रष्ट व्यवस्था ने सौ करोड़ से अधिक जनता और देश का जीवन नरक बना
दिया है। (नई दिल्ली (भाषा), रविवार, 15 फरवरी 2009​)

Thursday, 12 February 2009

बंगाल और झारखंड के हिंदी ब्लागरों से अपील ​​

बंगाल और झारखंड के हिंदी ब्लागरों से अपील
​​
​ रांची में कोलकाता और झारखंड को हिंदी ब्लागरों का सम्मेलन २२ फरवरी को होने जा रहा है।​​
​क्या आप इसमें शामिल होना चाहते हैं। तो आप सादर आमंत्रित हैं। आयोजक की अपील व आमंत्रण भी इस मेल के साथ अटैच है। आप चाहें तो उन्हें मेल कर सकते हैं या फिर बात भी कर सकते हैं। MANDHATA SINGH ​





दोस्तो,

अभी लगभग १६ दिन पहले मैंने आप सभी को एक ईमेल करके यह निवेदन किया था कि झारखण्ड और कोलकाता के ब्लॉगर एक जगह जमा हों और इस दिशा में प्रयास हो। सभी ने इसे सकारात्मक तरीके से लिया, इसकी मुझे खुशी है। मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि डॉ॰ भारती कश्यप ने इस कार्यक्रम के आयोजन का जिम्मा लिया है। कार्यक्रम का औसत खाँका और इससे जुड़ी २-४ बातें मैंने यहाँ प्रकाशित कर रखे हैं- http://baithak.hindyugm.com/2009/02/bloggers-meet-ranchi-jharkhand-22-feb.html

ऐसे मित्र जिन्होंने पिछली बार ईमेल का जवाब नहीं दिया, वे बेशक दुबारा भी जवाब न दें, लेकिन कार्यक्रम में सम्मिलित होने की तैयारी अवश्य कर लें।

साथ ही सभी एक-एक करके अपने निजि/सामूहिक ब्लॉग पर इस आयोजन के बारे में लिखें ताकि जो सोये हैं, उन्हें भी इसके बारे में पता चले और कार्यक्रम सफल हो सके। कार्यक्रम की प्रासंगिकता-अप्रासंगिकता पर भी लिख सकते हैं। आप अपना दृष्टिकोण भी दे सकते हैं।
निवेदक-
शैलेश भारतवासी
नियंत्रक-संपादक
हिन्द-युग्म
मुझसे संपर्क ले लिए नं॰ है- 9873734046, 9454950705


धन्यवाद।

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