Friday, 17 October 2014

हर छह घंटे में मुख, गले के कैंसर के एक मरीज की मौत हो जाती है

    दिसंबर २०१३। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के इंस्टीटीयूट आप मेडिकल साइंस संस्थान का सर सुंदर लाल अस्पताल। गरीबों के लिए उत्तर पूर्वी भारत का सबसे बड़ा अस्पताल। आपरेशन थिएटर के सामने हम बेचैन थे। कैंसर के आपरेशन का अलग थिएटर। एक-एक करके आपरेशन किए जा चुके मरीजों को हमारे सामने जब ले जाया जाता तब हम उनकी दशा देखकर सिहर उठते थे। करीब पांच घंटे बाद मेरा भी नंबर आया।  बड़े भाई मदन मोहन सिंह के गले के कैंसर का आपरेशन संपन्न हो गया था। तुरन्त उन्हें लेकर इंटेंसिव केयर यूनिट की ओर लेकर भागे। साथ में डाक्टर भी थे। तीन दिन तक हम इंटेंसिव केयर यूनिट के बाहर रात दिन पड़े रहे। तीसरे दिन जब भाई की आंख खुली तो जान में जान आई। मैं और भी मानसिक तौर पर परेशान था। क्यों कि मैंने ही भाई का बीएचयू में आपरेशन और इलाज का फैसला लिया था। इसका कारण धनाभाव व पारिवारिक असयोग था। मुझे कोलकाता से बनारस जाकर भाई की जांच करानी पड़ती थी। ऐसी स्थिति में लोगों के सुझाव पर मुम्बई टाटा सेंटर ले जाकर इलाज करा पाना मेरे लिए नामुमकिन था। हालांकि जब मैं तैयैर हो गया और सबकुछ करने लगा तोे बाकी परिवार के लोग साथ खड़े होगए।
 यह मैं इसलिए बता रहा हूं कि कैंसर अगर किसी को हो जाए तो वह जीतेजी मर जाता है मगर उसके परिवार वाले भी भारी संकट में पड़ जाते हैं। अभी हाल में ही रिपोर्ट आई है कि हर छह घंटे में मुख, गले के कैंसर के एक मरीज की मौत हो जाती है। यह रिपोर्ट इस लिए भी भयावह है क्यों कि इसमें वह आंकड़े शामिल नहीं हैं जिनका पता ही नहीं चलता है। ग्रामीण इलाके और बेहद गरीब तबके के लोगों के केस तो ज्यादातर दर्ज नहीं हो पाते हैं। अंधाधुंध धूम्रपान और तंबाकू के सेवन से उत्तरपूर्वी भारत में यह महामारी बन गया है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात में यह कैंसर जानें ले रहा है। ओरल कैंसर का इलाज करने वाले डाक्टरों का दावा है कि समय रहते प्रथम चरण का पता चल जाने पर इसका सौ फीसद ईलाज संभव है मगर इसके दूसरे स्टेज में चले जाने पर मरीज चार-पांच सालों में ही दम तोड़ देता है।
    मित्रों, इससे पहले कि मेरी तरह आपको किसी अपने के कैंसर की गिरफ्त में आने का पता चले, आप सतर्क हो जाइए। बचाव ही उचित इलाज है। मैंने अपने भाई को बचा तो लिया है मगर कैंसर का खौफ अपने मन से निकाल नहीं पाया हूं। किसी मुश्किल में फंसने से पहले सतर्क हो जाइए।

ईपीएफओ यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) सुविधा की शुरुआत

ऐसे पता करें कि क्या है आपका UAN नंबर
जानिए कैसे निकाला जाता है PF का पैसा
कितने साल बाद और कब निकाल सकते हैं PF का पूरा पैसा

     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) सुविधा की शुरुआत कर दी। इसके जरिए ईपीएफओ सदस्य अपने यूनिवर्सल पीएफ अकाउंट को रियल टाइम बेसिस पर देख सकेंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने श्रम सुविधा नाम का एक वेब पोर्टल भी लॉन्च किया।
यूएएन के जरिए आप अपने अकाउंट का बैलेंस तो चेक कर ही सकते हैं साथ ही पासबुक और यूएएन कार्ड भी डाउनलोड कर सकते हैं, लेकिन बहुत सारे लोगों को अभी तक अपना यूएएन नहीं पता है। बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें यह भी नहीं पता कि उन्हें यूएएन मिला भी है या नहीं। आइए जानते हैं किस तरह से जानें कि यूएएन नंबर मिला है या नहीं और यदि मिला है तो कैसे होगा एक्टिवेट-

UAN स्टेटस पता करें 
अपना UAN स्टेटस पता करने के लिए इस लिंक http://uanmembers.epfoservices.in/check_uan_status.php पर क्लिक करें।
इसके बाद जो पेज खुलना है, उसमें मांगी गई जानकारियां भरें। इसमें राज्य का नाम, सिटी का नाम, इस्टेबलिशमेंट कोड और पीएफ अकाउंट नंबर भरना होगा और चेक स्टेटस बटन पर क्लिक करना होगा। इस पर क्लिक करते ही आपको एक मैसेज दिखेगा, जिसमें यह बताया गया होगा कि आपको यूएएन नंबर मिला है या नहीं। अगर आपको यूएएन नंबर मिल गया है तो आप इसके लिए अपनी कंपनी से पता कर सकते हैं।

कैसे करें एक्टिवेट

STEP 1- कंपनी से यूएएन पता करके आपको उसे एक्टिवेट कराना होगा। इसे एक्टिवेट कराने के लिए http://uanmembers.epfoservices.in/index.php?accesscheck=%2Fhome.php इस लिंक पर क्लिक करें। खुलने वाले नए पेज पर activate your UAN पर क्लिक करें।
STEP 2- लिंक पर क्लिक करने के बाद एक पेज खुलेगा, जिसमें यूएएन नंबर, मोबाइल नंबर, राज्य, सिटी, इस्टेबलिशमेंट और पीएफ अकाउंट नंबर डालना होता है। सारी जानकारी भरने के बाद वैरिफिकेशन कोड डालकर ‘GET PIN’ पर क्लिक करें। इस पर क्लिक करने के बाद 5 मिनट के अन्दर आपके पास एक पिन आएगा, जिसे फॉर्म में डालकर सबमिट करना होगा।
STEP 3- सबमिट करने के बाद जो विंडो खुलेगी, उसमें आपका नाम, पिता का नाम, कंपनी का नाम, यूएएन और जन्मतिथि लिखी होती है। इसमें आपको अपने यूएएन अकाउंट में लॉगिन करने के लिए एक पासवर्ड डालना होता है और साथ ही अपनी ई मेल आईडी भी डालनी होती है। इसके बाद सबमिट बटन पर क्लिक करते ही आपको एक ई मेल चला जाएगा, जिसमें एक्टिवेशन लिंक होता है। अपनी ई मेल आईडी में जाकर उस लिंक पर क्लिक करें। क्लिक करते ही ईपीएफओ की वेबसाइट का एक पेज खुलेगा, जिस पर ई मेल आईडी कन्फर्मेशन का मैसेज मिल जाएगा।

लॉगिन करें

अपने यूएएन और पासवर्ड के साथ लॉगिन करें। लॉगिन करने के लिए http://uanmembers.epfoservices.in/ इस लिंक पर क्लिक करें। यहां अपना यूएएन और पासवर्ड डालें और लॉगिन बटन पर क्लिक करें। क्लिक करते ही आपके सामने एक पेज खुल जाएगा, जो आपके अकाउंट का पेज होता है।
अपने अकाउंट में आ जाने के बाद आप अपना यूएएन कार्ड और पासबुक डाउनलोड कर सकते हैं। पास बुक के जरिए आप देख सकते हैं कि आपके पीएफ अकाउंट में कितने पैसे हैं। साथ ही इसमें आपकी मेंबर आईडी और इस्टेबलिशमेंट कोड भी लिखा होता है। इससे आप मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी और पासवर्ड भी बदल सकते हैं।

ट्रांसफर क्लेम

फिलहाल ईपीएफओ की वेबसाइट पर यह टैब एक्टिवेट नहीं है, जिसे जल्द ही एक्टिवेट किया जाएगा।

 जानिए कैसे निकाला जाता है PF का पैसा
पीएफ हर कर्मचारी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण चीज है, क्योंकि इस पर अच्छा ब्याज तो मिलता ही है, साथ ही इनकम टैक्स में भी छूट मिलती है और भविष्य के लिए बचत भी होती है। पहले जब भी कोई व्यक्ति कंपनी छोड़ता था, तो वह पीएफ के पैसे निकालता था। हालांकि, अब पैसे निकालना अनिवार्य नहीं है, क्योंकि 1 जनवरी 2014 से सभी को यूएएन नंबर दे दिया गया है, जिसे आज से ऑनलाइन भी कर दिया गया है। यह नंबर कोई भी कर्मचारी अपने एचआर से पता कर सकता है।

यूएएन नंबर मिल जाने के बावजूद कई बार कुछ लोगों को नौकरी छोड़ने पर पीएफ के पैसों की जरूरत होती है, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता है कि आखिर पीएफ निकालने की प्रक्रिया क्या है। आज moneybhaskar.com आपको बता रहा है कि किस तरह से नौकरी छोड़ने पर पीएफ का पैसा निकाला जा सकता है। आइए जानते हैं कैसे निकाला जाता है पीएफ का पैसा-

1- पीएफ का पैसा निकालने के लिए आवेदन के लिए आपको नौकरी छोड़ने के बाद 2 महीने तक इंतजार करना होता है। इसका मतलब हुआ कि यदि 31 अक्टूबर आपका आखिरी वर्किंग डे है, तो आप इसके 2 महीने बाद 31 दिसंबर 2014 के बाद ही पीएफ निकालने के लिए अपने पुराने ऑफिस में आवेदन कर सकते हैं।
2- ऑफिस से आपको दो फॉर्म दिए जाते हैं, पहला है फॉर्म-19 और दूसरा है फॉर्म-10c. इन दोनों फॉर्म को जमा करके ऑफिस के एचआर के पास जमा करना होता है। इस फॉर्म में आपको अपना अकाउंट नंबर, मोबाइल नंबर, नाम और पता जैसी जानकारियां भरनी होती हैं और 1 रुपए के दो रिवेन्यू स्टैम्प फॉर्म में दी जगह पर लगाने होते हैं।

इस फॉर्म को कंपनी के अधिकारियों द्वारा वैरिफाई किया जाता है, जिसमें आपकी जानकारियों की जांच की जाती है। सामान्यतया इस वैरिफिकेशन में मामूली समय लगता है, लेकिन यदि फॉर्म अधिक हों तो समय अधिक भी लग सकता है।
3- एम्प्लॉयर द्वारा वैरिफाई करने के बाद इन दोनों फॉर्म को ईपीएफओ के ऑफिस में जमा करना होता है। इसे कर्मचारी खुद भी ले जाकर जमा कर सकता है। यदि वह खुद नहीं जाना चाहता, तो कंपनी को इसके बारे में कह सकता है और कंपनी इन दोनों फॉर्म को खुद ही ईपीएफओ ऑफिस में जमा कर देती है।

ईपीएफओ कार्यालय में भी इन दोनों फॉर्म का वैरिफिकेशन किया जाता है। इस वैरिफिकेशन में आपका अकाउंट नंबर, हस्ताक्षर, कंपनी के अधिकारी के हस्ताक्षर आदि की जांच की जाती है। वैरिफिकेशन पूरी होने के बाद ईपीएफओ के अधिकारी फॉर्म को आगे की प्रक्रिया के लिए फाइनेंस डिपार्टमेंट में भेज देते हैं।
4- इसके कुछ दिनों बाद पैसा आपको भेज दिया जाता है। यह पैसा सीधे आपके अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाता है। यदि आप चाहे तो इसे आपको कूरियर द्वारा भी भेजा जा सकता है। इसके लिए आपको फॉर्म में पहले से ही बताना होगा कि पैसे कूरियर द्वारा चाहिए या फिर सीधे अकाउंट में।

ईपीएफओ ऑफिस से वैरिफाई हो जाने के कम से कम 7 दिन बाद आपको पैसे भेज दिए जाते हैं। आपको पैसे मिलने में अधिकत समय 45 दिन भी लग सकता है।

5- ये भी जानें-

=> यदि आपने 1 जनवरी 2014 के पहले किसी कंपनी को से नौकरी छोड़ दी है तो आपको यूएएन नंबर नहीं मिलेगा, क्योंकि 1 जनवरी 2014 के बाद ही इसे कर्मचारियों को दिया गया है।

=> यूएएन नंबर न होने की स्थिति में आप अपना पीएफ का पैसा नई कंपनी के अकाउंट में ट्रांसफर करवा सकते हैं, या फिर उसे निकाल सकते हैं।

=> पीएफ का पैसा निकालने के लिए एम्प्लॉयर के द्वारा वैरिफिकेशन की जरूरत होती है। पीएफ का पैसा निकालत समय आपको अपनी आखिरी कंपनी से वैरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
=> यदि कंपनी बंद हो जाए या फिर भाग जाए तो भी कंपनी के वैरिफिकेशन की जरूरत नहीं होती है। इस स्थिति में ग्राम प्रधान या इलाके के मेयर से हस्ताक्षर करवा के भी वैरिफिकेशन करवा सकते हैं।

=> यदि आप किसी दूसरे शहर में चले गए हैं, लेकिन कंपनी वहीं है तो आप उसी शहर से पीएफ के पैसे निकाल सकते हैं।
=> यदि आप दूसरे शहर में दूसरी कंपनी में गए हैं तो आपको उसी शहर से पैसे मिलेंगे, जहां पर पुरानी कंपनी है।

=> अपने पीएफ के पैसों की डीटेल जानने के लिए ई पासबुक जनरेट की जा सकती है।

कितने साल बाद और कब निकाल सकते हैं PF का पूरा पैसा

पीएफ की राशि को इमरजेंसी की स्थिति में निकाला जा सकता है। 7 परिस्थितियों में आप पीएफ की राशि को निकाल सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में आप पीएफ का पूरा हिस्सा निकाल सकते हैं और कुछ में पीएफ के कुल पैसे का एक निश्चित हिस्सा ही निकाला जा सकता है। आइए जानते हैं कौन सी हैं ये 7 परिस्थितियां, जिनमें पीएफ की राशि को निकाला जा सकता है-

1- मेडिकल ट्रीटमेंट-

=> आप अपने, पत्‍नी के, बच्‍चों के या फिर माता-पिता के इलाज के लिए भी पीएफ विद्ड्रॉ कर सकते हैं।

=> इस स्थिति में आप कभी भी पीएफ विद्ड्रॉ कर सकते हैं यानी ये आवश्‍यक नहीं है कि आपकी सर्विस कितने समय की हुई है।

=> इसके लिए एक महीने या उससे अधिक तक अस्पताल में भर्ती होने का सबूत देना होता है।

=> साथ ही इस समय के लिए इंप्लॉयर के द्वारा अप्रूव लीव सर्टिफिकेट भी देना होता है।

=> पीएफ के पैसों से मेडिकल ट्रीटमेंट लेने के लिए व्यक्ति को अपने इंप्लॉयर या फिर ईएसआई के द्वारा अप्रूव एक सर्टिफिकेट भी देना होता है। इस सर्टिफिकेट में यह घोषणा की गई होती है कि जिसे मेडिकल ट्रीटमेंट चाहिए, उस तक ईएसआई की सुविधा नहीं पहुंचाई जा सकती या फिर उसे ईएसआई की सुविधा नहीं दी जाती है।

=> इसके तहत पीएफ का पैसा निकालने के लिए फॉर्म 31 के तहत आवेदन करने के साथ-साथ बीमारी का सर्टिफिकेट या की अन्य ऐसा डॉक्युमेंट देना होता है, जिससे सत्यता की जांच की जा सके।

=> मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए कोई भी व्यक्ति अपनी सैलरी का 6 गुना या फिर पूरा पीएफ का पैसा, जो भी कम हो, निकाल सकता है।
2- एजुकेशन/ शादी-

=> अपनी या भाई-बहन की या फिर अपने बच्‍चों की शादी के लिए पीएफ की राशि को निकाला जा सकता है।

=> आप अपनी पढ़ाई या फिर बच्‍चों की पढ़ाई के लिए भी पीएफ की राशि को निकाल सकते हैं।

=> इसके लिए कम से कम 7 साल की नौकरी हो जानी चाहिए।

=> संबंधित कारण का सबूत आपको देना होगा।

=> एजुकेशन के मामले में आपको अपने इंप्लायर के द्वारा फॉर्म 31 के तहत आवेदन करना होता है। आप पीएफ निकालने की तारीख तक कुल जमा का 50 प्रतिशत पीएफ ही निकाल सकते हैं।

=> एजुकेशन के लिए पीएफ का इस्तेमाल कोई भी व्यक्ति अपने पूरे सेवाकाल में सिर्फ तीन बार कर सकता है।

3- प्‍लॉट खरीदने के लिए

=> प्लॉट खरीदने के लिए पीएफ का पैसा इस्तेमाल करने के लिए आपकी नौकरी का समय 5 साल पूरा हो चुका होना चाहिए।

=> प्‍लॉट आपके, आपकी पत्‍नी के या दोनों के नाम पर रजिस्‍टर्ड होना चाहिए।

=> प्लॉट या प्रॉपर्टी किसी प्रकार के विवाद में फंसी नहीं होनी चाहिए और न ही उस पर कोई कानूनी कार्रवाई चल रही होनी चाहिए।

=> प्लॉट खरीदने के लिए कोई भी व्यक्ति अपनी सैलरी का अधिकतम 24 गुना तक पीएफ का पैसा निकाल सकता है।

=> इस तरह की स्थिति में आप अपनी नौकरी के कुल समय में सिर्फ एक ही बार पीएफ का पैसा निकाल सकते हैं।
4- घर बनाने या फ्लैट

इस तरह की स्थिति में आपकी नौकरी के 5 साल पूरा होना आवश्‍यक है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति अपनी सैलरी का अधिकतम 36 गुना तक पीएफ का पैसा निकाल सकता है। इसके लिए अपनी नौकरी के सयम के दौरान सिर्फ एक बार ही पीएफ के पैसों का इस्तेमाल किया जा सकता है।


5- रि-पेमेंट ऑफ होम लोन

इसके लिए आपकी नौकरी के 10 साल होना चाहिए। इसके तहत कोई भी व्यक्ति अपनी सैलरी का अधिकतम 36 गुना तक पीएफ का पैसा निकाल सकता है। इसके लिए अपनी नौकरी के सयम के दौरान सिर्फ एक बार ही पीएफ के पैसों का इस्तेमाल किया जा सकता है।


6- हाउस रिनोवेशन

इस स्थिति में आपके की नौकरी के कम से कम 5 साल पूरे होने चाहिए। इसके तहत कोई भी व्यक्ति अपनी सैलरी का अधिकतम 12 गुना तक पीएफ का पैसा निकाल सकता है। इसके लिए अपनी नौकरी के सयम के दौरान सिर्फ एक बार ही पीएफ के पैसों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
7- प्री-रिटायरमेंट

इसके लिए आपकी उम्र 54 वर्ष होनी चाहिए। इस स्थिति में आप कुल पीएफ बैलेंस में से 90प्रतिशत तक की रकम निकल सकते हैं, लेकिन यह विद्ड्रॉ सिर्फ एक ही बार किया जा सकता है।

पीएफ विद्ड्रॉ टैक्‍सेबल है या नहीं

यदि आप लगातार सर्विस के दौरान 5 साल से पहले पीएफ विद्ड्रॉ करते हैं तो यह टैक्‍सेबल होगा। यहां लगातार सर्विस से मतलब ये नहीं है कि एक ही संस्‍था में 5 साल तक सर्विस होना। आप सर्विस बदल सकते हैं और कोई भी संस्‍था ज्‍वाइन कर सकते हैं। आप अपने पीएफ अकांउट को नए एम्‍पलॉयर को ट्रांसफर  कर सकते हैं।

जानें पीएफ कोड में किसका क्या है मतलब

यदि आपका पीएफ कोड UP/12345/123 है, तो इसमें UP से मतलब है कि आपका अकाउंट उत्तर प्रदेश (UP) में मेंटेन किया जाता है। इसके बाद का नंबर (12345) इस्टेबलिशमेंट कोड कहा जाता है, जो अधिकतर 7 अंकों का हो सकता है। अन्त का कोड (123) अकाउंट नंबर होता है।

इस्टेबलिशमेंट कोड

अगर कंपनी द्वारा इस्टेबलिशमेंट कोड नहीं मिला है, तो आप ईपीएफओ की वेबसाइट से भी कंपनी का इस्टेबलिशमेंट कोड जान सकते हैं। (साभार- दैनीक भाष्कर)

Wednesday, 16 July 2014

इस तरह सुलझ सकती हैं आपकी समस्याएं !

 व्यर्थ की समस्याओं में उलझकर ऊर्जा नष्ट न करें

 उन समस्याओं की सूची बनाएं, जिन्हें आप सुलझा सकते हैं या इसकी कोशिश कर सकते हैं। अब सिर्फ इन्हीं पर ध्यान दें। इन्हें सुलझाने के लिए जोर-शोर से जुट जाएं।  हम सभी के जीवन में मुश्किलें हैं। चाहे कैब ड्राइवर हो या करोड़ों की कंपनी का सीईओ, सब की अपनी मुश्किलें हैं। यदि आप गृहणी हैं ता सिर्फ आप ही जान सकती हैं कि रोज किन मुश्किलों से दो-चार होती हैं। यदि आप छात्र हैं तो आप ही जान सकते हैं कि छात्रों की जिंदगी कितनी मुश्किल है, खासकर जब इम्तहान सामने हों।
 
सभी मुश्किलों को दो वर्ग में बांटा जा सकता है:-
 
    या तो आप इसे सुलझाने के लिए कुछ कर सकते हैं या कुछ भी नहीं कर सकते हैं। कॉलेज के दिनों में मैं अपने कद को लेकर चिंतित रहता था। मुझे हैरानी होती कि मैं अपने पिता की तरह लंबा क्यों नहीं हूं। कई साल तक यह सवाल मुझे परेशान करता रहा। फिर एक बार मैंने अपने आप से पूछा, 'क्या मैं अपने कद के बारे में कुछ कर सकता हूं? यकीनन नहीं। मैंने महसूस किया कि मैं ऐसी समस्या को लेकर परेशान था, जिसका मैं कुछ नहीं कर सकता था। मैंने तय किया कि अब इसके बारे में सोचकर वक्त बर्बाद नहीं करूंगा। मैंने यह भी अहसास किया कि मैं बेकार के सवाल से परेशान था। और मुझे ऐसी समस्याओं के बारे में सोचकर समय खराब नहीं करना चाहिए। इसकी बजाय मुझे एक्सरसाइज करना चाहिए। मैंने एक्सरसाइज के लिए वक्त बढ़ा दिया। मुझे एक कविता याद आई,
 
सूरज की किरणों में हर बीमारी के लिए
या तो उपाय है या नहीं है,
यदि है तो उसे ढूंढऩे की कोशिश करो
यदि नहीं है तो चिंता मत करो।

   जरा उन शख्सियतों पर नजर डालें जिन्होंने कामयाबी का शिखर छुआ है। इन सभी ने हमेशा अपने सकारात्मक पक्ष या ताकत पर ध्यान दिया और उन मुद्दों और समस्यायों की चिंता करने में वक्त बर्बाद नहीं कया, जिन पर उनका नियंत्रण नहीं है। एआर रहमान ने अपने रंग की चिंता नहीं की बल्कि उनका ध्यान सिर्फ संगीत पर रहता है। लता मंगेशकर को इससे मतलब नहीं होता कि वे कैसी दिख रही हैं, उनका ध्यान सिर्फ और सिर्फ गायन पर है। यदि सचिन तेंडुलकर अपने कद की चिंता में खोए रहते तो वे कभी भी महान क्रिकेटर और दुनिया के करोड़ों लोगों की प्रेरणा नहीं बन सकते थे। यदि मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग भगवान से यही पूछते रहते, 'आपने मुझे शाररीक रूप से अक्षम क्यों बनाया?’ तो वे वह सम्मान कभी भी हासिल नहीं कर पाते, जैसा कर पाए। उन्होंने ऐसा सवाल करने की बजाय अपनी प्रतिभा को पहचान कर उसी दिशा में काम किया।

आप अपने जीवन पर नजर दौड़ाएं। क्या आप ऐसे मुद्दों और समस्याओं पर वक्त और ऊर्जा बर्बाद कर रहे हैं, जिन पर आपका वश नहीं है। ऐसी सभी समस्याओं को अपनी सूची से हटा दें, जिन्हें आप नहीं सुलझा सकते, या जो आपके वश से बाहर हैं। सिर्फ उन मुद्दों या समस्याओं की सूची बनाएं, जिन्हें आप सुलझा सकते हैं या सुलझाने की कोशिश कर सकते हैं। अब सिर्फ इन्हीं पर ध्यान दें। जोरशोर से जुट जाएं। इन समस्याओं को सुलझाने के लिए पूरी ताकत झोंक दें। जल्दी ही आपको अहसास हो जाएगा कि अब आप अपनी जिंदगी बर्बाद नहीं कर रहे बल्कि उसे सार्थक बना रहे हैं। कौन जाने? आपकी सोच में यह बदलाव आपको कितना बदल दे? हो सकता है कि आपके दुनिया छोडऩे के बाद पोते-पड़पोते आपके बारे में इतिहास की किताब में पढ़ें। ( साभार- दैनिक भाष्कर )



आप अधिक जानकारी इस पत्रिका से ले सकते हैं.............
इंफीनीमैगजीन-
महात्रया रा आध्‍यात्‍मिक गुरु हैं। वे देश-विदेश में अपने आध्‍यात्‍मिक व्‍याख्‍यानों के माध्‍यम से लोगों को सेल्‍फ रियलाइजेशन के लिए मार्गदर्शित करते हैं। उनके प्रभावी संदेश व्‍यक्‍ति की नकारात्‍मक ऊर्जा को सकारात्‍मक ऊर्जा में परिवर्तित करके जीवन की दिशा बदल देते हैं। उनके व्‍याख्‍यान सुनकर कई प्रसिद्ध हस्‍तियां, बिजनेसमैन, स्‍पोटर्सपर्सन और स्‍टूडेंट़स अपनी आंतरिक ऊर्जा की मदद से नई ऊंचाइयां प्राप्‍त कर चुके हैं। महात्रया रा जीवन जीने का एक नया रास्‍ता बताते हैं – ‘इंफीनीथीज्‍म’, जिसके माध्‍यम से मनुष्‍य को अपनी असीम क्षमता का अहसास हो सकता है।

इंफीनीमैगजीन प्रेरक कहानियों, उद्धरणों, विकासोन्मुख पोस्टरों और महान व्यक्तियों के विचारों से बनी है। दुनिया पर अमिट छाप छोड़ने वाले अलग-अलग पृष्ठभूमि के महान लोगों और बिना कुछ बोले विपरीत हालात में महान ऊंचाइयां छूने वाले लोगों पर नियमित कॉलम्स हैं। यह मैगजीन पाठकों को विपरीत हालात से जूझने के लिए प्रेरित करती है। इंफीनीमैगजीन के माध्‍यम से महात्रया रा लोगों को अपनी पूरी क्षमता और वो ऊंचाइयां हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, जहां तक वे अधिकारपूर्वक पहुंच सकते हैं। http://infinimagazine.com/
 

Monday, 30 June 2014

एटीएम की पर्ची में खतरनाक केमिकल

   एटीएम से पैसे निकालने के बाद मिलने वाली रसीद को सभी संभाल कर रखते हैं। बड़े-बड़े मॉल्स और शोरूम में खरीददारी के बाद पेमेंट की रसीद को लोग पर्स में भी रख लेते हैं। कुछ लोग तो पेट्रोल पंप, बस के टिकट की पर्चियां या रसीद तक घर में ले जाकर बच्चों को दे देते हैं। लेकिन प्रिंट के लिए इस्तेमाल होने वाली इन रसीदों पर चढ़ाई जाने वाली कोटिंग में बेहद खतरनाक केमिकल होता है। इसमें बायस्फीनॉल-ए (बीपीए) नामक केमिकल्स मिक्स होता है, जो टॉक्सिक होता है।
क्या है बीपीए?
डॉक्टर डी.के. दास ने बताया कि बायस्फीनॉल-ए एक केमिकल है जिसका यूज कई प्रोडक्ट में सालों से हो रहा है। खासकर एयर टाइट डिब्बे, स्पोटर्स के समान, सीडी और डीवीडी, वाटर पाइप की लीकेज को ठीक करने और खाने के प्रॉडक्ट वाले पैकेट पर कोटिंग चढ़ाने के काम में आता है। इस वजह से यूरोप में बच्चों की फीडिंग बॉटल बनाने में इसके यूज को सालों पहले बैन कर दिया गया है।

क्यों है खतरनाक?

हाल ही में महाराष्ट्र की डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी में हुई एक रिसर्च के मुताबिक इस कागज पर की गई केमिकल कोटिंग मानव शरीर के लिए काफी खतनाक हो सकती है। इन पर्चियों पर कुछ भी छापने के लिए थर्मल प्रिंटर का उपयोग किया जाता है। इसलिए जहां तक संभव हो ऐसी पर्ची को अपने से दूर रखें क्योंकि इसके लगातार संपर्क में आने से साइड इफेक्ट का खतरा रहता है और इंसान गंभीर बीमारी का शिकार हो सकता है। बीएलके सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टर आर. के. सिंघल का कहना है कि इन कागजों की कोटिंग में ट्रायरील मिथेन थॉलिड के ल्यूको डाय, बीपीए, बायस्फेनॉल-बी (बीपीएस) और स्टेब्लाइजर्स का उपयोग होता है। आज कल इसका सबसे ज्यादा यूज थर्मल प्रिंटर में उपयोग किए जाने वाले पेपर कोटिंग पर बायस्फेनॉल-ए का उपयोग किया जाता है।

1957 से इस्तेमाल में
बायस्फीनॉल-ए (बीपीए) एक ऐसा केमिकल है 1957 से यूज हो रहा है। जिसमें बॉटल को एयर टाइट करने, फीडिंग बॉटल की कोटिंग, फूड ड्रिंक्स के पैकेट की कोटिंग, लीकेज को बंद करने वाले पेस्ट में खूब हो रहा है। भारत में भी इसका प्रयोग सालों से हो रहा है। लेकिन आजकल प्रिंट पेपर पर इसकी कोटिंग चढ़ाई जाती है जिसका प्रयोग काफी बढ़ा है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि लोगों को इस बारे में जागरूक किया जाए और सरकार इसके दूसरे विकल्प को जल्द से जल्द बाजार में उतारने की कोशिश करे।

कैसे होती है बॉडी में एंट्री

  उंगलियों के रास्ते : रिसर्च के अनुसार अगर ऐसे कागज को पांच सेकंड तक हाथ में रखा जाए तो 1 माइक्रोग्राम बीपीए हमारी उंगलियों में लग जाता है। अगर हाथ में नमी हो तो यह और तेजी से काम करता है। दस घंटे तक लगातार इस पेपर को हाथ मे रखने वाले इंसान के बॉडी में 71 बीपीए इंट्री कर सकता है।

  पर्स से भी एंट्री : डॉक्टर का कहना है कि अगर आप पर्स में ऐसे पेपर रखते हैं तो इसकी इंक के कण पर्स में गिरते हैं और इससे पैसे के साथ-साथ पूरे पर्स में बीपीए मौजूद रहता है और इंसान बार-बार इसे टच करेगा, जो ज्यादा खतरनाक है।

  फूड पैकेज और ड्रिंक्स से : डॉक्टर आर.के. सिंघल का कहना है कि फूड ड्रिंक्स के पैकेट में अगर कहीं पर लीक हो या कटा फटा हुआ हो तो यह खाने के पदार्थ से मिक्स होकर बॉडी तक जा सकता है।
पानी के पाइप से : इसी प्रकार अगर पानी के पाइप लाइन में लीकेज हो तो इसे बंद करने के लिए लोग पेस्ट यूज करते हैं, इस पेस्ट के साथ मिक्स होकर पानी के साथ बीपीए पेट में पहुंच सकता है।
अंडरग्राउंस वाटर तक पहुंच : यही नहीं अगर ऐसे प्रॉडक्ट को फेंक दिया जाए तो यह मिट्टी के साथ मिक्स होकर पानी में मिल जाएगा और फिर जमीन के पानी के साथ मिक्स हो जाएगा।

क्या है इससे खतरा?
डॉक्टर दास का कहना है कि बीपीए फीमेल हार्मोन इंस्ट्रोजोन की तरह काम करता है और इसके लगातार टच से जहां प्रिग्नेंट लेडीज के ब्लड में मिक्स हो कर प्लेसेंटा में जा सकता है और गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है। इसी प्रकार छोटे बच्चे में लीवर पर असर हो सकता है, क्योंकि बच्चे में टॉक्सिक को डिटॉक्सीफाई करने वाले एंजाइम नहीं बना होता है। जब यह बॉडी में जाता है तो इंस्ट्रोजोन की तरह बीहेव करता है और लड़कियों में फ्री मैच्योर नेचुरल साइकिल पर असर पड़ता है। इसके अलावे ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट, बच्चों में हाइपर एक्टिविटी, न्यूरो, मोटापा, डायबिटीज और इम्यून सिस्टम कमजोर होने का खतरा रहता है। दोनों डॉक्टरों का कहना है कि इसके दूसरे विकल्प तलाशने की जरूरत है। टमाटर से एक ऐसे केमिकल का ईजाद किया गया है जो बीपीए फ्री है और इसका प्रयोग सेफ हो सकता है।

करें बीपीए बॉटल की पहचान
डॉक्टर डी.के. दास का कहना है कि बेबी फीडिंग बॉटल पर तो बीपीए का यूज अब नहीं हो रहा है। लेकिन अगर लोग थोड़ा सतर्क रहें तो बीपीए बॉटल की पहचान कर सकते हैं। हर बॉटल के पीछे हिस्से में एक त्रिकोण बना होता है और त्रिकोण के अंदर डिजिट में एक लिखा होता है और उसके नीचे pet लिखा होता है, इसका मतलब है कि बॉटल बीपीए फ्री है। लेकिन जिस त्रिकोण में 07 और नीचे pl लिखा होता है उसमें बीपीए होता है। डॉक्टर का कहना है कि इसी प्रकार अगर किसी के पानी के पाइप लाइन लीकेज हो तो उसे पेस्ट से बंद करने के बजाए पाइप को बदलें ताकि किसी भी प्रकार के ऐसे टॉक्सिक से बचा जा सके।

नष्ट नहीं होता यह केमिकल
डॉक्टर सिंघल ने कहा कि ऐसे प्रॉडक्ट को फेंकने का असर एक स्टडी में भी पाया गया है। अमेरिका में एक स्टडी में यूरिन टेस्ट किया गया था तो 80 पर्सेंट से ज्यादा लोगों का यूरिन पॉजिटिव आया था। इसका मतलब साफ है कि बीपीए ऐसा केमिकल है जो नष्ट नहीं होता है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाता है और नेचुरल प्रॉडक्ट के साथ मिक्स होकर बॉडी तक पहुंच जाता है। हालांकि डॉक्टर ने कहा कि इससे डरने की जरूरत नहीं है, बस थोड़ा सतर्क रहें और ऐसे प्रॉडक्ट से जहां तक संभव हो दूरी बनाए रखें। अगर इसे जला दिया जाए तो पर्यावरण को नुकसान होगा। सच तो यह है कि हमारे देश में ऐसे प्रॉडक्ट को डिस्पोज करने का कोई सिस्टम नहीं है। साभार- नवभारतटाइम्स.कॉम - राहुल आनंद की स्पेशल रिपोर्ट-
 (http://navbharattimes.indiatimes.com/world/science-news/dangerous-chemical-in-ATM-Slip/articleshow/37503020.cms)

Sunday, 29 June 2014

जगन्नाथ पुरी मंदिर के आश्चर्यजनक तथ्य


  पुरी का जगन्नाथ मंदिर विश्व भर में प्रसिद्ध है। मं‍दिर का आर्किटेक्ट इतना भव्य है कि दूर-दूर के वास्तु विशेषज्ञ इस पर रिसर्च करने आते हैं। कुछ आश्चर्यजनक तथ्य इन दिनों फेसबुक पर खासे चर्चित हैं। प्रस्तुत है  संपादित अंश- 


1. मंदिर के ऊपर स्थापित ध्वज सदैव हवा के विपरीत दिशा में लहराता है।

2. पुरी में किसी भी स्थान से आप मंदिर के शीर्ष पर लगे सुदर्शन चक्र को देखेंगे तो वह आपको सदैव अपने सामने ही लगा दिखेगा।

3. सामान्य दिनों के समय हवा समुद्र से जमीन की तरफ आती है और शाम के दौरान इसके विपरीत, लेकिन पुरी में इसका उल्टा होता है।

4. पक्षी या विमानों को मंदिर के ऊपर उड़ते हुए नहीं पाएंगे।

5. मुख्य गुंबद की छाया दिन के किसी भी समय अदृश्य ही रहती है।

6. मंदिर के अंदर पकाने के लिए भोजन की मात्रा पूरे वर्ष के लिए रहती है। प्रसाद की एक भी मात्रा कभी भी व्यर्थ नहीं जाती, लाखों लोगों तक को खिला सकते हैं।

7. मंदिर की रसोई में प्रसाद पकाने के लिए 7 बर्तन एक-दूसरे पर रखे जाते हैं और सब कुछ लकड़ी पर ही पकाया जाता है। इस प्रक्रिया में शीर्ष बर्तन में सामग्री पहले पकती है फिर क्रमश: नीचे की तरफ एक के बाद एक पकती जाती है।

8. मंदिर के सिंहद्वार में पहला कदम प्रवेश करने पर ही (मंदिर के अंदर से) आप सागर द्वारा निर्मित किसी भी ध्वनि को नहीं सुन सकते। आप (मंदिर के बाहर से) एक ही कदम को पार करें, तब आप इसे सुन सकते हैं। इसे शाम को स्पष्ट रूप से अनुभव किया जा सकता है।

9. मंदिर का रसोईघर दुनिया का सबसे बड़ा रसोईघर है।

10. प्रतिदिन सायंकाल मंदिर के ऊपर स्थापित ध्वज को मानव द्वारा उल्टा चढ़कर बदला जाता है।

11. मंदिर का क्षेत्रफल 4 लाख वर्गफुट में है।

12. मंदिर की ऊंचाई 214 फुट है।

13. विशाल रसोईघर में भगवान जगन्नाथ को चढ़ाए जाने वाले महाप्रसाद का निर्माण करने हेतु 500 रसोइए एवं उनके 300 सहायक-सहयोगी एकसाथ काम करते हैं। सारा खाना मिट्टी के बर्तनों में पकाया जाता है। हमारे पूर्वज कितने बड़े इंजीनियर रहे होंगे यह इस एक मंदिर के उदाहरण से समझा जा सकता है। 
  साभार-वेबदुनिया ( http://hindi.webdunia.com/religion-religiousplaces/)

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