Tuesday, 24 August 2010

कलाई पर राखी के बदले मौत मिली इस बदनसीब भाई को !


   राखी का पर्व हर भाई-बहने के लिए अहम होता है। बहने उम्मीद करती हैं कि उसका भाई कम से कम राखी बंधवाने तो जरूर ही आएगा। मगर यह नसीब की ही बात है कि किसी को यह पर्व तमाम खुशियां लेकर आता है तो किसी भाई-बहन को यह खुशी नसीब तो होती नहीं उल्टे नियति उन्हें गम के अंधेरे में धकेल देती है। आप राखी की खुशिया मना रहे हैं तो एक कष्ट और करिए। एक उस भाई के लिए अपनी आंखों में दो बूंद आंसू भर लीजिए जिसे अपनी कलाई पर राखी तो नसीब नहीं हुई, बदले में मौत मिली। वह सिर्फ इस कारण कि वह अपनी राखी बंधवाने कोलकाता से अपने गांव बिहार जाना चाहता था मगर उसके दुकान मालिक ने पीटकर मार डाला।


राखी उत्सव के मौके पर बहन से राखी बंधवाने के लिए एक पान की दुकान में काम करने वाला विक्रम घर जाना चाहता था। दुकान का मालिक उसके छुट्टी देने के लिए तैयार नहीं था। उसने छुट्टी की बात सुन कर किशोर को जमकर पीटा। इससे चौदह वर्षीय किशोर की मौत हो गई। पश्चिम बंगाल के हावड़ा स्टेशन के पास गोलाबाड़ी थाना इलाके में 56 नंबर बस स्टैंड के नजदीक यह घटना हुई। यहां बबलू चौरसिया की पान की दुकान में विक्रम राम (14) काम करता था। उसने बिहार स्थित अपने गांव जाने के लिए छुट्टी मांगी थी। बीते तीन महीनों से विक्रम को छुट्टी नहीं दी गई थी। रविवार की रात से ही वह राखी के लिए गांव जाने की जिद कर रहा था। मकान मालिक ने उसकी लाख मिन्नतों के बादजूद छुट्टी देने से साफ मना कर दिया। पुलिस व स्थानीय लोगों की मानें तो विक्रम ने यह तय कर लिया था कि मालिक उसे छुट्टी नहीं देगा तो वह बहन से राखी बंधवाने के लिए नौकरी छोड़ देगा। एक मामूली नौकर यह इस हिमाकत बबलू चौरसिया से बर्दाश्त नहीं हुई। नौकरी छोड़कर घर जाने की खबर मिलते ही चौरसिया ने उसे जमकर पीटना शुरू कर दिया। मार खाकर किशोर बेहोश होकर वहीं गिर गया।


स्थानीय लोगों ने देखा कि विक्रम खून से लथपथ है और उलटी कर रहा है। वह एक दुकान के सामने पड़ा था। इसके कुछ ही देर बाद वह बेहोश हो गया। बेहोशी की हालत में उसे स्थानीय लोग हावड़ा के सदर अस्पताल ले गए जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। तीन महीने से वह पान की दुकान पर काम करता था। पुलिस ने बबलू को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि चौरसिया दुकान पर काम करने वाले बच्चों को पीटता रहता था। हावड़ा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एसके जैन ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद मौत का कारण पता चल सकेगा। गिरफ्तारी के बाद दुकान के मालिक ने पुलिस को बताया कि उसने पिटाई नहीं की। किशोर बीमार था, हालत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती किया गया था। और वहीं उसकी मौत हो गई।


कोलकाता के स्थानीय सांध्य बांग्ला अखबारों ने यह खबर छापी है। मामला पुलिस के हवाले है। हो सकता है दुकानदार दोषी पाया जाए और उसे हवालात की हवा खानी पड़े मगर इससे क्या उस बहन कोई दिलासा मिल पाएगी जिसका भाई अब कभी भी राखी बंधवाने नही आ सकेगा। क्या बीती होगी उस बहन और विक्रम के मां-बाप पर जब उन्हें इस मार्मिक हादसे की खबर मिली होगी । यह सिर्फ विक्रम की कहानी नहीं है। बिहार के गरीब घरों के लड़के पश्चिम बंगाल ही नहीं दिल्ली, मुंबई व पंजाब और गुजरात में काम पर जाते हैं और वहीं फंसकर रह जाते हैं। अधिकतर का जीवन तो नारकीय हो जाता है।


हमारे सांसद अपने वेतन पर तो इतना होहल्ला मचाते हैं। चार दिन तक कैबिनेट को इसे राष्ट्रीय संकट जैसे मसले की तरह हल करना पड़ा। क्या हमारे जनप्रतिनिधि देश की ऐसी तमाम समस्याओं से जूझ रही देश की मजबूर और गरीब जनता की खोजखबर लेकर उनके लिए होहल्ला मचाते हैं ? शायद कम ही। तब तो मेरा दावा है कि इस देश के गरीब ऐसे ही मुफलिसी और गुलामी में पिसते रहेंगे। जागो भारत, जागो।

3 comments:

vinay said...

बहुत दुखद घटना ।

vinay said...

बहुत दुखद घटना ।

Gautam Kumar Kutariyar गौतम कुमार कुटरियार said...

स्वार्थ इंसानियत का नाश कर देता है। दोषी को कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए । मैने ऐसे बच्चों के लिए एक कविता लिखी है :
उसका बचपन जलता है । आशा है आपको अच्छी लगेगी ।

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