Monday, 12 November 2007

यह जो नंदीग्राम है - माकपा की बला और तृणमूल की संजीवनी






नंदीग्राम की घटना पुराने मसय के हमलावर व बर्बर राजाओं की याद दिला रही है जो अपने साम्राज्य विस्तार के लिए नागरिकों को गाजरमूली की तरह काट देने में कोई परहेज नहीं रखते थे। आज उसी सियासत की बलि चढ़ रहा है नंदी ग्राम और मारे जा रहे हैं निरीह नागरिक। वे नागरिक जो सिर्फ अपने तरीके से जीने का हक मांग रहे हैं। इस वर्चस्व की लड़ाई ने राजनैतिक संकट भी खड़ा कर दिया है।
नंदीग्राम में हिंसा जारी रहने के बीच इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की वाम मोर्चा सरकार के समक्ष राजनीतिक संकट उभरता दिखा। नंदीग्राम मुद्‍दे पर वर्षों से एकजुट वाम मोर्चे पर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। मोर्चा की घटक रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी ने अपने तीन मंत्रियों को बुद्धदेव भट्टाचार्य मंत्रिमंडल से हटाने की गुंजाइश से इनकार नहीं किया और आरएसपी नेता क्षिति गोस्वामी ने भी दोहराया कि वह सरकार में बने रहना नहीं चाहते हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या आरएसपी अपने तीनों मंत्रियों गोस्वामी विश्वनाथ चौधरी और सुभाष नासकर को मंत्रिमंडल से वापस बुला सकती है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद मनोज भट्टाचार्य ने कहा कि हम इसे खारिज नहीं कर रहे हैं। भट्टाचार्य ने कहा इन मुद्दों पर पार्टी सचिवालय और 13 तथा 14 नवम्बर को होने वाली राज्य समिति की बैठक में चर्चा की जानी है। उन्होंने कहा कि गोस्वामी ने मंत्री पद छोड़ने की इच्छा जताई है, लेकिन अभी पार्टी ने इसकी इजाजत नहीं दी है। प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री गोस्वामी ने कहा कि इस्तीफा देने के अपने निर्णय पर वह टिके हुए हैं और कल से वह न तो राइटर्स बिल्डिंग जाएँगे तथा न ही अपनी सरकारी कार का इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने कहा कि माकपा इलाकों पर दोबारा नियंत्रण करने के लिए खूनखराबा करना चाहती है। गोस्वामी ने कहा लोकतंत्र का अर्थ है कानून का शासन। मैं ऐसी स्थिति बर्दाश्त नहीं कर सकता हूँ जिसमें निर्दोष लोगों पर बर्बर तरीके से बल प्रयोग किया जा रहा हो। उन्होंने कहा मेरी राय में आरएसपी को वाम मोर्चा मंत्रिमंडल से हट जाना चाहिए।
गोस्वामी के इस फैसले के बाद बंगाल में सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच की दरार अब खुलकर नजर आने लगी है। गोस्वामी ने कहा कि नंदीग्राम में जो हो रहा है उसे मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता हूँ, लिहाजा इस्तीफा देना चाहता हूँ। माकपा ने हमें धोखा दिया है। कहा कुछ जा रहा है किया कुछ और जा रहा है।मंत्री ने कहा पिछले दस महीनों से जारी हिंसा का मैं विरोध करता हूँ। सरकार के पास कदम उठाने का पर्याप्त वक्त था, लेकिन वह ईमानदार नहीं थी। ] सत्तारूढ़ वाममोर्चे के सहयोगी दल आरएसपी ने नंदीग्राम मामले पर आगे की रणनीति तय करने के लिए कोलकाता में 13 नवंबर को बैठक बुलाई है।
येचुरी बोले, वाम मोर्चे में कोई फूट नहीं
नई दिल्ली : हिंसाग्रस्त नंदीग्राम का मुद्दा रविवार को सीपीएम पोलित ब्यूरो की बैठक में छाया रहा। बैठक के बाद पार्टी नेताओं ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल के सत्तारूढ़ वाम मोर्चा में इस मुद्दे को लेकर कोई दरार नहीं है। इस मुद्दे पर वाम मोर्चा में मतभेद होने के बारे में पूछे गए सवालों पर सीपीएम पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने संवाददाताओं से कहा - जिसकी आप लोग बात कर रहे हैं वह मतभेद है कहां, कोई फूट सत्तारूढ़ मोर्चा में नहीं है।

नंदीग्राम में तनावपूर्ण स्थिति, ममता को जाने से रोका
नंदीग्राम : पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में शनिवार से जारी झड़प में 4 लोगों की मौत के बाद यहां तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। दूसरी तरफ सीपीएम के कार्यकर्ताओं ने नंदीग्राम जा रहीं तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी को पूर्वी मिदनापुर जिले के केलोमल से आगे नहीं बढ़ने दिया। काफिला रोके जाने के बाद ममता बनर्जी को उनकी पार्टी के कार्यकर्ता मोटरसाइकिल पर बैठकर अस्पताल ले गए जहां कल की हिंसा में घायल लोगों को भर्ती कराया गया है।
आईजी (कानून व्यवस्था) राज कनौजिया ने बताया कि एक बटालियन सीआरपीएफ पहुंच गई और इन जवानों को शीघ्र ही नंदीग्राम में तैनात किया जाएगा। नंदीग्राम में हुई हिंसा की ताजा घटना के मद्देनजर केंद्र ने शनिवार की रात नंदीग्राम के लिए 1000 अतिरिक्त सीआरपीएफ कर्मियों को भेजने की घोषणा की है। पुलिस थाने के बाहर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है जिससे वहां होने वाले किसी हमले को रोका जा सके। शनिवार को भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति के कार्यकर्ताओं ने थाने पर हमला कर दिया था जिसके बाद पुलिस को उनपर आंसू गैस के गोले दागने पड़े थे।
ताजा घटनाओं के मद्देनजर तृणमूल कांग्रेस ने सोमवार से अनिश्चितकालीन 'बंगाल रोको'
अभियान का आह्वान किया है, जबकि कांग्रेस,एसयूसीआई और भाकपा (माले) ने सोमवार को 24 घंटे के बंद का ऐलान किया है। बीजेपी ने भी इसी तरह के 48 घंटे के बंद का आह्वान किया है।
उधर प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय युवा कांग्रेस नेता मिलन प्रधान ने दावा किया कि तेखाली पुल और महेशपुर में कथित माकपा कार्यकर्ताओं ने गोलीबारी और बमबारी की। बहरहाल पुलिस महानिरीक्षक (कानून व्यवस्था) राज कनौजिया ने कोलकाता में कहा कि किसी बड़ी घटना की रिपोर्ट नहीं है। इस बीच आधिकारिक सूत्रों ने कोलकाता में बताया कि सीआरपीएफ की 360 जवानों वाली तीन कम्पनियां हावड़ा रेलवे स्टेशन पहुंचीं और इन्हें नंदीग्राम में तैनात किया जायेगा। उन्होंने कहा कि कुछ और कम्पनियां पहुंचने वाली हैं।
ममता दक्षिण कोलकाता से सांसद हैं। नंदीग्राम में नरसंहार के विरोध में उन्होंने इस्तीफा दे दिया है जो तकननीकी कारणों से मंजी नहीं किया जा सका है। अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए उन्हेंने कहा है कि- मैं सभी संबंधित लोगों को अपना त्याग-पत्र भेज रही हूँ। उन्होंने कहा कि माकपा के एकदलीय और दमनकारी शासन के तहत पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गतिविधियाँ जारी रखना संभव नहीं रह गया है। ममता ने कहा नंदीग्राम पर पूरी तरह कब्जा करने के लिए माकपा योजनाबद्ध तरीके से हिंसा का सहारा ले रही है। ममता ने दावा किया कि नंदीग्राम के सोनाचुरा और महेशपुर इलाकों में 200 लोगों की सामूहिक हत्या की गई जब माकपा ने भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति के दो जुलूसों पर हमला किया। व्यथित और उत्तेजित दिख रहीं ममता ने कहा कि मैं इस नरसंहार के विरोध में इस्तीफा दे रही हूँ। वामपंथी कार्यकर्ता मारे गए लोगों के शव माकपा के गढ़ माने जाने वाले खेजुरी में ले गए जबकि घायलों को अस्पतालों में भर्ती नहीं होने दिया जा रहा है। यह पूछे जाने पर कि क्या वह सोमवार को एसयूसीआई के हड़ताल के आह्वान का समर्थन करती हैं, ममता ने कहा अब से सभी लोग साथ हैं।
इस्तीफा देने का ऐलान कर चुकीं ममता ने कहा मैं नंदीग्राम जाना चाहती हूँ। मैंने यह बात राज्यपाल गोपालकृष्ण गाँधी और केन्द्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल को बता दी है। ममता का इस्तीफा नामंजूरनंदीग्राम की ताजा ¨हसा के विरोध में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा लोकसभा की सदस्यता से शनिवार को दिया इस्तीफा जिसे लोकसभा अध्यक्ष ने नामंजूर कर दिया।
राजनीतिक पैतरेबाज़ी
नंदीग्राम की स्थिति को लेकर राज्य में राजनीतिक लड़ाई भी तेज़ हो गई है. दरअसल राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी के कड़ा रवैया अख्तियार करने के बाद माकपा के अहम् को काफी चोट पहुंची है। स्थिति यह है कि राज्य सरकार और राज्यपाल गोपाल गांधी आमने-सामने आ गए हैं. जहाँ राज्यपाल ने राज्यसरकार की आलोचना की है वहीं वाम गठबंधन ने राज्यपाल पर पक्षपात का आरोप लगाया है. शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी ने कहा था कि नंदीग्राम युद्धक्षेत्र में तब्दील हो गया है. कोई भी सरकार या समाज ऐसे किसी युद्धक्षेत्र को बने रहने की अनुमति नहीं दे सकती है, वो भी बिना किसी तत्काल और प्रभावी कार्रवाई के.
इसके जवाब में वाम गठबंधन के प्रमुख बिमान बोस ने कहा था कि राज्यपाल ने अपनी संवैधानिक सीमा का उल्लंघन किया है. उनका रवैया साफ़ तौर पर पक्षपातपूर्ण है. राज्यपाल के लिए मार्क्सवादी समर्थकों की मौत कोई मायने नहीं रखती. वो तभी बोलते हैं जब किसी और की मौत हो जाए या कोई और घायल हो जाए.
वयोवृद्ध मार्क्सवादी नेता ज्योति बसु ने नंदीग्राम मसले पर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल गोपाल कृष्ण गाँधी की टिप्पणी को अवांछित बताया है।बसु ने एक बयान में कहा कि इस मसले पर राज्यपाल ने टिप्पणी कर कोई अच्छा काम नही किया है। इससे पहले माकपा ने राज्यपाल पर निष्पक्ष नहीं रहने का आरोप लगाया था। कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल गोपाल कृष्ण गाँधी की राज्य के ताजा घटनाक्रम पर टिप्पणी से उत्पन्न विवाद से खुद को अलग रखते हुए कहा कि वह इस पर कोई प्रतिक्रिया देना नहीं चाहती। सहारा के समय चैनल पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणव मुखर्जी तो टिप्पणी देने की बजाए सारी बोलकर पत्रकारों के सामने से निकल गए।

नंदीग्राम में 'कम्युनिस्ट आतंक'-मेधा पाटकर
कोलकाता : सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा है कि पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में 'कम्युनिस्ट आतंक' प्रताड़ना और जोर जबरदस्ती कर फिर से अपनी पैठ बनाना चाहते हैं।सुश्री पाटकर ने नंदीग्राम में फिर से अपने आंदोलन को शुरू करते हुए कहा कि वहाँ शिकायत की कोई गुंजाइश नहीं है और लोग परेशान तथा बेसहारा बन गए हैं। उन्होंने दावा किया कि नंदीग्राम में पी‍ड़ितों को सहायता पहुँचाने का प्रयास करते समय उन्हें प्रता‍ड़ित किया गया और माकपा के कार्यकर्ताओं ने उन्हें वहाँ जाने से रोका है।नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता ने कहा कि गुरुवार को जब वह नंदीग्राम की तरफ जा रही थीं तो उनके वाहन को रोका गया और उनके एक सहयोगी को पीटा गया। उन्होंने कहा कि माकपा के गुंडों ने उन्हें भी बाल पकड़कर खींचा। सुश्री पाटकर ने कहा कि उन्होंने रेडक्रॉस से अनुरोध किया है कि नंदीग्राम में लोगों को माकपा के आतंक का शिकार होना पड़ रहा है इसलिए यह सामाजिक संगठन वहाँ लोगों के हितों के लिए उन्हें सहायता उपलब्ध कराए।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल गोपालकृष्ण गाँधी को नंदीग्राम मामले में कार्रवाई के लिए ज्ञापन सौंपने के बाद सुश्री पाटकर ने शुक्रवार शाम यहाँ कहा कि नंदीग्राम में मानवाधिकार का हनन हो रहा है, इसलिए उन्होंने मानवाधिकार आयोग के समक्ष गुहार लगाई है।
जानी-मानी समाजसेविका मेधा पाटकर नंदीग्राम के मसले पर कोलकाता के धर्मतला में बुध्दिजीवियों व कलाकारों के साथ भूख हड़ताल पर बैठी हैं. उनके साथ नंदीग्राम से भागकर आईं लड़किया और महिलाएं भी हैं। राज्यपाल को ग्यापन देने वे उस औरत के साथ भी गईं थीं जिसके साथ नंदीग्राम में कथित तौर पर बलात्कार का आरोप लगाया गया है। नंदीग्राम में पिछले एक सप्ताह से भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रही 'भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति' के समर्थकों और सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़पों के बाद वहाँ गहरा तनाव बना हुआ है. दोनों गुटों के बीच हुई हिंसा में लगभग नौ लोगों की मौत हो चुकी है और 50 से ज़्यादा लोग घायल हो गए हैं.सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा है कि नंदीग्राम ऐसा यातना शिविर बन चुका है, जहां माकपा कार्यकर्ता आतंक फैला रहे हैं।
नंदीग्राम हिंसा के विरोध में मौसमी चटर्जी आगे आईं
कोलकाता : पश्चिम बंगाल के नन्दीग्राम में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी कार्यकर्ताओं के कथित तांडव के विरोध में सामने आए कलाकारों की सूची में बीते जमाने की प्रसिद्ध अदाकारा मौसमी चटर्जी भी शामिल हो गईं। उन्होंने इसके विरोध में एक सम्मान ग्रहण करने से भी इनकार कर दिया। चटर्जी ने बताया - नन्दीग्राम में जो भी कुछ हो रहा है। वह अमानवीय है। ऐसे समय में कोई भी बंगाली कैसे मूक दर्शक बना रह सकता है। उन्होंने कहा कि वहां जिस तरह से सीपीएम के कार्यकर्ता बर्बर होकर मासूम जनता का खून बहा रहे हैं। इसे कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है। उन्होंने सवाल किया कि प. बंगाल में इस तरह का जंगल राज कैसे चल रहा है। गौरतलब है कि चटर्जी को एक प्रख्यात बंगाली पाकाशन संस्थान ने लाइफ्टाइम अवॉर्ड देने की घोषणा की थी जिसे उन्होंने इस समय लेने से इनकार कर दिया है। इस बीच कोलकाता में उन बुध्दिजीवियों की आज गिरफ्तारियां की गईं जो नंदीग्राम हिंसा पर लालबाजार पुलिस मुख्यालय के सामने विरोध जता रहे थे।

लेफ्ट को गुजरात पर बोलने का हक नहीं
नई दिल्ली: बीजेपी ने नंदीग्राम में जारी हिंसा के सवाल पर सीपीएम और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी के बीच विवाद में राज्यपाल का साथ देते हुए सीपीएम की कड़ी आलोचना की है। पार्टी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह राज्यपाल से नंदीग्राम के हालात पर ठोस रिपोर्ट मंगाकर वहां शांति बहाल करने के लिए जरूरी कदम उठाए। बीजेपी ने कहा है कि लेफ्ट वाले गुजरात पर इतना चिल्ला रहे हैं, लेकिन उन्हें नंदीग्राम क्यों नहीं सूझता। राज्यपाल ने वहां के गांवों पर कब्जे को गैरकानूनी करार देते हुए कहा है कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
बीजेपी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने सीपीएम की टिप्पणी को राज्यपाल की गरिमा पर चोट करार देते हुए कहा कि नंदीग्राम में पुलिस की सहायता से सीपीएम के गुंडे खुलेआम कई महीनों से नरसंहार को अंजाम दे रहे हैं। अभी तक वहां की सरकार ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की है? प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह गुजरात पर बोलते हुए थकते नहीं हैं, लेकिन नंदीग्राम में गरीबों में भी जो सबसे गरीब लोग हैं, वे मारे जा रहे हैं। इस पर उनकी चुप्पी पर सभी स्तब्ध हैं। हालात इतने खराब हो गए हैं कि लेफ्ट सरकार ने अपनी कलई खुलने के डर से अब वहां मीडिया और मानवाधिकार संगठनों को भी जाने से रोक दिया है।
नंदीग्राम प्रकरण पर कांग्रेस नीत केंद्र सरकार की चुप्पी की कड़ी आलोचना करते हुए बीजेपी ने पश्चिम बंगाल के हिंसाग्रस्त क्षेत्र की स्थिति का आकलन करने के लिए एक उच्च स्तरीय टीम भेजने का निर्णय लिया है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि प्रदेश के राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी की रिपोर्ट और नंदीग्राम में लगातार हो रही हिंसा के बावजूद केंद्र सरकार प्रदेश सरकार की रक्षा कर रही है। पार्टी इस मुद्दे को संसद के शीतकालीन सत्र में जोर-शोर से उठाएगी।
बीजेपी के उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने बताया सीपीएम केंद्र सरकार संरक्षित हत्यारी है। नंदीग्राम की हिंसा ने कम्युनिस्ट पार्टी के असली चेहरे को उजागर कर दिया है। इस मामले में केंद्र की चुप्पी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए नकवी ने कहा कि केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाला सत्तारूढ़ गठबंधन केवल सरकार को बचाने की फिराक में है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार केवल घड़ियाली आंसू बहा रही है और राज्यपाल की रिपोर्ट के बावजूद कुछ नहीं कर रही है।
बीजेपी के उपाध्यक्ष ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह नंदीग्राम की जमीनी हकीकत तथा स्थिति का जाएजा लेने के लिए पार्टी की टीम वहां भेजेंगे। उन्होंने कहा कि टीम की रिपोर्ट के आधार पर गुरुवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में इस मुद्दे को पार्टी जोर शोर से उठाएगी।

लगातार गलतियों से फंसी माकपा
बुधवार, 14 मार्च, 2007 को नंदीग्राम में बुधवार को हुई पुलिस गोलीबारी में १४ लोगों के मारे जाने और 50 से अधिक के घायल होने की वारदात को यही सरकार अंजाम दे चुकी है। हालांकि प्रशासन की ओर से सात लोगों की मरने और 25 लोगों के घायल होने की पुष्टि की गई । घायलों में कुछ पुलिसवाले भी हैं.दरअसल पूर्वी मिदनापुर ज़िले के नंदीग्राम के लोग पिछले कुछ समय से खेती की ज़मीन लेकर रसायन संयंत्र लगाने का विरोध कर रहे हैं और इसी को लेकर वहाँ पिछले कुछ दिनों से तनाव था.
तब भी पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी वामगठबंधन के घटकदलों में मतभेद उभर आए हैं. आरएसपी और फ़ॉर्वर्ड ब्लॉक ने इस घटना की निंदा करते हुए विरोध जताया था।
नंदीग्राम में विवाद की वजह है यहाँ प्रस्तावित रासायनिक इकाई की स्थापना के लिए भूमि आबंटन.
राज्य सरकार जहाँ इस तरह के कारख़ानों की स्थापना के लिए इस गाँव की ज़मीन के अधिग्रहण का अधिकार संबंधित समूहों को सौंप चुकी है वहीं स्थानीय लोग इसका विरोध कर रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे अपनी ज़मीन पर ऐसी कोई इकाई नहीं चाहते हैं और उन्हें उनकी ज़मीनें वापस कर दी जाएँ. इसको लेकर कई मानवाधिकार संगठन और राज्य के विपक्षी दल भी सरकार का विरोध करते रहे हैं. लोगों और पुलिस प्रशासन के बीच यहाँ की ज़मीन के अधिग्रहण को लेकर पिछले कुछ दिनों से संघर्ष लगातार जारी है. इसी इलाक़े में इंडोनेशिया की सलेम समूह भी निवेश करने की योजना बना रही है.

अब कांग्रेस के आगे घुटने टेकने की नौबत
नई दिल्ली : नंदीग्राम में लगातार जारी हिंसा ने सीपीएम के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार नंदीग्राम में हिंसा की तीखी आलोचना ने सीपीएम को परमाणु समझौते पर भी बैकफुट पर ला दिया है। लगातार जारी विरोध और सरकार के अड़ियल रवैए ने हालात को काफी बिगाड़कर रख दिया है। अब फंस चुकी माकपा के नंदीग्राम मामले में तेवर ढीले पड़ने लगे हैं।
नंदीग्राम में हिंसा के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल के वाम मोर्चे के घटक दल सीपीआई, फॉरवर्ड ब्लॉक और आरएसपी भी सीपीएम से असहमत हैं। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल द्वारा नंदीग्राम पर सार्वजनिक बयान पर सीपीएम के साथ सीपीआई ने कड़ी आपत्ति जताई है, मगर सीपीएम जिस तरह नंदीग्राम के मुद्दे से निपट रही है, उससे सीपीआई असंतुष्ट है। आरएसपी के पीडब्ल्यूडी मंत्री क्षिति गोस्वामी के इस्तीफे की इच्छा और लोकसभा से तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनजीर् के इस्तीफे पर भी चर्चा होगी।
नंदीग्राम में हिंसा की शुरुआत इस साल जनवरी में हुई थी। तभी सीपीआई ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राज्यसरकार के समस्या समाधान के लिए उठाए गए कदमों को अपर्याप्त बताया था। लेकिन बाद में अमेरिका से परमाणु समझौते पर यूपीए सरकार के साथ चले विवाद ने चारों वामदलों के बीच अन्तर्विरोधों की खाई पाट दी थी।
सीपीएम के पश्चिम बंगाल से आए सांसद मानते हैं कि नंदीग्राम के जख्म लंबे अरसे तक भरने वाले नहीं हैं। अगले लोकसभा चुनाव में इनका असर हो सकता है। पिछले लोकसभा चुनाव में सीपीएम 44 सीटें जीती थी, जिनमें से अधिकांश पश्चिम बंगाल से ही थीं। पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे के दल नंदीग्राम के संभावित राजनीतिक परिणामों को लेकर आशंकित हैं।

1 comment:

मिहिरभोज said...

माकपा का इतना लंबा राज्य आतंक के दम पर ही रहा है,पर आश्चर्य किसी मानवाधिकार संगठन ने इस मुद्दे को प्रभावी रूप से अभी नहीं उठाया.संभवतया ठेका उठने का इंतजार है

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