Wednesday, 14 November 2007

नंदीग्राम में सत्ता और पूंजी के मुखौटे में दिखे कम्युनिस्ट !







नंदीग्राम में सरकार की प्रायोजित हिंसा और बंद के बाद पश्चिम बंगाल की वाममोर्चा सरकार की जो छवि दुनिया के सामने आई है उसने पूरे कम्युनिस्ट सिध्दांतों को सत्तालोलुपता के हाथों गिरवी रख दिया है। गरीबों, मजदूरों और किसानों के हक के लिए सत्ता को दरकिनार करके न्याय की लड़ाई लड़ने की छवि वाले क्या यही कम्युनिस्ट हैं? यह सोचकर सिहरन पैदा हो जाती है कि अब कौन लड़ेगा गरीबों की लड़ाई? दखल या विरोधियों को सबक सिखाने की खूनी जंग तो नरेंद्र मोदी भी गुजरात में खेल चुके हैं। क्या नंदीग्राम को उससे अलग करके देखा जा सकता है? शायद इसका जवाब भी पश्चिम बंगाल के कम्युनिस्ट कर्णधारों के पास हो मगर मानवता के नाते जो नंदीग्राम में हुआ उसे तो कोई भी जायज नहीं ठहरा रहा है। यह बात अलग है कि खुद वाममोर्चा सरकार के मुख्यमंत्री इस इलाका दखल को सही ठहरा रहे हैं। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने सत्तारूढ़ सीपीएम के नंदीग्राम पर फिर से कब्जे को न सिर्फ सही ठहराया बल्कि यह भी कहा कि विपक्षी दलों को ईंट का जवाब पत्थर से दिया गया। 11 महीनों तक अपने घरों से दूर रहने वाले हमारे समर्थक लौटने के लिए बेकरार थे। उन्होंने अपनी जान का खतरा उठाया और घर लौटे। उन्होंने अपनी सरकार की अपील के बावजूद सीआरपीएफ भेजने में देरी के लिए केंद्र को दोषी ठहराया और कहा कि यदि सीआरपीएफ समय पर पहुंच जाती तो स्थिति को टाला जा सकता था।
मुख्यमंत्री ने कोलकाता में सोमवार १२ नवंबर को राज्य सचिवालय राइटर्स में पत्रकारों से कहा कि मैंने 27 अक्टूबर को इस बारे में गृह मंत्रालय को लिखा था, लेकिन उन्होंने मुझे 5 नवंबर को बताया कि केंद्रीय बलों को गुजरात और हिमाचल प्रदेश में भेजे जाने के कारण राज्य को केंद्रीय बल मुहैया नहीं कराए जा सकते। इन दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, मैंने खुद केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल और विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी से बात कर उनसे केंद्रीय बल भेजने की अपील की थी। नंदीग्राम के लिए सीआरपीएफ की एक बटैलियन मंजूर की गई। वह रविवार को कोलकाता पहुंची और अगले दिन नंदीग्राम। नंदीग्राम में पुलिस की विफलता के बारे में पूछे जाने पर बुद्धदेव ने कहा कि कुछ हद तक यह उनकी विफलता थी। पुलिस नंदीग्राम में नहीं घुस सकी। अगर वे ऐसा करने में कामयाब होते तो स्थिति बेहतर होती।
आप भी कुछ हद तक मुख्यमंत्री के इन बयानों से सहमत हो सकते हैं मगर क्या वह सब कुछ सही है जो बुध्ददेव कह रहे हैं। अगर नंदीग्राम में जो हो रहा है उसके विरोध को कुछ राजनैतिक दल अपनी सियासी जिम्मेदारी नहीं मान लेते और सरकार जो कर रही है उसे मनमाने तरीके से करने देते तो शायद इतना खून-खराबा नहीं होता। इससे खून खराबा टाला जा सकता था मगर अन्याय जो हो रहा है उसे कौन रोकेगा? क्या अपनी सियासी जरूरतों के लिए किसी रक्षक को भक्षक बनने दिया जा सकता है। रक्षक ही जब भक्षक बन जाएंगे, तो जनता कहां जाएगी?
इस पूरे प्रकरण के लिए सिर्फ कम्युनिस्ट ही दोषी कैसे ठहराए जा सकते हैं। आखिर वे भी राज्य के विकास और बंगाल की जनता का भला करने में जुटे हैं। भले ही इसके लिए विरोध करने वाले उजड़ जाएं। नंदीग्राम में पिछले 8 महीने से सीपीएम बेकसूर ग्रामीणों का खून बहा रही है और राज्य व केंद्र में सत्तासीन पार्टियों ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस मामले पर ध्यान देना तक गवारा नहीं समझा। आपको याद होगा कि इसी साल 14 मार्च को जब नंदीग्राम के किसान इंडोनेशिया के सलीम समूह के प्रस्तावित सेज़ के लिए जमीन अधिग्रहण किए जाने का विरोध कर रहे थे , तो पुलिस ने फायरिंग करके 15 से अधिक लोगों को मार दिया। यही वह पृष्ठभुमि है जिसके कारण नंदीग्राम में इलाका दखल का खूनी संग्राम माकपा सरकार व कैडरों ने खेला। इस घटना के बाद 8 महीने से सीपीएम अपना राजनीतिक वर्चस्व बनाए रखने के लिए घेराबंदी कर रखी थी। सरकार जब खुद ग्रामीणों को जमीने देने से मनाने में विफल रही तो अपने कॉडरों को वहां के लोगों को डराने , धमकाने और यहां तक कि जान से मारने की मौन रूप से खुली छूट दे दी। मरता क्या न करता और वहां के स्थानीय लोगों ने भी संगठित होकर सीपीएम के कॉडरों का विरोध किया , पर सरकारी की शह पर लड़ रहे ' पेशेवर गुंडों ' की फौज का मुट्ठी भर किसान व ग्रामीण भला क्या और कैसे मुकाबला करते ?
इस इलाका दखल के बारे में आरोप लगाया जा रहा है कि ' नंदीग्राम फतह ' करने के बाद सीपीएम ने अपनी रैली में भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति के बंधक बनाए गए 500 सदस्यों को जीत की ट्रॉफी के रूप में हाथ बांधकर पेश किया। इसके बाद भी माकपा पोलित ब्यूरो की बेशर्मी देखिए । वो कहती है कि नंदीग्राम में माओवादी और तृणमूल कांग्रेस के लोग अपनी जमीन मजबूत करने के लिए हिंसा पर उतारू हैं। जबकि अभी तक वहीं से एक भी माओवादी पकड़ा नहीं जा सका है। हो सकता है कल को कुछ गिरफ्तारियां करके उन्हें जबरन माओवादी भी करार दे दिया जाए।
कम्युनिस्टों के इस कुकृत्य को माफ नहीं किया जा सकता है तो बंगाल की विरोधी पार्टियों को भी बहुत ईमानदार नहीं माना जा सकता। पूरी तरह से हासिए पर खिसक चुकी ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के हाथ तो जैसे बटेर लग गई है। उनकी कुछ कोशिशें तो मुद्दे को अपने सियासी हक के लिए गरमाने की है तो कुछ उन किसानों के लिए लड़ने के लिए है जिन्हें माकपा के कैड़र कुचल देना चाहते हैं। रही कांग्रेस की बात तो पश्चिम बंगाल में उसे माकपा की बी टीम कहा जाता है। केंद्र की सरकार को माकपा ही चला रही है। ऐसे में पांग्रेस के सभी बड़े नेता चुप्पी साधे रहे और बोले तब जब लगा कि सियासी नुकसान हो जाएगा। थोड़ा कड़े होकर बोले भी तो सिर्फ प्रियरंजन दासमुंशी। अब क्या समझा जाए इन पार्टियों की मंशा को? अगर ईमानदारी रहती तो पहले ही आवाज उठाते और माकपा के इलाका दखल को रोकते। प्रणव मुखर्जी भी चुप रहे। आरोप है कि उनकी सीआरपीएफ तब लाई गई जब माकपा ने इलाका दखल का खूनी खेल मुकम्मल कर लिया। इतना ही नहीं इलाका दखल में कैडरों को इतनी छूट दी गई कि उनके काम में माडिया की मौजूदगी भी बर्दास्त नहीं की गई। सामाजिक संगठनों को भी नंदीग्राम से दूर रखा गया। अब दखल पूरा हो गया तो बुध्ददेव ने बुध्दिजीवियों से भी माफी मांग ली और मीडिया को भी छूट देने पर तैयार हो गए हैं।
फिलहाल तो सीआरपीएफ के जवानों ने मंगलवार को हिंसाग्रस्त नंदीग्राम के अधिकतर गांवों में प्रवेश कर छापे की कार्रवाई शुरू कर दी है। समाचार एजंसियों के मुताबिक पूर्वी मिदनापुर जिले के एसपी एस. एस.पांडा ने फोन पर बताया कि नंदीग्राम के गांवों में सीआरपीएफ के प्रवेश का सीपीएम या फिर भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति (बीयूपीसी) के समर्थकों ने कोई विरोध नहीं किया। सीआरपीएफ के जवान पुलिस के साथ विभिन्न इलाकों में गश्त कर रहे हैं
पांडा ने बताया कि केंद्रीय बलों ने 5 शिविर स्थापित किए हैं। जवानों ने सोनाचूरा, गोकुलनगर, अधिकारीपारा और अन्य इलाकों में छापे मारे हैं। इन इलाकों में कभी बीयूपीसी की पकड़ थी, लेकिन अब ये सीपीएम के नियंत्रण में हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले 11 महीने से भूमि अधिग्रहण के विरोध में आंदोलन कर रही बीयूपीसी के सदस्यों पर सीपीएम कैडरों के प्रतिशोध स्वरूप हमले की कोई खबर नहीं है। उन्होंने गरचक्रबेरिया में सोमवार की रात सीपीएम समर्थकों के साथ गोलीबारी होने की खबरों को भी गलत बताया। एक सवाल के जवाब में पांडा ने कहा कि करीब 1500 लोग अपने घर छोड़ कर चले गए हैं, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि ये लोग लौट आएंगे और उन पर कोई हमला नहीं होगा।

उधर प्रधानमंत्री ने भी बुद्धदेव से की बात की है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य से टेलिफोन पर बात कर नंदीग्राम की ताजा स्थिति की जानकारी ली। सीपीएम सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को नंदीग्राम के बारे में विस्तृत जानकारी दी। प्रधानमंत्री का फोन जिस समय आया, मुख्यमंत्री उस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने के बाद गवर्नर से मिलने जा रहे थे। मगर यह सब कवायद तब क्यों नहीं शुरू हुई जब माकपा कैडरों के खूनी खेल को रोकने की गुंजाइश थी।
नंदीग्राम मुद्दे को लेकर माकपा तथा कांग्रेस में वाकयुद्ध शुरू हो गया है। माकपा ने नंदीग्राम घटनाक्रम को 'राज्य प्रायोजित नरसंहार' बताए जाने के लिए मंगलवार को केन्द्रीय मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी की कड़ी आलोचना की। पार्टी ने मंत्री की इस टिप्पणी को निंदनीय तथा स्तब्धकारी करार देने के साथ ही आरोप लगाया कि दासमुंशी नंदीग्राम पर कब्जा करने के लिए तृणमूल कांग्रेस समर्थित सशस्त्र हुड़दंगियों की मदद कर रहे हैं और उन्हें उकसा रहे हैं। माकपा नेताओं सीताराम येचुरी तथा बासुदेव आचार्य ने संयुक्त बयान में कहा कि पिछले 11 महीने में जब से तृणमूल कांग्रेस समर्थित सशस्त्र हुड़दंगियों ने नंदीग्राम पर कब्जा जमाया है। दासमुंशी हर स्तर पर ऐसी ताकतों को समर्थन दे रहे हैं और उकसा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि दासमुंशी ने मार्च में नंदीग्राम में संचार सुविधाएँ बहाल करने के लिए पुलिस के हस्तक्षेप की निंदा की थी और इस माह के शुरुआत में अशांत क्षेत्र में सीआरपीएफ की बटालियन भेजने की राज्य सरकार की अपील का विरोध किया था।
प्रियरंजन दासमुंशी ने नंदीग्राम में जारी हिंसा पर गहरा दुख जताते हुए इसे 'राज्य प्रायोजित नरसंहार' की संज्ञा दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार अशांत स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केन्द्रीय सुरक्षा बलों का इस्तेमाल नहीं कर रही है। उन्होंने कहा- सरकार का यह दावा गलत है कि नंदीग्राम में सीआरपीएफ तैनात कर दी गई है, बल्कि सही यह है कि सीआरपीएफ के जवान नंदीग्राम के किसी कोने में खड़े हैं और उन्हें अभी तक तैनात नहीं किया गया है।

दासमुंशी ने कहा था कि पूरे राज्य को विनाश की तरफ धकेला जा रहा है। उन्होंने नंदीग्राम में इस स्थिति के लिए माकपा को जिम्मेदार ठहराया और इसे पार्टी की 'सामूहिक रणनीति' बताया। दासमुंशी ने कहा- यदि हत्या और बलात्कार की घटनाओं तथा 14 मार्च को हुई घटनाओं के दोषी लोगों को गिरफ्तार कर लिया जाता तो उस क्षेत्र में कुछ नहीं हुआ होता।
बंगाल सरकार को बर्खास्त करें-भाजपा
भाजपा अध्यक्ष राजनाथसिंह ने पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में भड़की हिंसा को राज्य में संवैधानिक मशीनरी की विफलता बताते हुए वहाँ की वाम मोर्चा सरकार को सोमवार को तत्काल बर्खास्त करने की माँग की।
कर्नाटक के रूप में दक्षिण भारत में पहली बार किसी राज्य में भाजपा की सरकार के अस्तित्व में आने के ऐतिहासिक पलों में भागीदारी के लिए यहाँ आए सिंह ने बीएस येद्दियुरप्पा के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देश मध्यावधि चुनाव की ओर बढ़ रहा है और भाजपा इसके लिए पूरी तरह तैयार है।
सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में भड़की हिंसा के मद्देनजर भाजपा प्रदेश सरकार को बर्खास्त करने की माँग करती है। सिंह ने राज्य में संवैधानिक मशीनरी को पूरी तरह विफल बताया।

नंदीग्राम घटना की जितनी निंदा की जाए कम
लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में हाल ही की हिंसक घटनाओं की जितनी भी निंदा की जाए कम है और इस मुद्दे को संसद के शीतकालीन सत्र में उठाया जाएगा।
आडवाणी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ सुबह नई दिल्ली से यहाँ नेताजी सुभाषचंद्र हवाई अड्डे पहुँचे। प्रतिनिधिमंडल में तृणमूल कांग्रेस के सांसद मुकुल राय के अलावा भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज और एसएस अहलूवालिया, शिवसेना के अनंत गीते, अकाली दल के सुखवीरसिंह बादल, जनता दल (यूनाइटेड) के शरद यादव, बीजू जनता दल के बीके त्रिपाठी तथा चंदन मित्रा शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल तामलुक अस्पताल और शरणार्थी शिविर का भी दौरा करेगा। आडवाणी ने कहा कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को परमाणु करार सहित अंतरराष्ट्रीय मामलों की चिंता है जबकि देश इस बात को लेकर चिंतित है कि मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य की अगुवाई वाली माकपा सरकार नंदीग्राम में किसानों का शोषण कर रही है।

वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि नंदीग्राम का मामला परमाणु करार से कम महत्वपूर्ण नहीं है और विपक्ष इसे संसद के शीतकालीन सत्र में जोरशोर से उठाएगा। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के किसी भी मंत्री को नंदीग्राम की स्थिति जानने के लिए वहाँ जाने की चिंता नहीं है। प्रतिनिधिमंडल नंदीग्राम से लौटने के बाद शाम को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल गोपाल कृष्ण गाँधी से मुलाकात करेगा।
नंदीग्राम में घायलों से मिले आडवाणी
लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी पश्चिम बंगाल के हिंसाग्रस्त क्षेत्र नंदीग्राम की स्थिति का जायजा लेने के लिए मंगलवार को बेरोकटोक पहुँच गए। आडवाणी राजग के आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ नंदीग्राम पहुँचे। तामलुक से पूरे मार्ग में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। आडवाणी ने तामलुक में अस्पताल जाकर हिंसा में घायल हुए लोगों का हालचाल पूछा और स्थिति की जानकारी ली। आडवाणी के साथ गए तृणमूल कांग्रेस के नेता मुकुल रे ने घायलों की प्रतिक्रिया और अनुभवों का अनुवाद किया। आडवाणी गोकुल नगर, तेंगुआ और सोनाचुरा में विभिन्न स्थानों पर रुके और प्रभावित लोगों से बातचीत की। एक ग्रामीण ने आडवाणी से कहा- हम चाहते हैं कि नंदीग्राम में शांति बहाल हो। कई नेता हमसे मुलाकात करने यहाँ आए और वापस चले गये लेकिन स्थितियों में कोई बदलाव नहीं आया। मेहरबानी करके इस बार यह सुनिश्चित कीजिए कि हम यहाँ सुरक्षित रहें।
आडवाणी ने कहा- मैं इस मुद्दे को संसद में उठाऊँगा। इसके अलावा मैं पश्चिम बंगाल के राज्यपाल गोपाल कृष्ण गाँधी से कोलकाता में मुलाकात करूँगा और उनके साथ स्थिति पर विचार-विमर्श करूँगा। प्रतिनिधिमंडल में रे के अलावा भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज और एसएस अहलूवालिया, शिवसेना के अनंत गीते, अकाली दल के सुखवीरसिंह बादल, जनता दल (यू) के शरद यादव, बीजू जनता दल के बीके त्रिपाठी तथा चंदन मित्रा (निर्दलीय) शामिल हैं।

बंद में बेबस नजर आया पश्चिम बंगाल
कोलकाताः पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम घटनाक्रम के विरोध में आयोजित बंद का व्यापक असर देखने को मिला और बंद समर्थकों के उत्पात के बीच जनजीवन ठप्प पड़ गया। बंद समर्थकों ने सड़कों पर जाम लगाकर सब कुछ जाम करने की कोशिश की। उधर नंदीग्राम से खबर आई कि आरपीएफ के करीब 100 जवान और एक मैजिस्ट्रेट हिंसाग्रस्त नंदीग्राम में प्रवेश करने में सफल रहे। इसके पहले केंद्रीय बल की तीन कंपनियां सीपीएम समर्थकों के अवरोध के चलते इलाके में जाने में विफल रही थीं।
राज्य के गृह सचिव पी. आर. राय ने कहा कि सीआरपीएफ की 5 कंपनियां पहुंच चुकी हैं और उसमें एक कंपनी नंदीग्राम में प्रवेश कर गई है। दो और कंपनियों के एक-दो दिनों में पहुंचने की संभावना है। गांव में किसी को प्रवेश नहीं देने के बारे में पूछे जाने पर राय ने कहा कि आप स्थिति के बारे में जानते हैं, सीआरपीएफ को भी जाने की अनुमति नहीं दी जा रही।
राय ने कहा कि गांव में स्थिति तनावपूर्ण मगर नियंत्रण में है। इसके पहले सीआरपीएफ के महानिदेशक एस. आई. एस. अहमद ने मुख्यमंत्री बुद्घदेव भट्टाचार्य से राइटर्स बिल्डिंग में मुलाकात की। सीपीएम समर्थकों द्वारा सड़कें जाम कर दिए जाने से सीआरपीएफ की 3 कंपनियों को रविवार रात पूर्वी मिदनापुर जिले के मुख्यालय तामलुक लौटना पड़ा था।
उधर, पश्चिम बंगाल सरकार में आरएसपी के मंत्री मनोहर टिर्की ने कहा कि वह नंदीग्राम में हुई हत्याओं को लेकर बुद्घदेव भट्टाचार्य सरकार में नहीं बने रहना चाहते। टिर्की ने कहा कि मैंने पार्टी को लिखा है कि मैं भी मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना चाहता हूं। टिर्की ने कहा कि लेफ्ट फ्रंट का गठन लोगों के साथ खड़े होने के लिए किया गया था और नंदीग्राम में हत्याओं के बाद मंत्री बने रहना मेरे लिए शर्म की बात हो गई है।
इसके पहले आरएसपी के एक और मंत्री क्षिति गोस्वामी ने इस्तीफा देने की पेशकश की थी। विभिन्न राजनीतिक दलों के सोमवार के राज्यव्यापी बंद का असर अब तक अप्रभावित रहने वाले कोलकाता के आईटी क्षेत्र पर भी देखने को मिला। केवल 10 से 15 फीसदी कर्मचारी ही काम पर गए। साल्ट लेक आईटी कमेटी के सदस्य एस. राधाकृष्णन ने बताया कि बंद के कारण विभिन्न आईटी कंपनियों में उपस्थिति कम रही।
विप्रो टेक्नालाजीज 2004 में परिचालन शुरू होने से लेकर अब तक पहली बार बंद रही। एक अन्य आईटी कंपनी टेक महिन्द्रा ने अपने बीपीओ परिचालन को अगले 48 घंटे के लिए नोएडा स्थानांतरित कर दिया है। नासकॉम के अध्यक्ष किरण कार्णिक ने कहा कि राज्य सरकार को कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराकर उनमें विश्वास का संचार करना चाहिए।
दूसरी तरफ बंद समर्थकों ने हावड़ा के पंचानन टोला में बंगाली दैनिक ' आजकल ' के पांच कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर बदसलूकी की। दैनिक के सूत्रों ने कहा कि बंद समर्थकों ने समाचार पत्र के पांच कर्मचारियों को उनके वाहन से जबरदस्ती बाहर निकाला और उनके साथ बदसलूकी की। कर्मचारियों में एक महिला भी शामिल थी। सूत्रों ने कहा कि इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है।
इलाका दखल पूरा किया
तामलुक / मिदनापुर : पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में रविवार को पुलिस के मूक समर्थन से सत्ताधारी सीपीएम के कार्यकर्ताओं ने ' ऑपरेशन कब्जा ' की मुहिम को परवान चढ़ा दिया। इससे पहले कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान यहां पहुंचते तृणमूल समर्थिक भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति व सीपीएम के कॉडरों के बीच ' युद्ध ' समाप्त हो चुका था और एक बार फिर करीब-करीब पूरे नंदीग्राम पर सत्ताधारी पार्टी कब्जा जमा चुकी थी। नंदीग्राम पर कब्जे के बाद सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एक रैली भी निकाली जिसमें भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति के बंधक बनाए गए 500 सदस्यों को हाथ बांधकर विजय प्रतीक के रूप में प्रदर्शित भी किया गया।
सीपीएम के लोग रविवार को नंदीग्राम में फायरिंग करते हुए प्रवेश किया और लूटपाट व आगजनी करते हुए पूरे क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। इसमें कितने लोगों की जानें गईं है इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है क्योंकि सीपीएम कार्यकर्ताओं ने नंदीग्राम में जाने और आने के सभी रास्ते बंद कर दिए थे। यहां तक कि एसपी के काफिले को भी अंदर नहीं जाने दिया। एक स्थानीय अखबार ने भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति का नेतृत्व कर रहे विधायक शिशिर अधिकारी के हवाले से बताया है कि इस हमले में 50 लोग मारे गए हैं और 200 से ज्यादा घायल हुए हैं।
नंदीग्राम पर कब्जे के लिए पूर्वी और पश्चिमी मिदनापुर के दो शीर्ष नेताओं ने एक मीटिंग में दो हफ्ते पहले ही योजना बनाई थी। इस मीटिंग में पूर्वी मिदनापुर के एक सांसद और राज्य सरकार के मंत्री भी शामिल थे। मीटिंग में मुख्य रूप से इस बात पर चर्चा हुई कि 11 महीने से निंयत्रण से बाहर नंदीग्राम पर कैसे कब्जा किया जाए। इसको परवान चढ़ाने के लिए तीन जिलों-पूर्वी मिदनापुर , बांकुड़ा और उत्तरी 24 परगना से हथियारबंद लोग बुलाए गए थे।

प. बंगाल के राज्यपाल ज्योति बसु से मिले
कोलकाता : पश्चिम बंगाल के राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी ने वामपंथी नेता ज्योति बसु से नंदीग्राम मुद्दे पर शांति कायम करने के उपायों के बारे में चर्चा की। उन्होंने संकेत दिया कि नंदीग्राम में हुई हिंसा के लिए बुद्घदेव भट्टाचार्य की सरकार जिम्मेदार है। साल्ट लेक स्थित निवास पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु से करीब 40 मिनट की चर्चा के बाद राज्यपाल ने संवाददाताआ को संबोधित करते हुए कहा - मुझे पूरा भरोसा है कि उनके उपायों से नंदीग्राम में दोबारा शांति बहाल हो जाएगी। यह पूछे जाने पर कि क्या आप राज्य के मुख्यमंत्री से बात करेंगे राज्यपाल ने कहा - मुख्यमंत्री मुझसे बात करेंगे। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को सीपीएम द्वारा नंदीग्राम में प्रवेश करने से रोके जाने के बारे में राज्यपाल ने कहा - मुझे पूरा भरोसा है कि मुख्यमंत्री उचित कदम उठाएंगे। राज्यपाल से पहले सीपीएम के राज्य सचिव विमान बोस ने ज्योति बसु से आधे घंटे तक बातचीत की।

इसके साथ ही शांति प्रक्रिया की कवायद शुरू हो गई है। यह तो समय ही बताएगा कि इलाका दखल के बाद कुचले जा चुके किसानों के साथ कितना न्याय करेगी यह दमनकारी वाममोर्चा सरकार और मौकापरस्त पार्टियां? फिलहाल तो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने नंदीग्राम की रिपोर्ट मांगी है। वाममोर्चा सरकार भी राज्यपाल को अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने माना है कि नंदीग्राम नें कानून व व्यवस्था की रक्षा सरकार नहीं कर पाई है। देखिए न्याय होता है या न्याय का राजनैतिक वध।

1 comment:

हर्षवर्धन said...

आप कोलकाता में हैं। पूरी विस्तृत रिपोर्टिंग की है। बढ़िया है सारी सच्चाई लोगों को पता चलना चाहिए। मुझे तो पाकिस्तान औऱ पश्चिम बंगाल के हालात एक जैसे दिखने लगे हैं। आप भी देखिए
http://www.batangad.blogspot.com/

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