Tuesday, 18 December 2007

जानलेवा है त्वचा रोग भी !

शिकागो- वैज्ञानिकों ने एक नए शोध से यह नतीजा निकाला है कि गंभीर त्वचा रोग सोरियासिस से पीड़ित युवा परिवार में अपने अन्य भाई बहनों के मुकाबले युवावस्था में ही मौत का शिकार हो सकता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि सामान्य लोगों के मुकाबले गंभीर त्वचा रोग से पीड़ित होने पर जीवन प्रत्याशा पाँच फीसदी कम हो जाती है। इससे पीड़ित व्यक्ति की जिंदगी के तीन से अधिक साल कम हो सकते हैं। महिलाओं की उम्र भी इस कारण चार साल तक कम हो सकती है।

शोधकर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट में कहा है यह अध्ययन इस बात को रेखांकित करता है कि बीमारी की यह स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया के स्कूल ऑफ मेडिसिन में सहायक त्वचा रोग प्रोफेसर जोएल गेलफेंड ने कहा है यह त्वचा को विकृत करने से अधिक गंभीर स्थिति है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है, जिसका पीड़ित व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बेहद बुरा असर होता है। नतीजा यह होता है कि जीवन प्रत्याशा कम हो जाती है।

वे कहते हैं कि गंभीर स्थिति तक पहुँचने से बचने के लिए जरूरी है कि मरीज नियमित रूप से स्वास्थ्य जाँच कराएँ और स्वस्थ जीवन शैली अपनाएँ।

सोरियासिस एक सामान्य, लेकिन असाध्य त्वचा रोग है। शुरुआत में यह त्वचा पर लाल रंग के धब्बों के रूप में नजर आता है। ये धब्बे शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकते हैं।

चिकित्सकों की राय में यह बीमारी आंशिक रूप से आनुवांशिक होती है जिसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता में कुछ विकृति भी शामिल हो सकती है। इसका संबंध निराशा अधिक धूम्रपान शराब के सेवन तथा मोटापे ह्म्द्य संबंधी बीमारियों और कुछ प्रकार के कैंसर से होता है।

2 comments:

मिहिरभोज said...

मेरी बात को अन्यथा न लें पर इस तरह के लेख बिना छान बीन किये नहीं लिखे जाने चाहिये,यहां जो भी लिखा गया हे सत्य का अंश मात्र तो है पर पूरा सच नहीं,किसी रोगी का आत्मविश्वास पैदा करने में चिकित्सक को महिनों लग जाते हैं पर इस तरह की सार्वजनिक सूचनाएं उनका विश्वास तोङ डालती है,सोरायसिस सर्वथा जानलेवा रोग नहीं है,मैं स्वयं एक चर्म रोग विशेषज्ञ हूं.

डा.मान्धाता सिंह said...

शुक्रिया भाई साहब। एक डाक्टर होने के नाते आप इस रोग को ज्यादा जानते होंगे शायद इसी लिए इतने आत्मविश्वास से आपने मेरे भी मन का डर भगाया। मैं उपाधि से डाक्टर मगर पेशे से पत्रकार हूं। अगर कोई खबर है तो लोगों तक पहुंचाना आवश्यक मानता हूं। यह खबर भी एक रिसर्च के जरिए सामने आई है और पूरी दुनिया के नजरों से गुजर गई हैं। अब आप जैसे लोगों से इसके सच झूठ को सामने लाने की अपेक्षा है।
एक गुजारिश है आपसे। आप इस रोग के बारे में विस्तार से मुझे मेल करें मैं इस की सच्चाई को ब्लाग में प्रकाशित करना चाहता हूं। आप संयोग से हिंदी जानते हैं तो हिंदी में स्वास्थ्य की गूढ़ बातें भी लोगों तक इसी बहाने पहुंच जाएगा। एक बार फिर जानकारी देने और सक्रियता के लिए शुक्रिया।
मान्धाता सिंह
कोलकाता

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